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मेघा बरसने लगा है आज की रात...राग "जयन्ती मल्हार" पर आधारित एक आकर्षक गीत - Sajeev

अंग लग जा बालमा..."मेघ मल्हार" के सुरों से वशीभूत नायिका का मनुहार - Sajeev

छाई बरखा बहार...राग सूर मल्हार के स्वरों का जादू - Sajeev

झिर झिर बरसे सावनी अँखियाँ...बरसती बौछारों में तन और मन का अंतरद्वंद - Sajeev

नाच मेरे मोर जरा नाच...कम चर्चित संगीतकार शान्ति कुमार देसाई की रचना - Sajeev

राही कोई भूला हुआ, तूफानों में खोया हुआ राह पे आ जाता है...राग "देस मल्हार" के सुरों में बँधा - Sajeev

उमड़ घुमड़ कर आई रे घटा...उत्साह, उल्लास और उमंग से भरपूर राग वृन्दावनी सारंग का एक अलग रंग - Sajeev

गरजत बरसत भीजत आई लो...राग गौड़ मल्हार और लता जी के स्वरों में मिलन की आतुरता - Sajeev

सावन के बादलों उनसे जा कहो...रिमझिम फुहारों के बीच विरह के दर्द में भींगे जोहरा बाई और करण दीवान के स्वर - Sajeev

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