Monday, August 17, 2009

मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती...गुलशन बावरा ने लिखा इस असाधारण गीत से इतिहास



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 174

र आज है तिरंगे के तीसरे रंग, यानी कि हरे रंग की बारी। हरा रंग है संपन्नता का, ख़ुशहाली का। "ख़ुशहाली का राज है, सर पे तिरंगा ताज है, ये आज का भारत है ओ साथी आज का भारत है"। जी हाँ दोस्तों, इस बात में कोई शक़ नहीं कि देश प्रगति के पथ पर क्रमश: अग्रसर होता जा रहा है। हरित क्रांति से देश में खाद्यान्न की समस्या बड़े हद तक समाप्त हुई है। लेकिन अब भी देश की आबादी का एक ऐसा हिस्सा भी है जिसे दो वक़्त की रोटी नसीब नहीं। इस तिरंगे का हरा रंग उस दिन सार्थक होगा जिस दिन देश में कोई भी आदमी भूखा न होगा। आज तिरंगे के हरे रंग को सलामी देते हुए हमने जिस गीत को चुना है उस गीत से बेहतर शायद ही कोई और गीत होगा इस मौके के लिए। फ़िल्म 'उपकार' का सदाबहार देश भक्ति गीत "मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती" आप ने हज़ारों बार सुना होगा, आज भी सुनिए, रोज़ सुनिए, क्योंकि इस तरह के गीत रोज़ रोज़ नहीं बनते। यह एक ऐसा देश भक्ति गीत है जिसने एक इतिहास रचा है। शायद ही कोई स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस का पर्व होगा जो इस गाने के बग़ैर मनाया गया होगा! इस गीत में भारत के एक साधारण गाँव की दैनन्दिन जीवन शैली, किसानों की दिन चर्या को दर्शाया गया है, लेकिन देश भक्ति के रंग में ढाल कर। मनोज कुमार देश भक्ति फ़िल्मों के बादशाह माने जाते हैं। उनका नाम भारत कुमार भी पड़ गया था। फ़िल्म 'शहीद' के बाद 'उपकार', 'पूरब और पश्चिम', और 'क्रांति' जैसी कई कामयाब देश भक्ति फ़िल्मों का उन्होने निर्माण किया। फ़िल्म 'उपकार' के इस गीत को सुनते हुए हमारा दिल इस बात पर गर्व अनुभव करता है कि हम ने इस देश की मिट्टी में जन्म लिया।

फ़िल्म 'उपकार' की बाक़ी बातें हम फिर किसी दिन करेंगे, आज सिर्फ़ इस गीत के बारे में कहने को जी चाह रहा है। इस फ़िल्म में कई गीतकार थे जैसे कि क़मर जलालाबादी, इंदीवर और गुलशन बावरा। प्रस्तुत गीत गुल्शन बावरा का लिखा हुआ है और शायद यह उनके फ़िल्मी सफ़र का सब से ख़ास गीत रहा होगा। गायक महेंद्र कपूर साहब को तो थी ही महारथ हासिल देश भक्ति के गानें गाने की। और संगीतकार कल्यानजी-आनंदजी ने क्या संगीत संयोजन किया है इस गीत में, कमाल है! किसी गाँव का एक पूरा दिन हमारी आँखों के सामने ला खड़ा कर दिया है सिर्फ़ संगीत और ध्वनियों की सहायता से। इस संगीतकार जोड़ी की जितनी तारीफ़ की जाये इस गीत के लिए, कम ही होगी! तभी तो जब आनंदजी विविध भारती पर पधारे थे तो 'उजाले उनकी यादों के' कार्यक्रम में उनसे इस गीत से संबंधित विस्तृत जानकारी ली गयी थी, जो आज हम ख़ास आप के लिए यहाँ पर प्रस्तुत कर रहे हैं।

प्र: आप की फ़िल्म 'उपकार', जो 'हिट', बड़ी 'सुपर डुपर हिट' रही, उसमें एक गाना है "मेरे देश की धरती सोना उगले", उसमें भी बहुत सारे 'साउंड एफ़ेक्ट्स' हैं।

क्या है कि मनोज जी की यह पहली पिक्चर थी। उनका काम हम ने देखा हुआ नहीं था, नहीं तो हम लोग क्या करते हैं कि पहले हम 'डिरेक्टर' का, उसका 'ऐंगल' क्या है, उसकी 'टेकिंग्‍' क्या है, हर 'डिरेक्टर' की एक 'ऐंगल' होती है, इस तरह से इनका कोई काम देखने को नहीं मिला था। 'हिमालय की गोद में' में उनके साथ काम किया था लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला था कि इनका ये है, ऐसा है। तो वो सेठ जी बुलाते थे हम लोगों को। 'सेठ जी, मैं गाँव का आदमी हूँ और सुबह से शाम तक मुझे ये चाहिए कि एक गाने में सब कुछ आ जाए'। हमने कहा, 'सुबह से शाम, मतलब? समझे नहीं कि क्या चाहिए'। बोले कि 'गाँव में मैं किसान आदमी हूँ, शाम तक खेती में जो काम होता है, उसमें सब कुछ चाहता हूँ और यह वतन की बात है, देश की धरती की बात है'। तो बोले कि 'ठीक है, गाँव में तो आप भी रहे हैं, जो हम देंगे वो कर के लायेंगे क्या आप?' एक दूसरे की छेड़-खानी हम लोग आपस में बहुत करते थे। कोई बुरा नहीं मानता था, एक दूसरे के काम से लिए हम ऐसा बोलते थे। वह गाना जो हुआ, उसमें हम ने सारे 'एफ़ेक्ट्स' डाले। पंछियों की चहचहाहट, फिर वह लहट का चलना, बैलों का चलना, फिर ये, वो, सब कुछ, और ये करने के बाद, काफ़ी 'टाइम' लगा इसमें, क्योंकि 'एफ़ेक्ट्स' में काफ़ी 'टाइम' लग जाता है।

प्र: कितने घंटे लगे थे इस गाने को रिकार्ड करने में?

इस गाने में 'पार्ट्स' भी थे, तो इस गाने को सवेरे से 'स्टार्ट' किए थे, कुछ १६-१८ घंटे लगे होंगे, only in recording, उससे पहले 'रिहर्सल' होता रहा।


प्र: लेकिन 'फ़ाइनल प्रोडक्ट' जो मिला आप को...

क्योंकि सब कुछ चाहिए था उसमें। कोरस में गानेवाले भी चाहिए, बैल की आवाज़ भी चाहिए, लहट की भी आवाज़ आनी चाहिए, उसी 'टाइम' पे 'सिंगर' की भी आवाज़ आनी चाहिए, महेंद्र कपूर जी की आवाज़ थी बड़ी मज़बूत, वो टिके रहे 'लास्ट' तक। इस गाने की रिकार्डिंग्‍ से पहले एक बात बनी थी कि "इस देश की धरती" कि "मेरे देश की धरती"? ये सब छोटी छोटी बातें हैं, पहले यह लिखा गया था कि "इस देश की धरती सोना उगले"। बोले कि एक तो "उगले" शब्द लोग समझेंगे नही, वो बोले कि 'नहीं, यहाँ तो समझते हैं, आप के वहाँ नहीं समझते होंगे'। 'ठीक है, लेकिन "इस देश की धरती" में 'फ़ीलिंग्स्‍' नहीं आती है, "मेरे" में ज़्यादा अपनापन का अहसास होता है'। तो इस पर बहस चल रही थी कि "इस" रखें कि "मेरे" रखें। 'सिटिंग्‍' चलती रही कि "इस" रखें कि "मेरे" रखें, "मेरे" रखें कि "इस" रखें। युं करते करते आख़िर में "मेरे देश की धरती", और इस गाने ने...

प्र: इतिहास रच दिया!

इतिहास रच दिया!!!



और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा तीसरा (पहले दो गेस्ट होस्ट बने हैं शरद तैलंग जी और स्वप्न मंजूषा जी)"गेस्ट होस्ट". अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

1. कल का एपिसोड समर्पित होगा गीतकार गुलज़ार को.
2. सलिल चौधरी है संगीतकार.
3. मुखड़े में एक से नौ के बीच के एक अंक का जिक्र है.

पिछली पहेली का परिणाम -
दिशा जी अब एक बार फिर आप नंबर १ हो गयी हैं, १४ अंकों के लिए बधाई. वाकई इतने आसान गीत को तो यूं झट से पहचान लिया जाना चाहिए थे...खैर हम ये मान के चलें कि हर कोई शरद जी या स्वप्न जी जैसा धुरंधर नहीं हो सकता :)

खोज और आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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6 श्रोताओं का कहना है :

Anonymous का कहना है कि -

maine tere liye hi 7 rang ke sapne chune.

ROHIT RAJPUT

Anonymous का कहना है कि -

hamen nahin pata....!!!! :(

purvi s.

शरद तैलंग का कहना है कि -

पूर्वी एस.जी !
हमें नहीं पता... ये कौन सा गीत है ?
रोहित जी ! आनन्द आ गया ।

'अदा' का कहना है कि -

ROHIT RAJPUT..
ji badhai ho aapko.

Purvi ji,
sundar geet !!
:):):)

Shamikh Faraz का कहना है कि -

रोहित जी को बधाई.

Manju Gupta का कहना है कि -

रोहित जी वाह !

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