Saturday, August 13, 2011

भीष्म साहनी के जन्मदिन पर विशेष "चील"



सुनो कहानी: भीष्म साहनी की "चील"

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ।

पिछले सप्ताह आपने अर्चना चावजी और सलिल वर्मा की आवाज़ में संजय अनेजा की कहानी "इंतज़ार" का पॉडकास्ट सुना था।

आठ अगस्त को प्रसिद्ध लेखक, नाट्यकर्मी और अभिनेता श्री भीष्म साहनी का जन्मदिन होता है. इस अवसर पर आवाज़ की ओर से प्रस्तुत है उनकी एक कहानी। मैं तब से उनका प्रशंसक हूँ जब पहली बार स्कूल में उनकी कहानी "अहम् ब्रह्मास्मि" पढी थी। सुनो कहानी में वही कहानी पढने की मेरी बहुत पुरानी इच्छा है परन्तु यहाँ उपलब्ध न होने के कारण आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं उनकी एक और प्रसिद्ध कहानी "चील" जिसको स्वर दिया है संज्ञा टंडन ने। आशा है आपको पसंद आयेगी।

कहानी का कुल प्रसारण समय 21 मिनट 5 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।



भीष्म साहनी (1915-2003)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनिए एक नयी कहानी
पद्म भूषण भीष्म साहनी का जन्म आठ अगस्त 1915 को रावलपिंडी में हुआ था।

"ऊपर, आकाश में मण्डरा रही थी जब सहसा, अर्धवृत्त बनाती हुई तेजी से नीचे उतरी और एक ही झपट्टे में, मांस के लोथड़े क़ो पंजों में दबोच कर फिर से वैसा ही अर्द्ववृत्त बनाती हुई ऊपर चली गई।"
("चील" से एक अंश)

नीचे के प्लेयर से सुनें.
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यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें
VBR MP3

#140th Story, Cheel: Bhisham Sahni/Hindi Audio Book/2011/21. Voice: Sangya Tandon

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श्रोता का कहना है :

सजीव सारथी का कहना है कि -

एक महान कथाकार को आपने याद किया और इतनी सुन्दर कहानी के साथ, संज्ञा जी बहुत खूब वचन किया, वाकई इन रचनाकारों की रचनाएं आपको भीतर का भेद जाती हैं, चीलों का बिम्ब क्या खूब है

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