Sunday, March 15, 2009

"दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे" ने रचा इतिहास, किये ७०० सप्ताह पूरे



सप्ताह की संगीत सुर्खियाँ (13)
स्लम डॉग के बाल सितारों ने याद दिलाई शफीक सैयद की
लगभग २० साल पहले मीरा नायर की फिल्म "सलाम बॉम्बे" बहुत चर्चित हुई थी, और विदेशी फिल्म की श्रेणी में भारत की तरफ से ऑस्कर में नामांकित भी हुई थी. इस फिल्म में सबसे ज्यादा वाह वाही लूटी थी एक चाय वाले की भूमिका में इसके बाल कलाकार शफीक सैयद ने. पर इस फिल्म के बाद सैयद को मुंबई में कोई काम नहीं मिला. थक हार कर १९९३ में वो बैंगलोर आ गये. दुःख की बात है की इतनी प्रतिभा होने के बाद भी सैयद आज ऑटो चला रहे हैं, जीविका के लिए. ५२ दिन की शूटिंग, उस ज़माने में १५००० रूपए का मेहनताना, अप्रत्याक्षित लोकप्रियता, राष्ट्रपति भवन में सत्कार. आज ये सब बातें सैयद के लिए एक सपना ही लगती होगी. पर ख़ुशी की बात ये है कि फिल्मों से उनका प्रेम आज भी बरकरार है, और अपने खाली समय में स्क्रिप्ट लिखते हैं. उम्मीद करें कि उनकी कहानी को भी कोई प्रोड्यूसर मिले.



पप्पू के पास होने के बाद अब चुनाव आयोग का नया नारा -"वोट ऑन"

"पप्पू" कामियाब हो गया. अब चुनाव आयोग ने इसी फार्मूले पर लोक सभा चुनावों के लिए फिल्म "रॉक ऑन" के गीत "सोचा है..." का इस्तेमाल करने जा रही है. ये प्रचार होगा युवाओं को वोट डालने के लिए प्रेरित करने का. फिलहाल इस गीत के बोलों पर काम जारी है. लगता है चुनाव आयोग ने युवाओं की नब्ज़ पकड ली है. फिल्म संगीत पर आधारित प्रचार भारत में हमेशा ही प्रभावशाली रहा है.


पहली बार इंडियन आइडल हुई एक लड़की

अपने चौथे संस्करण में जाकर आखिरकार इंडियन आइडल के रूप में श्रोताओं को मिली एक "गायिका". त्रिपुरा की सौरभी देबरामा ने वो कर दिखाया जो पिछले कई सालों में कोई भी महिला प्रतिभागी इस प्रतियोगिता में नहीं कर पायी. सौरभी को एक उज्जवल भविष्य की शुभकामनायें


दिलवाले ने रचा इतिहास

DDLJ ने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. १९९५ में प्रर्दशित हुई शाहरुख़ खान- काजोल अभिनीत "दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगें" ने एक नया इतिहास रच डाला है. मुंबई के मराठा मंदिर सिनेमा में इस फिल्म ने पूरे किये लगातार ७०० सप्ताहों तक चलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड. पिछले १४ सालों से इस फिल्म ने इस सिनेमा घर पर कब्जा कर रखा है और आज भी यहाँ आकर दर्शक बड़े चाव से इस फिल्म को देखते हैं. फिल्म की इस अतुलनीय सफलता में फिल्म के संगीत का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है. आज का हमारा "साप्ताहिक गीत" भी हमने चुना है इसी महान फिल्म से. जतिन ललित और आनंद बक्षी की टीम द्वारा रचित ये गीत सुनिए - "घर आजा परदेसी तेरा देस बुलाये रे.... "




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3 श्रोताओं का कहना है :

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

सुमधुर गीत सुनवाने के लिए ह्रदय से आभार

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

इला अरुण जी का गीत भी मन को भाया. उन्हें शत-शत बधाई.

संगीता पुरी का कहना है कि -

सुंदर गीत के लिए आभार ... त्रिपुरा की सौरभी देबरामा को बधाई एवं शुभकामनाएं।

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