skip to main |
skip to sidebar
कृपया निम्नलिखित लिंक देखें- Please see the following links
कोई होता मेरा अपना.....शोर के "जंगल" में कोई जानी पहचानी सदा ढूंढती जिंदगी - Sajeev
एक हसीना थी, एक दीवाना था....एक कहानी नुमा गीत जिसमें फिल्म की पूरी तस्वीर छुपी है - Sajeev
आओ मनाये जश्ने मोहब्बत, जाम उठाये गीतकार मजरूह साहब के नाम - Sajeev
अलबेला मौसम कहता है स्वागतम....ताकि आप रहें खुश और तंदरुस्त - Sajeev
भोर आई गया अँधियारा....गजब की सकात्मकता है मन्ना दा के स्वरों में, जिसे केवल सुनकर ही महसूस किया जा सकता है - Sajeev
पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए.....किशोर दा के साथ खूब रंग जमाया गायिका हेमा मालिनी ने इस गीत में - Sajeev
जीवन के दिन छोटे सही, हम भी बड़े दिलवाले....किशोर दा समझा रहे हैं जीने का ढंग... - Sajeev
गीत गाता हूँ मैं, गुनगुनाता हूँ मैं....एक दर्द में डूबी शाम, किशोर दा की आवाज़ और पियानो का साथ - Sajeev
मेरे नैना सावन भादो, फिर भी मेरा मन प्यासा....दर्द की ऐसी गहरी अभिव्यक्ति वाकई दुर्लभ है दोस्तों - Sajeev
ई मेल के बहाने यादों के खजाने (23), फिर एक बार साल की शुरूआत हो रही है मन्ना दा की स्वर साधना से - Sajeev
एक मैं और एक तू, दोनों मिले इस तरह....ये था प्यार का नटखट अंदाज़ सत्तर के दशक का - Sajeev
आसमां के नीचे हम आज अपने पीछे, प्यार का जहाँ बसा के चले...लता और किशोर दा - Sajeev
ई मेल के बहाने यादों के खजाने (१९) - ई मेल तो नहीं पर आज बात एक खत की जो किशोर दा ने लिखा था लता को - Sajeev
फूलों के रंग से दिल की कलम से....जब भी लिखा नीरज ने, खालिस कविताओं और फ़िल्मी गीतों का जैसे फर्क मिट गया - Sajeev
कांची रे कांची रे.....भाई अब कोई गलती भी तो क्या, गीत तो खूबसूरत है - Sajeev