Sunday, May 3, 2009

रविवार सुबह की कॉफी और कुछ दुर्लभ गीत (4)



दोस्तों, यादें बहुत अजीब होती हैं, अक्सर हम हंसते हैं उन दिनों को याद कर जब साथ रोये थे, और रोते हैं उन पलों को याद कर जब साथ हँसे थे. इसी तरह किसी पुराने गीत से गुजरना यादों की उन्हीं खट्टी मीठी कड़ियों को सहेजना है. यदि आप २५ से ४० की उम्र-समूह में हैं तो हो सकता है आज का ये एपिसोड आपको फिर से जवानी के उन दिनों में ले जाये जब पहली पहली बार दिल पर चोट लगी थी.

बात १९९१ के आस पास की है, भारतीय फिल्म संगीत एक बुरे दशक से गुजरने के बाद फिर से "मेलोडी" की तरफ लौटने की कोशिश कर रहा था. सुनहरे दौर की एक खासियत ये थी कि लगभग हर फिल्म में कम से कम एक दर्द भरा नग्मा अवश्य होता था, और मुकेश, रफी, किशोर जैसी गायकों की आवाज़ में ढल कर वो एक मिसाल बन जाता था. मारधाड़ से भरी फिल्मों के दौर में दर्दीले नग्में लगभग खो से चुके थे तो जाहिर है उन दिनों दिल के मारों के लिए उन पुराने नग्मों की तरफ लौंटने के सिवा कोई चारा भी नहीं था. ऐसे में सरहद पार से आई एक ऐसी सदा जिसने न सिर्फ इस कमी को पूरा कर दिया बल्कि टूटे दिलों के खालीपन को कुछ इस तरह से भर दिया, कि सदायें लबालब हो उठी.

जी हाँ हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान के मशहूर लोक गायक और शायर अताउल्लाह खान की. गुलशन कुमार अपनी टी सीरीज़ के माध्यम से संगीत जगत में बदलाव का डंका बजा चुके थे. उन्होंने ही सबसे पहले अत्ता की ग़ज़लों की भारत में उतरा. पहली दो अल्बम्स की साधारण सफलता के बाद आई वो अल्बम जिसने पूरे भारत में धूम मचा दी. "बेदर्दी से प्यार" था इसका शीर्षक और "अच्छा सिला दिया", "मुझको दफना कर" और "ये धोखे प्यार के" जैसी ग़ज़लें हर खासो आम की जुबान पर चढ़ गए. सच पूछा जाए तो टी सीरीज़ का साम्राज्य इन्हीं अलबमों की नींव पर खडा हुआ और आगे चलकर गुलशन ने अताउल्लाह खान के कवर वर्ज़न गवा कर सोनू निगम, अभिजीत और नितिन मुकेश जैसे गायकों को स्थापित किया.

उस बेहद सफल अल्बम के साथ एक कहानी भी आई सरहद पार से. अत्ता के प्यार की कहानी. बात फ़ैल गयी कि अत्ता को इश्क में अपनी महबूबा से धोखे मिले और गुस्से में उन्होंने अपनी माशूका का ही कत्ल कर दिया, जेल में बैठकर उन्होंने "बेवफा सनम" की याद में ग़ज़लें लिखी, जिन्हें बाद में उनकी आवाज़ में रिकॉर्ड कर बाज़ार में पहुँचाया गया. पता नहीं कहानी कितनी सच्ची है कितनी झूठी. पर लगभग ३५ संस्करण के बाद अचानक अत्ता की आवाज़ गायब हो गयी और तब लोगों ने कहना शुरू किया कि अत्ता अब नहीं रहे, उन्हें फांसी हो गयी. कहते हैं गुलशन कुमार कृत "बेवफा सनम" फिल्म अताउल्लाह खान के जीवन पर ही आधारित थी. इन सब किस्सों ने अत्ता की ग़ज़लों को लोकप्रिय बनाने में जम कर सहयोग दिया, और उसके बाद आई उनकी हर अल्बम ने कामियाबी के फलक को छुआ.

समय के साथ अत्ता की ग़ज़लें भुला दी गयी. कुछ लोगों ने उन्हें बाजारू और सस्ता कह कर खारिज कर दिया. उनकी आवाज़ में कोई मिठास नहीं थी न ही कोई विविधता. हर ग़ज़ल का मूड भी लगभग एक सा ही होता था, पर कुछ तो था उस दर्द भरी आवाज़ में जिसने करोडों को रुलाया. उनके बाद उनकी नक़ल की कोई भी कोशिश उनकी सफलता की दूर दूर तक बराबरी न कर पायी.

रोता है दिल उसे याद करके
वो तो चला गया मुझे बर्बाद करके

या फिर
आदमी लाख संभल कर भी चले पर "सादिक",
हादसे होते ही रहते हैं ये होने वाले....

कितनी सरल शायरी है पर इन्हीं शब्दों ने एक ज़माने में आम आदमी के सीने में छुपे दर्द को झकझोरा था. पता नहीं अत्ता आज जिन्दा है या नहीं, अगर हैं तो आज भी वो गाते हैं या नहीं. उनके बारे में सुनी गयी उन कहानियों में कितनी सच्चाई है मुझे आज तक नहीं पता. पर इतने जानता हूँ, कि आज भी उनकी आवाज़ में उन ग़ज़लों को सुनना एक अलग ही तरह का अनुभव है मेरे लिए. यादों के कई झरोखे खुल जाते हैं जेहन में. उनके कुछ लाइव कार्यक्रम भी हुए हैं जिनकी कुछ क्लिप्पिंग्स अंतरजाल पर उपलब्ध हैं. तो दोस्तों इस रविवार सुबह की कॉफी पेश है अताउल्लाह खान की दर्द भरी ग़ज़लों के साथ.

अच्छा सिला दिया....


कमीज तेरी काली....


ये थेवा मुंदरी दा...


तुझे भूलना तो चाहा...


बेदर्दी से प्यार का....


मुझको दफना कर वो जब....


ओ दिल तोड़ के ...


अल्लाह हू अल्लाह हू...


यदि आपमें से किसी श्रोता के पास अताउल्लाह खान साहब के बारे में अधिक जानकारी हों तो कृपया हमारे साथ बाँटें, वैसे उनकी ढेरों ग़ज़लें हमारे संकलन में उपलब्ध हैं यदि आप पसंद करें तो फिर किसी रविवार को कुछ और अत्ता की ग़ज़लों लेकर हम ज़रूर उपस्थित हो जायेंगें. फिलहाल के लिए इजाज़त.

आलेख - सजीव सारथी


"रविवार सुबह की कॉफी और कुछ दुर्लभ गीत" एक शृंखला है कुछ बेहद दुर्लभ गीतों के संकलन की. कुछ ऐसे गीत जो अमूमन कहीं सुनने को नहीं मिलते, या फिर ऐसे गीत जिन्हें पर्याप्त प्रचार नहीं मिल पाया और अच्छे होने के बावजूद एक बड़े श्रोता वर्ग तक वो नहीं पहुँच पाया. ये गीत नए भी हो सकते हैं और पुराने भी. आवाज़ के बहुत से ऐसे नियमित श्रोता हैं जो न सिर्फ संगीत प्रेमी हैं बल्कि उनके पास अपने पसंदीदा संगीत का एक विशाल खजाना भी उपलब्ध है. इस स्तम्भ के माध्यम से हम उनका परिचय आप सब से करवाते रहेंगें. और सुनवाते रहेंगें उनके संकलन के वो अनूठे गीत. यदि आपके पास भी हैं कुछ ऐसे अनमोल गीत और उन्हें आप अपने जैसे अन्य संगीत प्रेमियों के साथ बाँटना चाहते हैं, तो हमें लिखिए. यदि कोई ख़ास गीत ऐसा है जिसे आप ढूंढ रहे हैं तो उनकी फरमाईश भी यहाँ रख सकते हैं. हो सकता है किसी रसिक के पास वो गीत हो जिसे आप खोज रहे हों.




फेसबुक-श्रोता यहाँ टिप्पणी करें
अन्य पाठक नीचे के लिंक से टिप्पणी करें-

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

9 श्रोताओं का कहना है :

Yogesh का कहना है कि -

Bahut badhia geet !!!

Loved them...

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

मुझे भी अपने पुराने दिन याद आ गये। मैं उस समय कक्षा 5 का विद्यार्थी था। गाँव में वो चाहे किसी का घर हो या खेत-खलिहान ये ही गीत सुनाई पड़ते थे।

तपन शर्मा का कहना है कि -

छोटा तो मैं भी था.. अता-उल्लाह खान के कईं गीत सुने हैं.. पुराने दिन याद आ गये.. धन्यवाद सजीव जी। मुझे भी बस इतना ही पता है जितना कि आपको..

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन का कहना है कि -

क्या बात है! वह आवाज़ भी याद आ गयी और वह दिन भी जब झाडोदा कलां से नोइडा तक दिल्ली की प्राइवेट बसों में सिर्फ यही आवाज़ सुनाई देती थी.

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

अताउल्ला के कैसेट वाकई समाज के निचले तबके पे राज्य कर रहे थे. हर बस में, पानवालों के टपरे पर, होटलों में यही बजते थे. ये आंधी की तरह आये और तूफ़ान की तरह गायब हो गए. आज इनका नाम लेनेवाला भी नहीं मिलता. टी सीरीज को बढ़ने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी. बाकी किस्सा भी सर्वविदित था, सच या...भगवन जाने. आपने एक भुलाई याद ताज़ा करदी.

mahashakti का कहना है कि -

वाह बहुत बढि़या

Adams Kevin का कहना है कि -

म एडम्स KEVIN, Aiico बीमा plc को एक प्रतिनिधि, हामी भरोसा र एक ऋण बाहिर दिन मा व्यक्तिगत मतभेद आदर। हामी ऋण चासो दर को 2% प्रदान गर्नेछ। तपाईं यस व्यवसाय मा चासो हो भने अब आफ्नो ऋण कागजातहरू ठीक जारी हस्तांतरण ई-मेल (adams.credi@gmail.com) गरेर हामीलाई सम्पर्क। Plc.you पनि इमेल गरेर हामीलाई सम्पर्क गर्न सक्नुहुन्छ तपाईं aiico बीमा गर्न धेरै स्वागत छ भने व्यापार वा स्कूल स्थापित गर्न एक ऋण आवश्यकता हो (aiicco_insuranceplc@yahoo.com) हामी सन्तुलन स्थानान्तरण अनुरोध गर्न सक्छौं पहिलो हप्ता।

व्यक्तिगत व्यवसायका लागि ऋण चाहिन्छ? तपाईं आफ्नो इमेल संपर्क भने उपरोक्त तुरुन्तै आफ्नो ऋण स्थानान्तरण प्रक्रिया गर्न
ठीक।

vinod kumar Jangir का कहना है कि -

खान की आवाज़ के हम भी दीवाने ह

raj का कहना है कि -

jitni tarif ki jaye is saksh ki utni hi km ..ak baar jb mai chita th to us samay keset apne pasnidida song ki record hoti th ..mai dadri gya or vhan bedardi se pyar ..acha sila diya ..tu rhne wali mhlo ki ..etc record krne k kiy order diya or uss time k mere beskimti 35 rupes de diye jo mne 3 mahine m ikkthe kiy th ..
ghr aaya keset lekr badi khusi se or tap recorder m dala to vo awaj kisi or ki th kbhi ladki gaye kbhi ladka..dimag khrab ho gya ..bhut dukhi ..aankho se mano aasu nikl gye ..mja khrab .us din ka din katna bhari ho gya

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

संग्रहालय

25 नई सुरांगिनियाँ

ओल्ड इज़ गोल्ड शृंखला

महफ़िल-ए-ग़ज़लः नई शृंखला की शुरूआत

भेंट-मुलाक़ात-Interviews

संडे स्पेशल

ताजा कहानी-पॉडकास्ट

ताज़ा पॉडकास्ट कवि सम्मेलन