Sunday, May 15, 2011

बोलिए सुरीली बोलियाँ...और पिरोते रहिये हँसी की लड़ियाँ हर पल



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 656/2011/96

'ओल्ड इज़ गोल्ड' के दोस्तों नमस्कार! आज रविवार, यानी छुट्टी का दिन, आप सभी नें अपने अपने परिवार के साथ हँसी-ख़ुशी बिताया होगा। हँसी-ख़ुशी से याद आया कि इन दिनों इस स्तंभ में जारी है लघु शृंखला 'गान और मुस्कान', जिसमें हम कुछ ऐसे गीत सुनवा रहे हैं जिनमें गायक/गायिका की हँसी सुनाई देती है। आज आप सुनेंगे गायिका-अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित की हँसी। सिंगिंग् सुपरस्टार्स की श्रेणी में सुलक्षणा पंडित और सलमा आग़ा दो ऐसे नाम हैं जिनके बाद इस श्रेणी को पूर्णविराम सा लग गया है। ख़ैर, आज जिस गीत को लेकर हम उपस्थित हुए हैं वह है फ़िल्म 'गृहप्रवेश' का - "बोलिये सुरीली बोलियाँ"। भूपेन्द्र और सुलक्षणा पंडित की आवाज़ों में यह शास्त्रीय संगीत पर आधारित रचना है राग बिहाग पर आधारित, लेकिन इसमें हास्य का भी पुट है। अब जिस गीत के मुखड़े के ही बोल हैं "नमकीन आँखों की रसीली गोलियाँ", उसमें हास्य तो होगा ही न! और "नमकीन आँखों की रसीली गोलियाँ" कहने वाले गीतकार गुलज़ार साहब के अलावा भला और कौन हो सकता है! बासु भट्टाचार्य निर्देशित १९७९ की इस फ़िल्म के मुख्य कलाकार हैं संजीव कुमार, शर्मीला टैगोर और सारिका। 'अनुभव' और 'आविष्कार' के बाद 'गृह-प्रवेश', इस तरह से वैवाहिक संबंधों पर बनी फ़िल्मों की तिकड़ी की यह तीसरी व अंतिम फ़िल्म थी बासु साहब की। फ़िल्म में संगीत था कानू रॉय का जिन्होंने 'अनुभव' और 'आविष्कार' में भी संगीत दिया था। और इस फ़िल्म के गीतों को आवाज़ दी चन्द्राणी मुखर्जी, सुलक्षणा पंडित, भुपेन्द्र, येसुदास और पंकज मित्र नें।

सुलक्षणा पंडित एक अच्छी अभिनेत्री रही हैं। वो जितनी सुंदर दिखती हैं, उतनी ही सुंदर उनकी शख्सियत है, और उनकी आवाज़ भी उतनी ही ख़ूबसूरत है। कुछ वर्ष पहले सुलक्षणा जी विविध भारती पर तशरीफ़ लायी थीं। कमल शर्मा से की हुई उनकी लम्बी बातचीत में से एक अंश निकालकर आज यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं जिसमें सुंदरता की बात कही गयी है, लीजिये पढ़िये-

कमल शर्मा: हम अभी कुछ देर पहले ब्युटी की बात कर रहे थे, सही मायने में जब तक आदमी अंदर से ख़ूबसूरत नहीं है, "इनर ब्युटी" जिसे हम कहते हैं, मेरे ख़याल से वो ज़्यादा सुंदर होती है। बहुत लम्बे समय तक लोग उसे ही याद रखते हैं और ऐसा भोलापन आपके मन में गहरा असर छोड़ता है, और स्क्रीन पर भी ज़्यादा अपना भी लगता है। आपका क्या ख़याल है इस बारे में?

सुलक्षणा पंडित: बहुत बड़ी बात कही आपनें। और बहुत सही बात है। देखिये मैं, एक बात कहती हूँ, आप जिस तरह से सौंदर्य की बात कर रहे हैं, तो वह सौंदर्य भगवान बनाता है। मैं यही कहूँगी कि जब मैं रास्ते पर चलती थी, १६/१७ साल, एक चर्च है, वहाँ मैं मोमबत्ती जलाती थी। मैं भजन गाती थी कि "भगवान मेरा अच्छा हो", सब जगह जाती थी, तो 'without my knowledge' के लोग मुझे पीछे मुड़ मुड़ के देखते थे, कि ये कौन है, ये कौन है, इतनी ख़ूबसूरत लगती थी। फिर एक बार मैं मन्ना दा के साथ कोई गाना गा रही थी, मुझे देखते ही बोले, "अरे सुलक्षणा, तू हीरोइन क्यों नहीं बनती?" मैंने कहा कि मैं गाना गाने आयी हूँ। तो बोले, "नूरजहाँ की तरह गा, और सुरैया भी गाती थीं, उनके जैसा काम भी करो"। तो मैंने कहा, "अच्छा, जैसे मिलेगा मैं करूँगी"। तो इस तरह से मन्ना दा नें, और फिर किशोर दा को जब पता चला कि सुलक्षणा इतनी टैलेण्टेड है, "इसको भी उसी तरह ईफ़ोर्ट आ रहे हैं जैसे मुझे आते थे, तो क्यों न इसको फ़िल्मों में काम कराया जाये!" उन्ही के साथ हेमन्त दा आये, उन्हीं का जो प्रोडक्शन है उसमें काम करो। अब दोनों में कहाँ हाँ कहाँ ना मुझे पता नहीं। तो अल्टिमेटली यही प्लान हुआ कि ना वो काम देंगे ना मैं काम करूँगी, और दोनों को अपनी अपनी जगह जैसे हैं वैसे ही रखेंगे।

दोस्तों, सुलक्षणा पंडित फिर अभिनेत्री कैसे बनीं, इसकी चर्चा हम फिर किसी दिन के लिए सुरक्षित रखते हुए आइए आपको सुनवाते हैं फ़िल्म 'गृहप्रवेश' का गीत और मज़ा लेते हैं सुलक्षणा जी की हँसी का भी।



क्या आप जानते हैं...
कि फ़िल्म 'गृह प्रवेश' में गुलज़ार साहब अतिथि कलाकार के रूप में पर्दे पर नज़र आये थे।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 07/शृंखला 16
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - बेहद आसान.

सवाल १ - फिल्म की दो नायिकाओं में से किस पर फिल्माया गया है ये गीत - २ अंक
सवाल २ - फिल्म के निर्देशक कौन हैं - ३ अंक
सवाल ३ - गीतकार बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
ब्लोग्गर बाबा कुछ नाराज़ रहे तो हुआ ये कि पुराने सभी कमेंट्स गायब हो गए. लेकिन हमने उससे पहले उन अंकों को जोड़ लिया, अभी भी अनजाना और अमित जी के बीच ३ अंकों का फासला है देखते हैं किसके हाथ आएगी ये बाज़ी

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

फेसबुक-श्रोता यहाँ टिप्पणी करें
अन्य पाठक नीचे के लिंक से टिप्पणी करें-

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

5 श्रोताओं का कहना है :

Anjaana का कहना है कि -

K Raghvendra Rao

अमित तिवारी का कहना है कि -

K. Raghavendra Rao

Avinash Raj का कहना है कि -

Sawal 1: JayaPrada

Kshiti का कहना है कि -
This comment has been removed by the author.
Kshiti का कहना है कि -

Geetkar - Indivar

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

संग्रहालय

25 नई सुरांगिनियाँ

ओल्ड इज़ गोल्ड शृंखला

महफ़िल-ए-ग़ज़लः नई शृंखला की शुरूआत

भेंट-मुलाक़ात-Interviews

संडे स्पेशल

ताजा कहानी-पॉडकास्ट

ताज़ा पॉडकास्ट कवि सम्मेलन