Thursday, January 8, 2009

कुछ यूँ दिये निदा फ़ाज़ली ने जवाब



निदा फ़ाज़ली की ही आवाज़ में सुनिए हिन्द-युग्म के पाठकों के सवालों के जवाब


जवाब देते निदा फ़ाज़ली
हिन्द-युग्म ने यह तय किया है कि जनवरी २००९ से प्रत्येक माह कला और साहित्य से जुड़ी किसी एक नामी हस्ती से आपकी मुलाक़ात कराया करेगा। आपसे से सवाल माँगेंगे जो आप उस विभूति से पूछना चाहते हैं और उसे आपकी ओर से आपके प्रिय कलाकार या साहित्यकार के सामने रखेंगे। सारा कार्रक्रम रिकॉर्ड करके हम आपको अपने आवाज़ मंच द्वारा सुनवायेंगे।

हमने सोचा कि शुरूआत क्यों न किसी शायर से हो जाय। क्योंकि हिन्द-युग्म की शुरूआत भी कुछ रचनाकारों से ही हुई थी। ४ जनवरी २००९ को हमने आपसे मशहूर शायर निदा फ़ाज़ली से पूछने के लिए सवाल माँगे। आपने भेजे और हम ६ जनवरी को पहुँच गये निदा के पास। मुलाक़ात से जुड़े निखिल आनंद गिरि के अनुभव आप बैठक पर पढ़ भी चुके हैं।
आज हम लेकर आये हैं आपके सवालों के जवाब निदा फ़ाजली की ज़ुबाँ से। यह मुलाकात बहुत अनौपचारिक मुलाक़ात थी, इसलिए रिकॉर्डिंग की बातचीत भी वैसी है। आप भी सुनिए।




निदा फ़ाज़ली से पाठकों की ओर से सवाल किया है निखिल आनंद गिरि और शैलेश भारतवासी ने।

अंत में प्रेमचंद सहजवाला की निदा फ़ाजली से हुई बातचीत के अंश भी हैं।

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14 श्रोताओं का कहना है :

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन का कहना है कि -

आनंद आ गया निदा फाजली साहब से बातचीत सुनकर. जैसी आशा थी, उनके जवाब बहुत सुलझे हुए हैं. आशा है कि हिंद-युग्म पर आगे भी इसी तरह के कार्यक्रम सुनने को मिलते रहेंगे. बहुत-बहुत बधाई!

सजीव सारथी का कहना है कि -

अपने गम की आंख से देखी दुनिया अपनी लगती है..., निदा साहब को हमारे घरों तक पहुँचने का शुक्रिया...मज़ा आ गया भाई "मैं उस भाषा को जनवादी कहता हूँ जिसमें हिन्दी और उर्दू में मतभेद नही है..." वाह क्या बात है निदा साहब

Irshad का कहना है कि -

बहुत बहुत शुक्रिया. आपने सारी बातचीत की रिकार्डिंग सुनवाए. मैं निदा साहिब के जवाब से अग्री हु. और jaldi ही किताब को पुब्लीश करते है. इस माद्यम किए लिया आप सब का एक बार फिर से दिल से धन्यवाद. l

तपन शर्मा का कहना है कि -

सुनकर ऐसा लगा मानो सभी सवालों के जवाब मिल गये हों..पर फिर भी कुछ बाकि हों.. :-)
ये कार्यक्रम बहुत अच्छा लगा और आगे भी ऐसे प्रयास होंगे इस की शुभकामनायें..

निखिल आनन्द गिरि का कहना है कि -

इरशाद जी,
आपकी शिकायत दूर हुई तो मुझे भी चैन आया....आप तो बिल्कुल परेशान हो गये थे....आब उनको फैक्स कीजिए, किताब छपवाइए और आगे भी सवाल पूछते रहिए....

निखिल

"अर्श" का कहना है कि -

निदाफाज़ली साहब ही बातचीत सुनकर तो मज़ा आगया जैसे यथार्थ से परिचय हुआ ग़ज़लों,साहित्यों के बारे में ... आपका बहोत बहोत आभार इसके लिए ....


अर्श

Saurabh Srivastav का कहना है कि -

बहुत शुक्रिया हिन्दी युग्म का . . . निदा साहब के सुलझे जवाब सुन कर काफ़ी तस्सली हुई . . . और हाँ,एक और शुक्रिया मेरे सवाल को पूछने का जो कई दिनो से ज़ेहन में सहेज रखा था मैने. . .

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` का कहना है कि -

ज़नाब निदा साहब की
सारी बातेँ आज जाकर सुन पाई हूँ -
मेरे प्रश्न का उत्तर जो उन्होँने दिया, वही भाव मुझे भी
अपनी हर रचना के साथ रहा है -
हर कृति अपने ही
बच्चोँ के जैसी होती है -
बहुत सही व अच्छे उत्तर दिये
जिन्हेँ सुनकर
बहुत खुशी हुई -
आपके ऐसे प्रयासोँ के लिये
"हिन्दी -युग्म " को
बहुत बहुत धन्यवाद
तथा बधाईयाँ -
स स्नेह,
- लावण्या

venus kesari का कहना है कि -

आपने सबसे पहला सवाल मेरा पूँछ कर मुझे जो इज्जत बख्शी है उसका बहुत बहुत धन्यवाद
महोदय मई निदा जी के उत्तरों से मुतासिर हूँ मगर अभी भी मेरे प्रश्नों का उत्तर मुझे नही मिल पाया है खैर कोई बात नही

वीनस केसरी

शोभा का कहना है कि -

मैं भी यही मानती हूँ कि कविता व्याकरण की आधीन नहीं होती।इस सुन्दर प्रयास के लिए युग्म को बधाई।

Shardula का कहना है कि -

निदा फाज़ली जी को सुन के मन प्रसन्न हो गया. आपका बहुत धन्यवाद !

shailja का कहना है कि -

mere liye ye ek nai duniya hai.dhere dehre samjhane lagugi.abhi tak jitana dekha aapka abhar karati hu.

वीना का कहना है कि -

हिंद-युग्म को बहुत-बहुत धन्यवाद निदा फाजिली साहब से हुई बातचीत सुनवाने का

Reetesh का कहना है कि -

कानो में जो पड़ती है ये निदा,
होश उठ जाता हैं जोश जाग जाते हैं
जितने बवाल दुनियाबी हों घेरे
कहीं खो जाते है कहीं भाग जाते हैं

कवि सार में जो कहना था वो तो बस यही था. गद्य में कहूँ तो यही के निदा जैसा ईमानदार बयान बहुत कम या शायद ही किसी सुखनवर के मुंह से सुना हो अब तक की उम्र में. मेरा नसीब के सामने मिलना, सुनना हुआ..मेरा सवाब के खरी सी बात ज़हेनो दिल मे उतरा जाती है...

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