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भला हुआ मेरी मटकी फूटी.. ज़िन्दगी से छूटने की ख़ुशी मना रहे हैं कबीर... साथ हैं गुलज़ार और आबिदा - विश्व दीपक

साहिब मेरा एक है.. अपने गुरू, अपने साई, अपने साहिब को याद कर रही है कबीर, आबिदा परवीन और गुलज़ार की तिकड़ी - विश्व दीपक

मन लागो यार फ़क़ीरी में: कबीर की साखियों की सखी बनकर आई हैं आबिदा परवीन, अगुवाई है गुलज़ार की - विश्व दीपक

जाने न जाने गुल हीं न जाने, बाग तो सारा जाने है.. "मीर" के एकतरफ़ा प्यार की कसक औ’ हरिहरण की आवाज़ - विश्व दीपक

मुझको भी तरकीब सिखा दे यार जुलाहे...कबीर से बुनकरी सिखना चाहते हैं गुलज़ार और भुपि - विश्व दीपक

रामराज्य बापू का सपना, इस धरती पर लाओ राम - नियंत्रक । Admin

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