Wednesday, March 4, 2009

जब से मिली तोसे अखियाँ जियरा डोले रे...हो डोले...हो डोले...हो डोले...



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 13

दोस्तों नमस्कार! 'ओल्ड इस गोल्ड' के एक और कडी के साथ हम हाज़िर हैं. आशा है आप हर रोज़ 'ओल्ड इस गोल्ड' को सुन रहे होंगे और हर रोज़ पूछी गयी पहेली को बूझने का भी प्रयास करते होंगे. हमारा आप से यह अनुरोध है कि अगर आपके जेहन में ऐसा कोई ख़ास गीत है जिसे आप ने बहुत दिनों से नहीं सुना और इस शृंखला के अंतर्गत सुनना चाहते हैं तो हमें ज़रूर लिखिएगा. अगर गीत हमारे पास उपलब्ध होगा तो हम उसे ज़रूर शामिल करेंगे. और आइए अब आते हैं हमारे आज के गीत पर. आज का गीत हमने चुना है 1955 में बनी फिल्म "अमानत" से. यह फिल्म बिमल रॉय प्रोडएक्शन के 'बॅनर' तले बनाई गयी थी. इससे पहले बिमल रॉय "दो बीघा ज़मीन" और "नौकरी" जैसे फिल्मों का निर्माण कर चुके थे. "अमानत" फिल्म का निर्देशन किया अरविंद सेन ने, और इसके मुख्य कलाकार थे भारत भूषण और चाँद उस्मानी. दो बीघा ज़मीन और नौकरी की तरह अमानत में भी सलिल चौधुरी का संगीत था. बिमल-दा और सलिल-दा गहरे दोस्त थे और इन दोनो ने कई फिल्मों में साथ साथ काम किया. गीतकार शैलेंद्रा भी इनके काफ़ी अच्छे दोस्त थे और इन फिल्मों में शैलेंद्रा ने ही गाने लिखे.

अमानत फिल्म का जो गीत हम आपको आज सुनवाने जा रहे हैं उसे हेमंत कुमार और गीता दत्त ने गाया है. "जब से मिली तोसे अखियाँ जियरा डोले रे डोले हो डोले". यह गीत आधारित है बंगाल के एक मशहूर लोक गीत पर, जिसे अपने कंधों पर पालकी खींचने वाले लोग गाते हैं. उस बांग्ला लोक गीत में "हैया हो हैया" को इस हिन्दी गीत में "डोले हो डोले" कर दिया गया है. गीत तो वैसे ही मधुर है, उस पर बाँसुरी की मधुर तान ने इस गीत में एक ऐसा खूबसूरत समा बाँधा है की इस गीत को सुनते हुए अगर आप अपनी आँखें बंद कर लें तो बंगाल के सुदूर गाँवों का नज़ारा आपके नज़रों के सामने आ जाएगा, और वहाँ की मिट्टी की खुश्बू आप महसूस कर पाएँगे. तो लीजिए चल पडिये बंगाल के उसी गाँव की ओर इस गीत पे सवार होकर.




और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाईये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं -

१. १९६८ में कल्यानजी आनंद जी ने इस फिल्म के लिए रास्ट्रीय पुरस्कार जीता था.
२. इन्दीवर साहब ने शुद्ध हिंदी के शब्दों का इस्तेमाल किया था इस गीत में.
३. मुखड़े में शब्द हैं - "दोष".

कुछ याद आया...?

पिछली पहेली का परिणाम -
लगा था मुश्किल होगा श्रोताओं के लिए, पर वाकई मानना पड़ेगा तन्हा जी और उज्जवल भाई ने बहुत सही जवाब दिए. उज्जवल जल्दी ही अपने आलेखों के साथ भी आवाज़ पर उपस्थित होंगें, आवाज़ परिवार में आपका स्वागत है उज्जवल. मनु जी आपने सही कहा. अब धोनी और युवराज जम गए हैं. पर सचिन फिर भी सचिन ही रहेंगे :)

प्रस्तुति - सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम ६-७ के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवायेंगे, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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8 श्रोताओं का कहना है :

विश्व दीपक ’तन्हा’ का कहना है कि -

फिल्म "सरस्वतीचंद्र" का
"चंदन-सा बदन , चंचल चितवन, धीरे से तेरा यूँ मुस्काना,
मुझे दोष न देना जग वालों, हो जाऊँ अगर मैं दीवाना"

-विश्व दीपक

शोभा का कहना है कि -

बहुत सुन्दर गीत है।

ujjawal kumar का कहना है कि -

विश्व दीपक जी रोज छका मरते हैं
हमेशा की तरह आज भी सही ज़बाब
फिल्म है "सरस्वतीचंद्र"
गाना
"चंदन-सा बदन , चंचल चितवन, धीरे से तेरा यूँ मुस्काना,
मुझे दोष न देना जग वालों, हो जाऊँ अगर मैं दीवाना"
इस गाने को गीतकार इन्दीवर ने लिखा है ।
मुझे 'आवाज परिवार' ने जो हौसला -अफ़जाही की है
मै उनका शुक्रगुजार

manu का कहना है कि -

ये वाला वाकी आसान है,,,,,अभी सिस्टम काम नहीं कर रहा है,,,,,
कल वाले गीत को सुन्नु की उत्सुकता है,,,,

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

स्व. नूतन जी के अभिनय से स्मरणीय बन गयी 'सरस्वती चन्द्र का गीत 'चन्दन सा बदन, चंचल चितवन' कालजयी रचना है. गुजराती पृष्ठभूमि की कहानी में नूतन जी के जीवंत अभिनय ने धूम मचा दी थी.

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

स्व. नूतन जी के अभिनय से स्मरणीय बन गयी 'सरस्वती चन्द्र का गीत 'चन्दन सा बदन, चंचल चितवन' कालजयी रचना है. गुजराती पृष्ठभूमि की कहानी में नूतन जी के जीवंत अभिनय ने धूम मचा दी थी.

neelam का कहना है कि -

"mera dil jo mera hota ,"anubhav film ka geet hai ,sanjeev kumaar aur tanuja ki behad khoobsoorat film .agar aapne sunwa diya to samajh lijiye ki talaash poori hui

pooja का कहना है कि -

ये गीत पहले कभी सुना नहीं नहीं था, आज पहली बार सुनकर बहुत ही मधुर गीत लगा, इसे सुनवाने के लिए धन्यवाद.
पूजा अनिल

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