tag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-82154240462932266862007-12-06T19:50:00.000+05:302007-12-06T19:50:00.000+05:302007-12-06T19:50:00.000+05:30कमाल हो गया जी..वन्डरफुल.. अब पहले कानों को ईर्ष्य...कमाल हो गया जी..<BR/><BR/>वन्डरफुल.. <BR/><BR/>अब पहले कानों को ईर्ष्या होती थी आखों से क्यूँकि प्यारी प्यारी कहानी आँखें पढती थीं दिल के लिये <BR/>आज आखें इतराकर कह लो या जलन से बन्द हैं और कान के जरिये हो रहा है कहानी का पदार्पण दिल की दहलीज में..<BR/>शायद आँखें बन्द हों इसी खीज में..<BR/><BR/>मज़ा आ गया..<BR/>बहुत बहुत बधाई <BR/>आँखों को मिली राहत<BR/>कानो की आयी शामत..<BR/><BR/>ओ हो .. मेरा मतलव कान बहुत दिनो से निठल्ले बैठे थे ना अब काम करना पडेगा.<BR/>एक माइक लटकाना पडेगा.<BR/>कहानी को साथ साथ सुनते हुए दिल को भी सुनाना पडेगा..<BR/><BR/>बहुत बहुत बधाई..Bhupendra Raghavhttp://www.blogger.com/profile/05953840849591448912noreply@blogger.com