वेश्या - Veshya
कवि- रविन्दर टमकोरिया 'व्याकुल'
स्वर- विकास कुमार
अक्षर- वेश्या
स्रोत- हिन्द-युग्म
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श्रोता का कहना है :
ye kahani auraat ki yugo-yugo se chali aa rahi hai ,agar vidhata ne use dil ki jagah ek pashad diya hota .shayad aisa na hota
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