Tuesday, February 16, 2010

गुनगुनाते लम्हे में इस बार गौरव शर्मा की कहानी



दोस्तो,

हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को आवाज़ लेकर आता है एक कहानी-गीतों की जुबानी। इस कार्यक्रम के माध्यम से हम अपने श्रोताओं को रेडियो के उसी जमाने में पहुँचा देना चाहते हैं जब पूरा हिन्दुस्तान एक साथ एक कहानी को फिल्मों गीतों के माध्यम से ग्रहण करता था। 19वाँ पुस्तक मेला में हमने अपनी विवरण पुस्तिका में इस बात का ज़िक्र किया कि जल्द ही हम एक वेबरेडियो लॉन्च करेंगे। यह पाक्षिक वेबरेडियो उसी की एक टेस्टिंग है।

आज की कहानी गौरव शर्मा की है। आवाज़ हमेशा की तरह अपराजिता कल्याणी की है और तकनीक खुश्बू की है। नीचे के प्लेयर से सुनें-



आप भी चाहें तो भेज सकते हैं कहानी लिखकर गीतों के साथ, जिसे दूंगी मैं अपनी आवाज़! जिस कहानी पर मिलेगी शाबाशी (टिप्पणी) सबसे ज्यादा उनको मिलेगा पुरस्कार हर माह के अंत में 500 / नगद राशि।

हाँ यदि आप चाहें खुद अपनी आवाज़ में कहानी सुनाना तो आपका स्वागत है....


1) कहानी मौलिक हो।
2) कहानी के साथ अपना फोटो भी ईमेल करें।
3) कहानी के शब्द और गीत जोड़कर समय 35-40 मिनट से अधिक न हो, गीतों की संख्या 7 से अधिक न हो।।
4) आप गीतों की सूची और साथ में उनका mp3 भी भेजें।
5) ऊपर्युक्त सामग्री podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।

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4 श्रोताओं का कहना है :

ρяєєтii का कहना है कि -

mann ko chu, aankhe nam kar gaye yeh gungunate lamhe... Gaurav ji ki kahani behad touchy lagi aur Aprajita ka andaaz nirala.... Khushboo to takniki main master banti ja rahi hai... puri team ko badhai...

Sajeev का कहना है कि -

बहुत बढ़िया, कहानी बहुत बढ़िया रही, और सञ्चालन के क्या कहने :)

Lams का कहना है कि -

Rashmi Di, Aprajita Ji aur Khushbu Ji ka bahut abhaar jo unhone itna waqt diya aur kahaani ko geeton se sajaayaa.
.
Preeti Ji aur Sanjeev Ji ka bhi shukriya yahan aakar kahaani sunne aur pasand karne keliye.

thanks a lot

--Gaurav

दिपाली "आब" का कहना है कि -

yeh kahani bhooli jaane wali nahi hai, ek aisi kahani jo kai din tak zehan mein ghoomti rahe..
bahut bahut badhai gaurav.
dil ko chhu lene wali kahani hai

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