Tuesday, October 7, 2008

देखा न हाय रे सोचा न...यही था किशोर का मस्तमौजी अंदाज़



दोस्तों,
१९७० -१९८० के दशक में किशोर कुमार को एक लेख में पेश करना बहुत मुश्किल है | इस महान शख्सियत की कुछ यादें -

किशोर का हॉलीवुड प्रेम -

कोई भी सच्चा कलाकार भाषा या देश की सीमा में नही बंधता है और अपने को मुक्त रखते हुए आगे चलता रहता है | किशोर इसका एक अच्छा नमूना पेश कर गए | किशोर कुमार अपने बेटे अमित कुमार के साथ हॉलीवुड की फिल्मे देखना पसंद किया करते थे | कुछ विशेष फिल्मों और कलाकारों के प्रति उनका काफी रुझान रहा | जैसे गोड फादर (God Father) फ़िल्म को उन्होंने १७-१८ बार देखा | हॉलीवुड अभिनेता जॉन वायने ( John Wayne) और मार्लोन (Marlon) उन्हें बेहद पसंद थे | उनकी फिल्में देखने के बाद किशोर उन कालाकारों के अभिनय के विषय में वे अमित से चर्चा करते | यह सब बातें उनके भीतर अभिनय की समझ को दर्शाता है | हॉलीवुड फिल्मो से प्रभावित होकर उन्होंने १९७१ में एक यादगार फ़िल्म भी बनायी - "दूर का राही " |




कलाकार पिता और कलाकार पुत्र -

यदि ऐसा कहे कि किशोर कुमार ने ही अमित कुमार के भीतर के कलाकार को संवारा और प्रोत्साहित कर प्रस्तुत किया, तो कोई गलत नही होगा | अमित शुरू के बरसों में अपनी माँ के साथ पश्चिम बंगाल में रहते थे और छुट्टियों में मुम्बई आते रहते थे | अपने पिता की गायकी उनकी प्रेरणा रही | किशोर कुमार को जब पता चला कि अमित को गाने में रूचि है तो उसे मुम्बई ले आए | १९ बरस के उम्र में अब पिता के साथ रहना अमित को खूब भाया | १९७१ में दूर का रही फ़िल्म में अमित कुमार से अभिनय करवा कर पिता ने अमित को कला के मैदान में उतार दिया | किशोर के साथ अमित भी स्टेज शो में जाते रहे और सीखते रहे | एक समय आया, जब लोगों ने स्टेज शो में दोनों को एक साथ गाते देखा और सूना | नौजवान अमित कुमार ने फिल्मों में गाने गाये और अभिनय भी किया |आज भी जब कभी भी हो, अमित कुमार अपने प्रेरक पिता को याद कर लोगों से उनके बातों को बड़े आदर से बाँटते हैं |

इस दशक में किशोर कुमार और आर.डी.बर्मन याने सबके चाहिते पंचम दा की युगल जोड़ी कामयाब रही |
१९७१ में आयी राजेश खन्ना के अभिनय से अलंकृत फ़िल्म "अमर प्रेम" इसका बेहतरीन नमूना है |
उसी दशक एक नौजवान कलाकार उभर रहा था,कभी बढ़ता तो कभी गिरता | उस नए कलाकार के लिए पहला हिट गाना पंचम दा ने किशोर कुमार से ही गवाया | यह फ़िल्म थी- "Bombay to Goa" और गीत था "देखा ना हाय रे सोचा ना ..." | उस नए तरुण अभिनेता याने अमिताभ बच्चन के शुरुवाती दिनों में उनके गाये गीत हिट हुए और अमिताभजी को लोकप्रिय बनाने में बड़े मददगार साबित हुए |

कुछ सुपर सुपर हिट फिल्मे जिनमे किशोर कुमार ने आज के बिग बी के लिए गाने गाये थे -

१९७३ - अभिमान,
१९७५ - शोले , मिली ,
१९७७ - अमर अकबर अन्थोनी ,
१९७८ - डॉन, मुकद्दर का सिकंदर,
१९७९ - मिस्टर नटवरलाल आदि ...

हमेशा की तरह राजेश खाना के लिए किशोर कुमार की आवाज़ इस दशक भी पहचान रही |कटी पतंग, अमर प्रेम, अनुरोध, महबूबा जैसी फिल्मों में गाये गाने आज भी पसंद किए जाते हैं |महबूबा फ़िल्म का एक गीत है - "मेरे नैना सावन भादो ..." इस गीत से किशोर कुमार की शैली और हुनर दोनों को परखा जा सकता है | धूम धडाके और मस्ती से गाने वाले किशोर कुमार के इतने भावुक होकर गाये गीतों से उनके बहु आयामी होने का पता चलता है |

मोहम्मद रफी और मुकेश जैसे मंझे हुए गायकों की मौजूदगी में भी किशोर कुमार ने अपनी जगह बना ली थी | लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और कल्याणजी-आनंदजी जैसे संगीतकारों के लिए किशोर कुमार का नाम एक पसंद बन गया था |




गुरु का साथ छूटा -

१९७५ में हृषिकेश मुखर्जी की फ़िल्म "मिली",सचिन देव बर्मन और किशोर की अन्तिम फ़िल्म बनी | बीमारी में होते हुए भी बर्मन दा जाते जाते इतिहास रच गए | "आए तुम याद मुझे" और "बड़ी सूनी सूनी है" ये दो गीत इतने लोकप्रिय हुए की आज भी हिट हैं | किशोर कुमार ने बिछड़ते अपने गुरु के लिए अपनी भावनाओं में डूबे ये दो गीत गाकर अपनी श्रद्धांजली दी | एस. डी. बर्मन के साथ उन्होंने २७ फिल्मों में १०० से ज्यादा गीत गायें | हिन्दी फ़िल्म इतिहास में यह जोड़ी हमेशा याद की जाती रहेगी |

पुरस्कार -

१९७६ - अमानुष के गीत "दिल ऐसा किसी ने मेरा तोडा" और १९७९ - डॉन फ़िल्म के हिट गाने "खैके पान बनारस वाला" के लिए उनको फ़िल्म फेयर पुरस्कार मिले |

किशोर की तीसरी शादी अभिनेत्री योगिता बाली से हुयी | १९७६ से १९७८ तक यह कामयाब नही हो सका | १९७९ में किशोर कुमार ने अपने इस उम्र में शादी के विषय से मिलती जुलती एक फ़िल्म बनाई - " शाब्बास डैडी " (Shabas Dady) | इसमे किशोर कुमार, अमित कुमार , योगिता बाली और महमूद ने अभिनय किया | संगीत और आवाज़ किशोर कुमार की रही |

मजाकिया किशोर कुमार के किस्से बड़े मशहूर थे | स्टूडियो में धूम मचाना, किसी पर अचानक कुछ कह हँसी करना, ख़ुद पर ही चुटकले करना, तरह तरह के रूप बनाकर रहना, लोगों को उनके ओर आकर्षित करता रहा | यदि उनके उस अनोखे शख्सियत की बातें करूँ तो सारा लेख सिर्फ़ उसी पर होगा |

कहने को बहुत कुछ है , लेकिन ठहरना तो होगा ही | इस बार के लिए किशोर के लिए मेरे चंद लफ्ज़ -

तुम्हारी धुन आज भी बजती है,
तुम्हारे सुर आज भी सजते हैं,
कभी आकर कोई नग़मा सुना जाओ...दुबारा |


इसी दौर के मशहूर,किशोर दा कुछ बेमिसाल गीत भी सुन लेते हैं -



-- अवनीश तिवारी

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5 श्रोताओं का कहना है :

mamta का कहना है कि -

क्या मस्ती भरे गाने आपने सुनवाए कि बस मजा आ गया ।

Sajeev का कहना है कि -

मजाकिया किशोर कुमार के किस्से बड़े मशहूर थे | स्टूडियो में धूम मचाना, किसी पर अचानक कुछ कह हँसी करना, ख़ुद पर ही चुटकले करना, तरह तरह के रूप बनाकर रहना, लोगों को उनके ओर आकर्षित करता रहा | यदि उनके उस अनोखे शख्सियत की बातें करूँ तो सारा लेख सिर्फ़ उसी पर होगा |

हाँ तो लिखो न भाई एक लेख ऐसा भी.....इंतज़ार रहेगा.....बहुत बढ़िया प्रस्तुति है इस बार की

desibhavsar का कहना है कि -

hello!!everyone.... Dada is gr8..... dada jesa na is world me aaya tha naa hai or naa hi kabhi aayega.... dada wo bangdu or jhumru hai jo apni hi dhun me chale jaate hai... aaj wo nahi hai...par unke geet aaj unke paas rahne ka anubhav karate hai....wo mahan kalakaar hai... unka koi competitor nahi hai... or naa hi aayega.... ese yugpurush ko mera shat saht naman..

skype login का कहना है कि -

इस दशक में किशोर कुमार और आर.डी.बर्मन याने सबके चाहिते पंचम दा की युगल जोड़ी कामयाब रही |
१९७१ में आयी राजेश खन्ना के अभिनय से अलंकृत फ़िल्म "अमर प्रेम" इसका बेहतरीन नमूना है |
उसी दशक एक नौजवान कलाकार उभर रहा था,कभी बढ़ता तो कभी गिरता

candy crush soda का कहना है कि -

The author uses straightforward language and facts to describe all aspects of the essay. I eagerly await the next essay.

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