Sunday, January 18, 2009

क्या भुलूँ क्या याद करूँ का स्वरबद्ध रूप



आज महान गीतकार, कवि, लेखक हरिवंश राय बच्चन की छठवीं पुण्यतिथि है। कुछ देर पहले हमने आपको अमिताभ बच्चन की आवाज़ में बच्चन जी की कविताएँ (मधुशाला से इतर) सुनवाई, साथ में शोभा महेन्द्रू का विशेष आलेख भी पढ़वाया। अब बारी है सबसे ख़ास पेशकश की।

लेडी श्रीराम कॉलेज, नई दिल्ली में हिन्दी की प्राध्यापिका डॉ॰ प्रीति प्रकाश प्रजापति हिन्दी कविताओं से विशेष अनुराग रखती हैं। इन्होंने निराला, पंत आदि महाकवियों की रचनाओं को स्वरबद्ध भी किया है। जब हमने इनसे निवेदन किया कि हरिवंश राय बच्चन की कविता 'क्या भुलूँ क्या याद करूँ' को कम्पोज करें, तो इन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। तबला वादक मौजी बाबू के साथ मिलकर हारमोनियम की धुन पर यह कविता कम्पोज हुई।

प्रीति प्रकाश ने कम्पोज करने के साथ हिन्द-युग्म को बताया- "मुझे बच्चन जी की इस कविता को गाकर बहुत सुकूँ मिला, मैं चाहती हूँ कि इनकी ढेरों रचनाएँ कम्पोज करूँ और एक संपूर्ण एल्बम बनाऊँ"

अभी तो हमने ऐसे ही साधारण mp3 रिकॉर्डर से यह कविता रिकॉर्ड की है। भविष्य में पूरा एल्बम लेकर उपस्थित होंगे। तब तक सुनते हैं-





फेसबुक-श्रोता यहाँ टिप्पणी करें
अन्य पाठक नीचे के लिंक से टिप्पणी करें-

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

6 श्रोताओं का कहना है :

MANVINDER BHIMBER का कहना है कि -

कोई गाता मैं सो जाता ......
महान कवि को मेरा नमन

संगीता पुरी का कहना है कि -

आज की सभी प्रस्‍तुति गजब की रही.....मैने डाउनलोड भी कर लिया है....हरिवंश राय बच्‍चन जी को सुनाने के लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद।

सजीव सारथी का कहना है कि -

बहुत बढ़िया शुभकामनायें

दिलीप कवठेकर का कहना है कि -

ऐसी प्रसुतियां हमेशा दिलकश होती हैं , क्योंकि इसमें वाद्य वृंदों का व्यर्थ आडंबर नही होता.

डा. प्रिती का आवाज़ बढिया है, और मेरा विश्वास है, कि अच्छे ध्वनि मुद्रण के बाद वह एलबम संग्रहणीय होगा.

इन्तेज़ार मे रहूंगा.

bharti का कहना है कि -

डॉ.प्रीति की आवाज़ वाकई दिल को छू लेने वाली है.. मुझे बच्चन जी के बोल और प्रीति जी की आवाज़ बेहद पसंद आई...
-bharti

avenindra का कहना है कि -

bachchan ji ki kavita apne aap main poorn hoti hai aur use ek shudhdh awaaz mil jaye to sone pe suhaaga bahut khoob

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

संग्रहालय

25 नई सुरांगिनियाँ

ओल्ड इज़ गोल्ड शृंखला

महफ़िल-ए-ग़ज़लः नई शृंखला की शुरूआत

भेंट-मुलाक़ात-Interviews

संडे स्पेशल

ताजा कहानी-पॉडकास्ट

ताज़ा पॉडकास्ट कवि सम्मेलन