Wednesday, November 2, 2011

ये तेरा घर ये मेरा घर....आम आदमी की संकल्पनाओं को शब्द दिए जावेद अख्तर ने



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 779/2011/219

गजीत सिंह को समर्पित 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की लघु शृंखला 'जहाँ तुम चले गए' में एक बार फिर से मैं, सुजॉय चटर्जी, आपका स्वागत करता हूँ। कल की कड़ी में हमनें आपको जगजीत और चित्रा सिंह के कुछ ऐल्बमों के बारे में बताया। उनके बाद जगजीत जी के कई एकल ऐल्बम आये जिनमें शामिल थे Hope, In Search, Insight, Mirage, Visions, कहकशाँ, Love Is Blind, चिराग, और सजदा। मिर्ज़ा ग़ालिब, फ़िराक़ गोरखपुरी, कतील शिफ़ई, शाहीद कबीर, अमीर मीनाई, कफ़ील आज़ेर, सुदर्शन फ़ाकिर, निदा फ़ाज़ली, ज़का सिद्दीक़ी, नाज़िर बकरी, फ़ैज़ रतलामी और राजेश रेड्डी जैसे शायरों के ग़ज़लों को उन्होंने अपनी आवाज़ दी। जगजीत जी के शुरुआती ग़ज़लें जहाँ हल्के-फुल्के और ख़ुशमिज़ाजी हुआ करते थे, बाद के सालों में उन्होंने संजीदे ग़ज़लें ज़्यादा गाई, शायद अपनी ज़िन्दगी के अनुभवों का यह असर था। ऐसे ऐल्बमों में शामिल थे Face To Face, आईना, Cry For Cry. जगजीत जी के ज़्यादातर ऐल्बमों के नाम अंग्रेज़ी होते रहे, और कईयों में उर्दू शब्दों का प्रयोग हुआ जैसे कि 'सजदा', 'सहर', 'मुन्तज़िर', 'मारासिम' और 'सोज़'। इस शृंखला में आप उनके फ़िल्मी गीत तो सुन ही रहे हैं, नए दौर के कई फ़िल्मों में भी उनके गाये गीत और ग़ज़लें रहे, जैसे कि 'दुश्मन', 'सरफ़रोश', 'तुम बिन', 'तरकीब', 'जॉगर्स पार्क', 'लीला' आदि। ग़ज़लों के अलावा जगजीत सिंह नें भजन और गुरुबानी भी बहुत गाये। उनके गाये ऐसे धार्मिक ऐल्बमों में शामिल हैं 'माँ', 'हरे कृष्णा', 'हे राम' हे राम', इच्छाबल', 'मन जीताई जगजीत' (पंजाबी)। इन ऐल्बमों के ज़रिये उन्होंने वो दर्जा हासिल कर लिया जो दर्जा अनुप जलोटा, हरिओम शरण जैसे भजन गायकों का था।

दोस्तों, अब तक इस शृंखला में शामिल आठ गीतों में प्रथम सात गीत ऐसे थे जिनका संगीत जगजीत सिंह नें तैयार किया था। लता मंगेशकर, आशा भोसले, दिलराज कौर, विनोद सहगल, चित्रा सिंह के एक एक गीत के अलावा दो गीत जगजीत सिंह के गाये हुए भी रहे। और आठवाँ गीत एक पारम्परिक ठुमरी थी जिसे जगजीत और चित्रा नें गाई। आज नवी कड़ी में प्रस्तुत है एक बड़ा ही हँस-मुख और ज़िन्दगी से भरपूर डुएट जगजीत सिंह और चित्रा सिंह की ही आवाज़ों में। फ़िल्म 'साथ-साथ' का यह सदाबहार गीत है "ये तेरा घर ये मेरा घर, किसी को देखना हो गर, तो पहले आके माँग ले, मेरी नज़र तेरी नज़र"। इस फ़िल्म में संगीत था कुलदीप सिंह का। जगजीत और चित्रा के गाये तमाम युगल ग़ज़लें तो हैं ही, इस जोड़ी नें कई फ़िल्मी गीत भी साथ में गाये हैं, जिनमें आज का यह गीत सब से ज़्यादा लोकप्रिय रहा और आज भी एवेरग्रीन डुएट्स में शुमार होता है।



चलिए अब खेलते हैं एक "गेस गेम" यानी सिर्फ एक हिंट मिलेगा, आपने अंदाजा लगाना है उसी एक हिंट से अगले गीत का. जाहिर है एक हिंट वाले कई गीत हो सकते हैं, तो यहाँ आपका ज्ञान और भाग्य दोनों की आजमाईश है, और हाँ एक आई डी से आप जितने चाहें "गेस" मार सकते हैं - आज का हिंट है -
आनंद बख्शी का लिखा है ये गीत जगजीत की आवाज़ से महका

पिछले अंक में

खोज व आलेख- सुजॉय चट्टर्जी


इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

फेसबुक-श्रोता यहाँ टिप्पणी करें
अन्य पाठक नीचे के लिंक से टिप्पणी करें-

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

श्रोता का कहना है :

अमित तिवारी का कहना है कि -

Title: Chitthi na koi sandesh. Lyrics: Anand Bakshi Singer: Jagjit Singh Music: Uttam Singh Movie: Dushman Year: 1998

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

संग्रहालय

25 नई सुरांगिनियाँ

ओल्ड इज़ गोल्ड शृंखला

महफ़िल-ए-ग़ज़लः नई शृंखला की शुरूआत

भेंट-मुलाक़ात-Interviews

संडे स्पेशल

ताजा कहानी-पॉडकास्ट

ताज़ा पॉडकास्ट कवि सम्मेलन