Wednesday, November 17, 2010

कोई गाता मैं सो जाता....जब हरिवंश राय बच्चन के नाज़ुक बोलों को मिला येसुदास का स्वर



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 529/2010/229

लाहाबाद के पास स्थित प्रतापगढ़ ज़िले के रानीगंज के बाबूपट्टी में एक कायस्थ परिवार में जन्म हुआ था प्रताप नारायण श्रिवास्तव और सरस्वती देवी के पुत्र का। घर पर प्यार से उन्हें 'बच्चन' कह कर पुकारते थे, जिसका अर्थ है "बच्चे जैसा"। 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के दोस्तों, नमस्कार, और स्वागत है 'दिल की कलम से' शृंखला की इस कड़ी में। पहली लाइन को पढ़कर आप समझ चुके होंगे कि आज जिस साहित्यकार की चर्चा हम कर रहे हैं, वो और कोई नहीं डॊ. हरिवंशराय बच्चन हैं। हरिवंशराय की शिक्षा एक स्थानीय म्युनिसिपल स्कूल में हुई और अपने पारिवारिक परम्परा को बनाये रखते हुए कायस्थ पाठशाला में उर्दू सीखने लगे। बाद में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू युनिवर्सिटी से भी शिक्षा अर्जित की। इसी दौरान वो स्वाधीनता संग्राम से जुड़ गये, महात्मा गांधी के नेतृत्व में। उन्हें यह अहसास हुआ कि यह राह वो राह नहीं जिस पर उन्हें आगे चलना है। इसलिए वो विश्वविद्यालय वापस चले गए। १९४१ से १९५२ तक वो इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी पढ़ाते रहे, और उसके बाद दो साल कैम्ब्रिज युनिवर्सिटी में पी.एच.डी की। और तभी से उन्होंने अपने नाम से 'श्रीवस्तव' को हटाकर 'बच्चन' लिखना शुर कर दिया। कैम्ब्रिज से डॊक्टोरेट की डिग्री पाने वाले वो द्वितीय भारतीय बने। भारत लौटने के बाद वो फिर से अध्यापना से जुड़ गये और आकाशवाणी के इलहाबाद केन्द्र की भी सेवा की। १९२६ में, केवल १९ वर्ष की आयु में हरिवंशराय बच्चन ने विवाह किया श्यामा से, जो १४ वर्ष की थीं। लेकिन १९३६ में श्यामा की अकालमृत्यु के बाद १९४१ में हरिवंशराय जी ने तेजी सूरी से विवाह किया, जो एक सिख परिवार से ताल्लुख़ रखती थीं। इस विवाह से उन्हें दो पुत्र हुए - अमिताभ और अजिताभ। ९५ वर्ष की आयु में हरिवंशराय बच्चन १८ जनवरी २००३ को इस दुनिया से चले गये। सम्मान और पुरस्कारों की बात करें तो १९६६ में उन्हें राज्य सभा के लिए मनोनीत किया गया था और १९६९ में उन्हें सर्वोच्च साहित्य सम्मान 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। १९७६ में पद्म भूषण और 'सरस्वती सम्मान' से सम्मानित हुए १९९४ में 'यश भारती सम्मान' से उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने नवाज़ा। उन्हें 'सोवियत लैण्ड नेहरु अवार्ड' और 'लोटस अवार्ड ऒफ़ दि अफ़्रो-एशियन राइटर्स कॊनफ़रेन्स' भी प्राप्त है। उनकी याद और सम्मान में सन २००३ में एक डाक टिकट भी जारी किया गया है।

हरिवंशराय बच्चन की साहित्यिक कृतियों की चर्चा करने लगे तो कई कई पन्ने लग जाएँगे। इसलिए यहाँ पर उनकी कुछ प्रमुख रचनाओं की ही बात करते हैं। उनकी कृति 'मधुशाला' हिंदी साहित्य में एक इतिहास बना चुकी है। जब भी वो स्टेज पर अपनी 'मधुशाला' पाठ करते, श्रोतागण उसमें पूरी तरह से खो जाते और उसकी बहाव में बह जाते। उमर ख़य्याम की रुबाइयात से प्रेरीत होकर डॊ. बच्चन ने 'मधुशाला' के बाद 'मधुबाला' और 'मधुकलश' नामक कविताओं की रचना की। उनकी जानी मानी कृतियों में शामिल है इनका भागवद गीता का अवधी और हिंदी में अनुवाद। अब हिंदी फ़िल्म संगीत की बात करें तो कुछ गिने चुने फ़िल्मों में उनके गीत आये हैं। शायद ही कोई होली ऐसी गई हो कि जिस दिन हरिवंशराय का लिखा और उन्हीं के सुपुत्र अमिताभ बच्चन का गाया फ़िल्म 'सिलसिला' का गीत "रंग बरसे भीगे चुनरवाली रंग बरसे" हमें सुनाई ना दिया हो। फ़िल्म 'बदनाम बस्ती' में "मेले में खोई गुजारिया" गीत को स्वयं हरिवंशराय ने गाया था। और फ़िल्म 'आलाप' में भी उन्होंने एक बड़ा ही कोमल गीत लिखा था, "कोई गाता मैं सो जाता", जिसे येसुदास ने भी उसी मख़मली अंदाज़-ओ-आवाज़ में गाया। आइए आज हरिवंशराय बच्चन की याद में इसी गीत को सुना जाए। जयदेव का संगीत है इसमें और इस फ़िल्म के बाकी डिटेल्स आप प्राप्त कर सकते हैं 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की ३११ वीं कड़ी में जिस दिन हमने येसुदास को जनमदिवस की बधाई स्वरूप इसी फ़िल्म का "चांद अकेला जाये सखी री" सुनवाया था। तो आइए सुनते हैं आज का गीत...



क्या आप जानते हैं...
कि हरिवंशराय बच्चन की लिखी कविता 'अग्निपथ' पर ही ९० के दशक का वह ब्लॊकबस्टर फ़िल्म बनी थी, जिसमें अभिनय कर अमिताभ बच्चन को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। पूरे फ़िल्म में अमिताभ बच्चन को इस कविता का पाठ करते देखा व सुना गया।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली १० /शृंखला ०३
ये प्रिल्यूड है गीत का -


अतिरिक्त सूत्र - इस गीत में अभिनेत्री के बचते हुए दिखते है शत्रुघ्न सिन्हा.

सवाल १ - कवि / गीतकार का नाम बताएं - २ अंक
सवाल २ - अभिनेत्री का नाम बताएं - २ अंक
सवाल ३ - संगीतकार बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
श्याम कान्त जी ने अजय बढ़त बना ली है. बहुत बधाई. शंकर लाल जी बहुत दिनों बाद नज़र आये.

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

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श्रोता का कहना है :

उमेश प्रताप वत्स का कहना है कि -

बच्चन जी तो श्रेष्ठ व निर्भिक कवि रहे है। किन्तु अमिताभ बच्चन जी उनके कदमो पर चलने मे असमर्थ रहे अन्यथा कभी देशद्रोही मुलायम, कभी अमर सिंह की झोली मे कभी देशद्रोही राज ठाकरे से दुम दबाकर भागने की बजाय करोडो प्रशंसको के विश्वास पर उचित जवाब देते।

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