tag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post5417338186150434338..comments2008-03-16T13:30:48.529+05:30Comments on आवाज़: कहानी 'एक और मुखौटा' का पॉडकास्टनियंत्रक । Adminhttp://www.blogger.com/profile/02514011417882102182noreply@blogger.comBlogger12125tag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-59037953863576660802008-01-28T15:56:00.000+05:302008-01-28T15:56:00.000+05:30प्रयास अनुकरणीय ..... टीम को बधाई।प्रयास अनुकरणीय ..... <BR/>टीम को बधाई।Gita pandithttp://www.blogger.com/profile/17911453195392486063noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-59097104630675569492008-01-21T22:39:00.000+05:302008-01-21T22:39:00.000+05:30बहुत बहुत धन्यवाद आप सबका जो इस कहानी को इतना प्या...बहुत बहुत धन्यवाद आप सबका जो इस कहानी को इतना प्यार दिया ..दिवाकर जी आपने कहानी के जिस सकारात्मक रूप को समझा वह सरहनीय है ..मैं कहना भी यही चाहती थी इस कहानी में कि अपने आत्म्समान से जीना ही जीना है .अभी आपके आईडी के लिए आपके ब्लाग को भी देखा और पहला ब्लाग देखा संस्कृत भाषा में .देख के बहुत अच्छा लगा मुझे ..संस्कृत भाषा पर इतनी पकड़ तो नही है पर इसको पढ़ने की कोशिश करना अच्छा लगता है ..अच्छा लगा आप यहाँ आये और इस कहानी को सराहा .शुक्रिया तहे दिल से आपका और सब दोस्तों का जिन्होंने इस पर दी गई आवाज़ की मेहनत को समझा और यूं हम सब को आगे बढ़ने के लिए होंसला दिया !!रंजूhttp://www.blogger.com/profile/07700299203001955054noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-18994610590894842732008-01-21T18:49:00.000+05:302008-01-21T18:49:00.000+05:30रंजना जी ! बहुत अच्छी कहानी है । इसपर शुरू में तो ...रंजना जी ! बहुत अच्छी कहानी है । इसपर शुरू में तो करुण भाव आता है परन्तु जब वह नीरज को पहचान लेती है तो तो एक संतोष और सम्मान का भाव आता है । दिखता है कि उसकी आत्मा जागती है । उसका आत्मविश्वास अभी ज़िन्दा है । वह असहाय और नादान नहीं है । ज़िन्दगी को बोझ की तरह नहीं बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जी रही है । यद्यपि नीरज का ऐसा होना समाज में ऐसे भावों की व्याप्ति के विषय में निराश सा कर सकता है परन्तु वह मीरा की स्वावलम्बन और स्वाभिमान के आगे दुःखी नहीं करता है । अच्छी कहानी के लिए बधाई । किसी का कुछ भी मत हो, मुझे इस कहानी का अन्त सकारात्मक लगा ।दिवाकर मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/15376537950079751261noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-8601753356335735782008-01-19T02:20:00.000+05:302008-01-19T02:20:00.000+05:30रंजना जी, आज शुक्र्वार को थोडा समय मिला तो सब से प...रंजना जी, आज शुक्र्वार को थोडा समय मिला तो सब से पहले मेने *'एक और मुखौटा' सुनी,ओर मुझे आकशबाणी का हवामहल याद आ गया,आप की सारी टीम को मेरी ओर से बाधाई,अरे हा कहानी बहुत ही सुन्दर लगी मन भावन, बस अन्त मे दिल थोडा उदास हो गया.<BR/>धन्यवादराज भाटिय़ाhttp://www.blogger.com/profile/10550068457332160511noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-51111028186594065972008-01-18T11:41:00.000+05:302008-01-18T11:41:00.000+05:30बहुत ही अच्छा. पूरी टीम को बधाई. आलोक सिंह "साहिल"...बहुत ही अच्छा. पूरी टीम को बधाई.<BR/> आलोक सिंह "साहिल"sahilnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-43440469789948128932008-01-17T22:01:00.000+05:302008-01-17T22:01:00.000+05:30प्रस्तुतिकरण बहुत सुन्दर है परन्तु कहानी का अन्त ...प्रस्तुतिकरण बहुत सुन्दर है परन्तु कहानी का अन्त कुछ ज्यादा जल्दी हो गया। <BR/>एकदम अचानक ही !!!<BR/>टीम को बहुत बहुत बधाई।सागर नाहरhttp://www.blogger.com/profile/16373337058059710391noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-70272860458140186512008-01-16T15:06:00.000+05:302008-01-16T15:06:00.000+05:30*कहानी सुनना अच्छा लगा.पहले पढ़ ली थी इसलिए घटना क्...*कहानी सुनना अच्छा लगा.पहले पढ़ ली थी इसलिए घटना क्रम मालूम था.<BR/>*सब ने मेहनत की है. अच्छा प्रयास है <BR/>बहुत पहले आकाशवाणी पर ऐसी कहानियाँ सुना करती थी.<BR/>यह अच्छा किया कि आप ने दूसरा लिंक भी दिया है.<BR/>क्योंकि मैं ले प्लेयर नहीं सुन पाती हूँ.activate नहीं होता है.मैंने सारा सिस्टम चेक कर लिया है-<BR/>रियल प्लेयर सब ठीक है.मेरा सिस्टम भी up टू डेट है.<BR/><BR/>यही कारण है 'आवाज ' में श्रीकांत जी की कहानी भी इसीलिए अभी तक नहीं सुन पायी हूँ.<BR/>धन्यवाद -Alpana Vermahttp://www.blogger.com/profile/08360043006024019346noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-31892113296416034912008-01-16T10:13:00.000+05:302008-01-16T10:13:00.000+05:30बहुत बढ़िया जी बहुत बढ़िया..सुन्दर पोडकास्ट..टीम को ...बहुत बढ़िया जी बहुत बढ़िया..<BR/>सुन्दर पोडकास्ट..<BR/><BR/>टीम को हार्दिक बधाई..Bhupendra Raghavhttp://www.blogger.com/profile/05953840849591448912noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-25115457939664611852008-01-16T09:56:00.000+05:302008-01-16T09:56:00.000+05:30आज आपके चिट्ठे पर कहानी और गीत सुनने का भी सुयोग म...आज आपके चिट्ठे पर कहानी और गीत सुनने का भी सुयोग मिला, बहुत ही बेहतरीन कोशिश है, डटे रहो हिन्द युग्म के भाइयों....हम आपके साथ हैं। मैंने भी ऑरकुट पर राजभाषा-सेवी नामक कम्यूनिटी शुरु की है, जहां सारे हिन्दी प्रेमियों व सेवियों का बहुमूल्य विचारों-प्रतिक्रियाओं सहित स्वागत है। सादर, राजीव सारस्वतrajeevhttp://www.blogger.com/profile/12280865675615642326noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-10092260840271970912008-01-16T01:13:00.000+05:302008-01-16T01:13:00.000+05:30कहीं-कहीं कनैक्शन सतत न होने के कारण बाधा आई है, ल...कहीं-कहीं कनैक्शन सतत न होने के कारण बाधा आई है, लेकिन प्रयास अनुकरणीय है। टीम को बधाई।शैलेश भारतवासीhttp://www.blogger.com/profile/02370360639584336023noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-17001553312328872192008-01-15T19:48:00.000+05:302008-01-15T19:48:00.000+05:30मुझे रंजना जी की टिप्पणी से इत्तेफ़ाक है... कहानी प...मुझे रंजना जी की टिप्पणी से इत्तेफ़ाक है... कहानी पढने और कहानी सुनने में जमीन आसमान का अन्तर है... श्रीकान्त जी, शोभा जी व श्र्वेता जी बधाई के पात्र हैं...<BR/>कहानी एक छोटी सी गलतफ़हमी...शायद पाठको/श्रवणकारों को ऐसा लगे.. कि वजह से अचानक अन्त पा गई.. यह थोडा सा खला.मोहिन्दर कुमारhttp://www.blogger.com/profile/02273041828671240448noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-78091806441396607792008-01-15T16:25:00.000+05:302008-01-15T16:25:00.000+05:30बहुत बहुत शुक्रिया शोभा जी और श्रीकांत जी ..आप दोन...बहुत बहुत शुक्रिया शोभा जी और श्रीकांत जी ..आप दोनों ने इस कहानी को अपनी आवाज़ दी और इस में जान फूंक दी ..जो आपने इस में बीच में ध्वनि का उचित उपयोग किया है उस में आपकी मेहनत नज़र आती है ..बहुत बहुत शुक्रिया इस को यूं सुनाने के लिए !!रंजूhttp://www.blogger.com/profile/07700299203001955054noreply@blogger.com