Sunday, July 27, 2008

पॉडकास्ट कवि सम्मेलन का आमंत्रण अंक



दोस्तो,

जैसाकि हमने वादा किया था कि महीने के अंतिम रविवार को पॉडकास्ट सम्मेलन का प्रसारण करेंगे। इंटरनेट की गति हर एक प्रयोक्ता के पास अलग-अलग है, इसलिए हम एक समान गुणवत्ता नहीं तो रख पाये हैं, मगर फिर भी एक सम्मिलित प्रयास किया है। आशा है आप सभी को पसंद आयेगा।

नीचे के प्लेयर से सुनें।



प्रतिभागी कवि
रंजना भाटिया, दिव्य प्रकाश दुबे, मनुज मेहता, नरेश राणा, शोभा महेन्द्रू, शिवानी सिंह, अनिता कुमार, अभिषेक पाटनी
संचालक- हरिहर झा
उप-संचालक- शैलेश भारतवासी

हमें हरिहर झा, ब्रह्मनाथ त्रिपाठी अंजान और पीयूष पण्डया की भी रिकॉर्डिंग प्राप्त हुई थी, लेकिन उन्हें आसानी से सुन पाना सम्भव नहीं था। इसलिए हम उनका इस्तेमाल नहीं कर सके।

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)




VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis


हम सभी कवियों से यह गुज़ारिश करते हैं कि अपनी आवाज़ में अपनी कविता/कविताएँ रिकॉर्ड करके podcast.hindyugm@gmail.com पर भेजें। आपकी ऑनलाइन न रहने की स्थिति में भी हम आपकी आवाज़ का समुचित इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे।

# Podcast Kavi Sammelan. Part 1. Month: July 2008.

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19 श्रोताओं का कहना है :

अनूप शुक्ल का कहना है कि -

अच्छा है आयोजन! बधाई।

रंजना [रंजू भाटिया] का कहना है कि -

bahut khub yah to khub raha bahut sarthak koshish

shivani का कहना है कि -

सबसे पहले मैं हिन्दयुग्म के पहले ऑनलाइन कवि सम्मलेन की सफलता के लिए सबको मुबारकवाद देती हूँ !सच मानिए मैं इस कवि सम्मलेन को ले कर बहुत उत्साहित थी ,परन्तु अपनी तबियत खराब होने के कारन इसे सुन नहीं पाई...अभी जब सुना तो मन प्रसन्न हो गया !शेलेश जी सजीव जी और हरिहर जी आपने बहुत अच्छे से मंच संभाला ,रंजना जी आपकी आवाज़ बहुत ही मधुर लगी और कविता तो थी ही बहुत अच्छी !दिव्य प्रकाश जी आपने बहुत ही सरलता से हमें बचपन में पहुंचा दिया !अभिषेक पाटनी जी मैं आपको पहले भी पढ़ चुकी हूँ !आप तो वाकई प्रशंसा के पात्र हैं !अनीता जी आपके कॉमेंट्स तो अक्सर मैं अपने ब्लॉग में देखती हूँ और आपके लेख भी पढ़े हैं ,आपकी वसीयत भी कमाल की है !शोभा जी आपसे मैं प्रगति मैदान में पहला सुर के विमोचन में मिली थी वहां भी आपकी कविता सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था !आपकी कविता बहुत पसंद आई !आशा करती हूँ हम सबका ये प्रयास यूँ ही चलता रहेगा !सच ही इस कामयाबी के लिए सजीव जी और उनके सभी सहयोगी बधाई के पात्र हैं !आप सब को मेरी और से अनेकानेक शुभकामनायें !बस ये क्रम यूँ ही चलता रहे !

Parul का कहना है कि -

bahut badhiyaa...aanand aaya...

शोभा का कहना है कि -

हिन्दयुग्म के इस अनूठे प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। बहुत अच्छा लगा सुनकर। सभी कवियों की कविताएँ उनकी आवज़ में अच्छी लगी। सभी को बधाई।

शोभा का कहना है कि -

हिन्दयुग्म के इस अनूठे प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। बहुत अच्छा लगा सुनकर। सभी कवियों की कविताएँ उनकी आवज़ में अच्छी लगी। सभी को बधाई।

तपन शर्मा का कहना है कि -

मैंने कभी भी इस तरह के पोडकस्ट के बारे में न ही सुना, न पढा...हिन्दयुग्म पर इसकी भी शुरुआत हो गई है...
ये बहुत ही सार्थक प्रयास कहा जा सकता है. भारत में चूँकि इंटेरनेट की गति की समस्या रहेगी इसलिये आवाज़ की कमी वगैरह जैसी दिक्कतें आगे भी होगी.
मुझे ये आइडिया बहुत पसंद आया. अगली बार मैं भी कविता भेजने का प्रयास करूँगा :-)इसे जारी रखियेगा..

सजीव सारथी का कहना है कि -

शैलेश भाई आपको सञ्चालन करते हुए देखकर बहुत अच्छा लगा, बहुत सोच सोच कर आपने शब्द चुने, और थोड़ा फ्लो लेकर आईये आप में अच्छे सञ्चालन के गुण हैं, पावस की खूब सूरत कविता जबरदस्त लगी, हरिहर जी विशेष बधाई के पात्र हैं, बहुत शोर्ट नोटिस में उन्होंने एक बड़ा काम किया, बहुत अच्छे

सजीव सारथी का कहना है कि -

रंजना जी आपकी कविता आपने जिस अंदाज़ में गा कर सुनाई मज़ा आ गया, आपके फेंस आपका ये नया अंदाज़ देख बहुत खुश होंगे, दिव्या जी, "चलो फ़िर पटरी पर सिक्कों को रखे लें, चुम्बक बना ले जो अपनों को खीचें," बहुत अच्छे बचपन घुमा दिया आपने ....मनुज जी क्या लजाब कविता है और आपकी आवाज़ तो जादू है.....बहुत बहुत बधाई ...

सजीव सारथी का कहना है कि -

नरेश भाई आपकी ये कविता मैंने सूरजकुंड वाले कवि सम्मलेन में भी सुना, यहाँ आपने पार्श्व में संगीत का प्रयोग कर बहुत बढ़िया इफेक्ट दे दिया है, शिवानी जी आपके क्या कहने, आपका प्रोत्साहन हमेशा ही हौंसला बढाता है, शोभा जी हमेशा की तरह फॉर्म में दिखी, पाटनी जी आपकी कविता पूरी न सुन पाने का मलाल रहेगा, आपकी आवाज़ भी बेहद दमदार है भाई... अनीता जी पहली बार आपकी आवाज़ सुनी, और कविता तो आप जानती हैं ये मेरी पसंदीदा कविता में से एक है, आपके ये प्रयास जारी रखना चाहिए ....सभी प्रतिभागियों को बधाई, और भी कवि अगले प्रयासों में जुडेंगे पूरी उम्मीद है.....

BRAHMA NATH TRIPATHI का कहना है कि -

बहुत अच्छा एक नयी सुबह का आगाज हो गया है
ये नयी कोशिश हिन्दयुग्म को शिखर तक पहुंचायेगी
बहुत अच्छा

Raviratlami का कहना है कि -

हिन्द युग्म का एक और सराहनीय प्रयास.

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बहुत ही अच्छा प्रयोग..

शैलेश जी और झा जी के संचालन में
हिन्द युग्म के आँगन में...
रंजना, दिव्य, मनुज, राणा,
शोभा,ने पुष्प गिराये जो....
शिवानी, कुमार, पाटनी आदि ने
अमृत कण बरसाये जो....
अति, भाव विभोर कर गये हृदयपट
प्रेम मेघ बन छाये जो...
शब्द शब्द चिंतनमय और
अतिशय गहरी सोच युक्त
कहीं शब्द प्रणय के बन्धन के
कही जननी के हित रोष युक्त
कहीं बचपन के वो प्यारे पल
कहीं लिये भविष्य हो गये विकल
सुनने में आनन्द मिला
लो युग्म बना जब हिन्द मिला
ये युक्ति भी नायाब मिली
अब रहे सुचारू सिलसिला
अब रहे सुचारू सिलसिला...

जय हिन्द जय हिन्दी

देवेन्द्र कुमार मिश्रा का कहना है कि -

हिन्दयुग्म के प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। बहुत अच्छा लगा सुनकर। सभी कवियों की कविताएँ उनकी आवज़ में अच्छी लगी। सभी को बधाई।

संत शर्मा का कहना है कि -

Bahut khubsurat prayash hai, bahut achcha laga sabhi kaviyo evm Kaviyatriyo ko sunkar. Iss tarah ke sammelan aage bhi aayojit karte rahe, badhai.

"Nira" का कहना है कि -

adarniye doston

aapka yeh prayaas bahut acha laga, sab ne bahut ache se apni kavitain pesh ki hai

aap sab ko bahut bahut badhai hai.

nira

diya22 का कहना है कि -

yah ek bahut hi sarthak pryas hai. jab se iske visaya me suna tha padhne ki ikchha thi jo aj jakar puri hui hai.phir bhi ek flow me nahi sun saki kyuki recording me distrubance tha.anita ji ki kavita vishesh rup se achhi lagi.harihar jha aur sailesh ji ka sanchalan kaviyo ka parichaya bahut hi sahag dhang se prastut karta hai.agle ank ki pratikha rahegi.
...deepali

संजीव सलिल का कहना है कि -

पोडकास्ट कवि सम्मलेन को, सुना गया मैं झूम.
निश्चय आगे मचेगी, पॉडकास्ट की धूम.

हिन्दयुग्म शैलेश जी, बना रहे इतिहास.
दूर बसे जो कवि उन्हें, लाकर सचमुच पास.

अनिता शोभा शिवानी, मनुज जमे हैं खूब.
संचालन था व्यवस्थित, श्रोता जाता डूब.

'सलिल' कोशिशें और हों, आए और निखार
बढे दिन-ब-दिन और भी, हिन्दयुग्म परिवार.

AFAQUE AHMED का कहना है कि -

नमस्कार
आज पहली बार पॉडकास्ट कवि सम्मलेन सुना - वाकई अभिभूत रह गया -मुबारकबाद कुबूल कीजिये -क्या कहूँ अनूठा -अविश्वशनिये-अदभुत-बेमिसाल-लाजवाब और एक खवाब !
सलाम आपकी काविश को !
आफाक अहमद

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