Wednesday, July 22, 2009

मगर चादर से बाहर पाँव फैलाना नहीं आता....उस्ताद शायर "यास" यगाना चंगेजी की ग़ज़ल, शिशिर पारखी की आवाज़ में



शिशिर पारखी हिंद युग्म संगीत परिवार के अहम् स्तम्भ हैं. अपनी मखमली आवाज़ और बेजोड़ ग़ज़ल गायन से पिछले लगभग ९-१० महीनों से आवाज़ के श्रोताओं का दिल जीतते रहे हैं. अपनी ग़ज़लों के माध्यम से उन्होंने कई बड़े और उस्ताद शायरों के कलामों को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में हमारे रूबरू रखा है. "एहतराम" की सफलता के बाद आजकल शिशिर अपनी दूसरी एल्बम की तैयारी में हैं. देश विदेश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रमों में शिरकत के दौरान भी वो आवाज़ पर आना नहीं भूलते, और बीच बीच में अपनी रिकॉर्डइंग हमें भेज कर अपनी आवाज़ के बदलते रूपों से हमें अवगत भी कराते रहते हैं. ऐसी ही उनकी भेजी एक ग़ज़ल आज हम आप सब के साथ बाँट रहे हैं जिसे उन्होंने धुन और अपनी आवाज़ देकर सजाया है. आज जिस शायर को शिशिर हमारे रूबरू लेकर आये हैं वो उस्ताद शायर हैं, मिर्जा यास यगाना चंगेजी (शायर के बारे में अधिक जानकारी जल्द ही उपलब्ध होगी)

मुझे दिल की खता पर 'यास' शर्माना नहीं आता.
पराया जुर्म अपने नाम लिखवाना नहीं आता

बुरा हो पा-ए-सरकश का कि थक जाना नहीं आता
कभी गुम राह हो कर राह पर आना नहीं आता

मुझे ऐ नाखुदा आखिर किसी को मुँह दिखाना है
बहाना करके तनहा पार उतर जाना नहीं आता

मुसीबत का पहाड़ आखिर किसी दिन कट ही जायेगा,
मुझे सर मार कर तेशे से मर जाना नहीं आता

असीरों शौक़-ए-आजादी मुझे भी गुदगुदाती है
मगर चादर से बाहर पाँव फैलाना नहीं आता

दिल-ए -बेहौसला है इक ज़रा सी टीस का मेहमाँ
वो आंसू क्या पिएगा जिसे गम खाना नहीं आता



शिशिर की इस कोशिश पर अपनी राय अवश्य रखियेगा.

फेसबुक-श्रोता यहाँ टिप्पणी करें
अन्य पाठक नीचे के लिंक से टिप्पणी करें-

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

8 श्रोताओं का कहना है :

Disha का कहना है कि -

असीरों शौक़-ए-आजादी मुझे भी गुदगुदाती है
मगर चादर से बाहर पाँव फैलाना नहीं आता
बहुत ही बढ़िया शेर.आवाज व धुन भि शानदार

Manju Gupta का कहना है कि -

शानदार आवाज में शानदार ग़ज़ल है .बधाई .

रंजना का कहना है कि -

Waah ! waah ! Waah !
Aanand aa gaya........jitna sundar swar hai utni hi umda gazal hai....Waah!!

Sunwane ke liye bahut bahut aabhar.

Shamikh Faraz का कहना है कि -

बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल है.

मुझे दिल की खता पर 'यास' शर्माना नहीं आता.
पराया जुर्म अपने नाम लिखवाना नहीं आता

विश्व दीपक ’तन्हा’ का कहना है कि -

बड़ी हीं खूबसूरत गज़ल और उतनी हीं खूबसूरत आवाज़।
मज़ा आ गया।

-विश्व दीपक

sumit का कहना है कि -

वाह क्या ग़ज़ल है और क्या आवाज़ है मज़ा आ गया

sumit का कहना है कि -

वाह क्या ग़ज़ल है और क्या आवाज़ है मज़ा आ गया

Shishir Parkhie का कहना है कि -

Aap sab ko bohot bohot dhanyawaad.

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

संग्रहालय

25 नई सुरांगिनियाँ

ओल्ड इज़ गोल्ड शृंखला

महफ़िल-ए-ग़ज़लः नई शृंखला की शुरूआत

भेंट-मुलाक़ात-Interviews

संडे स्पेशल

ताजा कहानी-पॉडकास्ट

ताज़ा पॉडकास्ट कवि सम्मेलन