tag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-18994610590894842732008-01-21T18:49:00.000+05:302008-01-21T18:49:00.000+05:302008-01-21T18:49:00.000+05:30रंजना जी ! बहुत अच्छी कहानी है । इसपर शुरू में तो ...रंजना जी ! बहुत अच्छी कहानी है । इसपर शुरू में तो करुण भाव आता है परन्तु जब वह नीरज को पहचान लेती है तो तो एक संतोष और सम्मान का भाव आता है । दिखता है कि उसकी आत्मा जागती है । उसका आत्मविश्वास अभी ज़िन्दा है । वह असहाय और नादान नहीं है । ज़िन्दगी को बोझ की तरह नहीं बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जी रही है । यद्यपि नीरज का ऐसा होना समाज में ऐसे भावों की व्याप्ति के विषय में निराश सा कर सकता है परन्तु वह मीरा की स्वावलम्बन और स्वाभिमान के आगे दुःखी नहीं करता है । अच्छी कहानी के लिए बधाई । किसी का कुछ भी मत हो, मुझे इस कहानी का अन्त सकारात्मक लगा ।दिवाकर मिश्रhttp://www.blogger.com/profile/15376537950079751261noreply@blogger.com