Wednesday, July 20, 2011

उमड़ घुमड़ कर आई रे घटा...उत्साह, उल्लास और उमंग से भरपूर राग वृन्दावनी सारंग का एक अलग रंग



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 704/2011/144

"उमड़ घुमड़ कर आई रे घटा" श्रृंखला की चौथी कड़ी में एक और वर्षागीत लेकर मैं कृष्णमोहन मिश्र आपके बीच उपस्थित हूँ| दोस्तों; श्रृंखला की दूसरी कड़ी में हमने आपके लिए राग "वृन्दावनी सारंग" का परिचय और इसी राग पर आधारित गीत प्रस्तुत किया था| आज के गीत में हम आपको राग "वृन्दावनी सारंग" का एक दूसरा पहलू दिखाने का प्रयत्न कर रहे हैं| हम यह चर्चा कर चुके हैं कि यह राग गम्भीर प्रकृति का होने के कारण विरह भाव की सृष्टि करता है| ऐसे परिवेश के सृजन के लिए राग "वृन्दावनी सारंग" का गायन-वादन पूर्वांग में किया जाता है| परन्तु जब राग के स्वर-समूहों को हम पूर्वांग से उत्तरांग में ले जाते हैं, तब राग का भाव बदल जाता है और हमें उल्लास, उत्साह और प्रकृति के आनन्द की सार्थक अनुभूति होने लगती है| दोस्तों; आज हम आपको राग "वृन्दावनी सारंग" पर आधारित जो गीत सुनवाने जा रहे हैं, उसमे आपको प्रकृति का नैसर्गिक आनन्द तो मिलेगा ही, साथ ही आलस्य त्याग कर कर्म करने की प्रेरणा देने में भी यह गीत सक्षम है| कविवर सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' ने सम्भवतः ऐसे ही परिवेश के लिए यह पंक्तियाँ लिखी होगी -

आली, घिर आए घन पावस के |
लख ये काले-काले बादल, नील सिन्धु में खिले कमल-दल,
हरित ज्योति चपला अति चंचल, सौरभ के रस के |
द्रुत समीर काँपे थर-थर-थर, धाराएँ झरतीं फर-फर-फर,
जगती के प्राणों में समर भर, बेध गए कस के |


दोस्तों; आज जो गीत हम आपको सुनवाने जा रहे हैं, वह भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध एक ऐसे संगीतकार की रचना है, जिन्होंने अपनी पहली फिल्म "शोभा" (1942) से लेकर अन्तिम फिल्म "शक" (1976) तक संगीत की शुद्धता को कायम रखा| आप अनुमान तो लगा ही चुके होंगे- मेरा संकेत निश्चित रूप से संगीतकार बसन्त देसाई की ओर ही है| 1957 में राजकमल कला मन्दिर की फिल्म "दो ऑंखें बारह हाथ" प्रदर्शित हुई थी| इस फिल्म के निर्देशक व्ही. शान्ताराम ने अपनी पिछली फिल्मों की तरह इस फिल्म में भी बसन्त देसाई को संगीत निर्देशन का दायित्व दिया| कहने की आवश्यकता नहीं कि फिल्म के साथ-साथ इसके गीत भी बेहद लोकप्रिय हुए| फिल्म "दो आँखें बारह हाथ" का निर्माण बिलकुल नये और अनूठे विषय पर किया गया था| निर्माता-निर्देशक शान्ताराम जी ने आजीवन कारावास का दण्ड भुगत रहे क्रूर और हत्यारे बन्दियों के सुधार और उन्हें समाज की मुख्य धारा में वापस लाने का आग्रह इस फिल्म के माध्यम से किया था|

एक आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि जब इस फिल्म का प्रदर्शन हुआ था उन दिनों विख्यात शिक्षाविद और राजनीतिज्ञ डा. सम्पूर्णानन्द उत्तर प्रदेश के मुखमंत्री थे| इसके बाद 1962 से 1967 तक वे राजस्थान के राज्यपाल पद पर भी रहे| उन्हीं के कार्यकाल में भारत का पहला बन्दी सुधारगृह अर्थात खुली जेल 1963 में राजस्थान के सांगानेर में स्थापित हुआ था| सम्भवतः व्ही. शान्ताराम कि फिल्म से प्रेरित होकर डा. सम्पूर्णानन्द ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में यह योजना बनाई थी, जो राज्यपाल बनने की अवधि में कार्यान्वित हुई थी| राजस्थान के बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी बन्दी सुधार गृह की स्थापना की गई थी| आजकल इसे सम्पूर्णानन्द आदर्श कारागार के नाम से जाना जाता है| बहरहाल; फिल्म "दो आँखें बारह हाथ" का गाँधीवादी विचारधारा, जैसा अनूठा विषय था; वैसा ही संगीत बसन्त देसाई ने भी दिया था| शास्त्रीय और लोक संगीत में रचे-बसे फिल्म के सभी गीत बेहद लोकप्रिय हुए थे| फिल्म का एक गीत -"ऐ मलिक तेरे बन्दे हम..." तो आज भी अनेक विद्यालयों की प्रातःकालीन प्रार्थना के रूप में गाया जाता है| इस फिल्म का एक अन्य गीत -"उमड़ घुमड़ कर आई रे घटा..." आज हमने आपको सुनवाने के लिए चुना है| फिल्म "दो आँखें बारह हाथ" का यह गीत राग "वृन्दावनी सारंग" पर आधारित है| मन्ना डे और लता मंगेशकर के युगल स्वरों में यह गीत है और इसके गीतकार हैं भरत व्यास| लीजिए आप भी सुनिए उत्साह, उल्लास और उमंग से भरपूर यह गीत-



क्या आप जानते हैं...
कि फिल्म "दो आँखें बारह हाथ" का कथानक ब्रिटिश शासनकाल में एक भारतीय रियासत की सत्य घटना पर आधारित था| फिल्म के आरम्भ में यह घोषणा व्ही. शान्ताराम ने की थी

आज के अंक से पहली लौट रही है अपने सबसे पुराने रूप में, यानी अगले गीत को पहचानने के लिए हम आपको देंगें ३ सूत्र जिनके आधार पर आपको सही जवाब देना है-

सूत्र १ - फिल्म की नायिका साधना है.
सूत्र २ - पुरुष स्वर है तलत महमूद का.
सूत्र ३ - मुखड़े में शब्द है - "राही"

अब बताएं -
किस राग पर आधारित है ये गीत - ३ अंक
संगीतकार बताएं - २ अंक
गीतकार कौन हैं - २ अंक

सभी जवाब आ जाने की स्तिथि में भी जो श्रोता प्रस्तुत गीत पर अपने इनपुट्स रखेंगें उन्हें १ अंक दिया जायेगा, ताकि आने वाली कड़ियों के लिए उनके पास मौके सुरक्षित रहें. आप चाहें तो प्रस्तुत गीत से जुड़ा अपना कोई संस्मरण भी पेश कर सकते हैं.

पिछली पहेली का परिणाम -
क्षिति जी सबसे आगे चल रही हैं, पर बढ़त कब तक रख पाएंगीं ये देखना दिलचस्प होगा, नए नियमों के चलते शृंखला का मज़ा दुगना हो गया है, बाज़ी किसी के भी हाथ आ सकती है

खोज व आलेख- कृष्ण मोहन मिश्र



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

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11 श्रोताओं का कहना है :

अमित तिवारी का कहना है कि -

Salil Chaudhary

Prateek Aggarwal का कहना है कि -

Rajinder Krishan

Avinash Raj का कहना है कि -

Megh Malhar

Kshiti का कहना है कि -

Pura gana mujhe yad nahin hai lekin gane ke shuru me rag DESH saf saf dikhta hai. Chunki ye serial malhar ang ke ragon par hai isliye rag DESHMALHAR hona chahiye.

Hindustani का कहना है कि -

Gaana Hai ' Sawan Ki Raaton Main' film Prem Patra se. Ye gaana inspired hai Raveendra Sangeet se. isse milta hua ek gaana hai 'Jete jete akla pathe'

शरद तैलंग का कहना है कि -

मैनेँ तो गीतकार गुलज़ार पढा है

अमित तिवारी का कहना है कि -

शरद जी सही हैं यहाँ पर. सारेगामा के इनले कार्ड पर भी गुलज़ार लिखा है

Prateek Aggarwal का कहना है कि -

Ab In Do Maha Guruo se kaun pangga le.. theek hai agat Geetkar Gulzar Sahab hai to wahi sahi :)

Sajeev Ji.. kya poore gaane ki bol yaha likhne se 1 ank milega ? :)

Lataa:
(saavan ki raaton men aisaa bhi hotaa hai)-2
Raahi koi bhulaa huaa tufaanon men khoyaa huaa
Raah pe aa jaataa hai
Saavan ki raaton men...............

Teri nazar se ise dekh lun main
Dil se mere tum ye mahasus kar lo

Talat:
Tufaan ye mere dil se uthaa hai
Chaaho to tum apane daaman men bhar lo

Lataa:
Tufaanon men khoyaa huaa ye raastaa hai
Saavan ki raaton men...............

Haaraa huaa thaa andhere kaa raahi
Manzil se pahale neend aa rahi thi

Talat:
Tum dur lekar chale aae varanaa
Mere charaagon se lau jaa rahi thi

Lataa:
Tere liye jeeten hain ham dil jaanataa hai

Both:
(saavan ki raaton men aisaa bhi hotaa hai)-2
Raahi koi bhulaa huaa tufaanon men khoyaa huaa
Raah pe aa jaataa hai
Saavan ki raaton men........

गुड्डोदादी का कहना है कि -

कहाँ गए भावुकता भरे गीत क्या लिक्खूँ धन्यवाद सारथी सुजॉय बेटा

Neeraj Rohilla का कहना है कि -

एक अनुरोध है, आवाज के पेज को लोड करते ही डिफ़ाल्ट में किसी रेडियो प्लेयर पर कुछ बजने लगता है और फ़िर मुश्किल से उसे खोजकर बन्द करना पडता है। अगर ऐसा न हो तो बडा अच्छा रहेगा।

सजीव सारथी का कहना है कि -

neeraj ji wo awaaz ka hi radio player hai, jise aasaani se band kiya jaa sakta hai, kuch dinon tak prachaar ke liye use default on rakha gaya hai

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