Saturday, January 24, 2009

सुनो कहानी: प्रेमचंद की 'गुल्ली डंडा'



उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी 'गुल्ली डंडा'

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने शन्नो अग्रवाल की आवाज़ में प्रेमचंद की रचना ''दुर्गा का मन्दिर'' का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं प्रेमचंद की अमर कहानी "दुर्गा का मन्दिर", जिसको स्वर दिया है लन्दन निवासी कवयित्री शन्नो अग्रवाल ने। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं। कहानी का कुल प्रसारण समय है: 20 मिनट और 30 सेकंड।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।



मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८३१-१९३६)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनिए प्रेमचंद की एक नयी कहानी

पिताजी चौके पर बैठे वेग से रोटियों पर अपना क्रोध उतार रहे हैं, अम्माँ की दौड़ केवल द्वार तक है, लेकिन उनकी विचार-धारा में मेरा अंधकारमय भविष्य टूटी हुई नौका की तरह डगमगा रहा है; और मैं हूँ कि पदाने में मस्त हूँ, न नहाने की सुधि है, न खाने की।
(प्रेमचंद की "गुल्ली डंडा" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.
(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)


यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)
VBR MP364Kbps MP3Ogg Vorbis

आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं, तो यहाँ देखें।


रविवार २५ जनवरी २००९ का आकर्षण - पॉडकास्ट कवि सम्मेलन
शनिवार ३१ जनवरी २००९ - मुंशी प्रेमचंद की एक नयी कहानी



#Twenty Third Story, Gulli Danda: Munsi Premchand/Hindi Audio Book/2009/03. Voice: Shanno Aggarwal

फेसबुक-श्रोता यहाँ टिप्पणी करें
अन्य पाठक नीचे के लिंक से टिप्पणी करें-

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

7 श्रोताओं का कहना है :

Charjan का कहना है कि -

बहुत सुन्दर उपक्रम।

प्रेम्चन्दजी छोटि छोटि बातो मे जीवन कि सच्चाइया बता देते है।

राज भाटिय़ा का कहना है कि -

बहुत सुंदर,
धन्यवाद

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

यह कहानी मुझे पहली बार मुझे एक मेरे मित्र ने सुनाई थी (पढ़कर)। मुझे बहुत पसंद आई थी। फिर उसे मानसरोवर में पढ़ा। उसके बाद आज दुबारा सुन रहा हूँ। स्मृतियाँ ताजी हो गईं। मैं हाँव में पला-बढ़ा हूँ। रोज़ गुल्ली-डंडा खेला करता था।
शन्नो जी,
आपकी प्रस्तुति में निरंतर सुधार आता जा रहा है। जहाँ पर गया और नायक का संवाद है, वहाँ आपने भावों को इस तरह से अपनी आवाज़ में उड़ेला है कि मन भाव-विह्वल हो जाता है। कभी प्रेमचंद की कोई ऐसी कहानी रिकॉर्ड करें जिसमें आप और अनुराग जी दोनों की आवाज़ का इस्तेमाल हो।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन का कहना है कि -

शन्नो जी,
यह कहानी भी बहुत अच्छी लगी. आगे बहुत सी अन्य रोचक कहानियां सुनने की इच्छा है.
शुभकामनाओं सहित,
अनुराग.

shanno का कहना है कि -

मुझे जानकर बहुत खुशी हुई कि आप सबने 'गुल्ली डंडा' कहानी का आनंद उठाया. आप सभी को धन्यबाद! और शैलेश जी, इस कहानी से मुझे अपने बचपन के वह पल याद आ गए जब मैं बड़े चाव से भाई को अपने दोस्तों के साथ गुल्ली डंडा खेलते हुए देखती थी और अक्सर आदेश मिलता था 'जा जल्दी से वह गुल्ली उठा कर ला' और मैं उस आदेश का पालन करने को तत्पर रहती थी. पर कोई मुझे खेलने नहीं देता था, और मैं मन मसोस कर रह जाती थी. अब कभी-कभी सोचती हूँ:

'कुछ भी करो, कुछ भी सोचो जीवन में
फिर भी करने को कितना छूट जाता है
कहानी ही सुनकर यदि खुशी दे पाती हूँ
तो इसी में ही मुझे बड़ा आनंद आता है.'

और अनुराग जी, आप के प्रयास से कहानी, कवितायें सही सलामत श्रोतायों तक पहुँच रही हैं इसके लिए मैं आपको अति धन्यबाद कहना चाहती हूँ.

सजीव सारथी का कहना है कि -

शन्नो जी बहुत बढ़िया कहानी लगी और आपका वाचन भी निरंतर निखर रहा है ...आप और नौराग जी शैलेश की सलाह पर गौर करें

shanno का कहना है कि -

सजीव जी, तो आपको भी यह कहानी-वाचन अच्छा लगा. धन्यबाद. बचपन में गुल्ली डंडा खेलने की इजाजत नहीं थी मुझे तो क्या हुआ, उसकी कहानी पढ़ने और सुनाने का एक मौका हाथ आया तो उसी में ही मैं खुश हूँ. कई लोग मिलकर अपनी-अपनी आवाजों में एक ही कहानी सुनाएँ, यह बिचार बहुत अच्छा लगा मुझे भी. लेकिन कैसे सम्भव हो सकता है यह? EDITING में तो बड़ी दिक्कत हो सकती है. अगर ऐसा सम्भव हो सके तो कितना अच्छा होगा.
शन्नो

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

संग्रहालय

25 नई सुरांगिनियाँ

ओल्ड इज़ गोल्ड शृंखला

महफ़िल-ए-ग़ज़लः नई शृंखला की शुरूआत

भेंट-मुलाक़ात-Interviews

संडे स्पेशल

ताजा कहानी-पॉडकास्ट

ताज़ा पॉडकास्ट कवि सम्मेलन