tag:blogger.com,1999:blog-2806191542948835941.post-82279795338718584562007-12-05T19:11:00.000+05:302007-12-05T19:11:00.000+05:302007-12-05T19:11:00.000+05:30अच्‍छा प्रयास है और कहानी के बारे में तो येकहा ही ...अच्‍छा प्रयास है और कहानी के बारे में तो येकहा ही जाता है कि उसे पढ़ना रोचक होता है सुनने से ज्‍यादा । अच्‍छा प्रयास है । श्रीकांत मिश्र कांत ने गज़ब का अभिनय किया है स्‍वर से उन्‍होंने कहानी को साकार कर दिया है । कहीं से भी नहीं लगा कि कोई कहानी को पढ़ रहा है । विविध भारती के हवा महल की याद दिला दी उन्‍होंनें । शोभा महेन्‍दु जी जरूर उनके मुकाबले कमजोर रही हैं ऐसा लगा कि वो पढ़ कर ही बोल रहीं हैं वे स्‍वर से अभिनय नहीं कर पाईं जैसा कमाल श्रीकांत कर गए हैं । फिर भी मेरी बधाई मैंने पूरी कहानी सुनी और फिर सूरज प्रकाश जी तो अपने आप में कहानी का स्‍कूल हैं उनको मेरा प्रणाम कहियेगा । कहानी पर कुछ भी लिखना सूरज को दीपक दिखाने के समान होगा । मेरी बधाई सभी को ।पंकज सुबीरhttp://www.blogger.com/profile/16918539411396437961noreply@blogger.com