Tuesday, November 29, 2011

ऐ मेरे उदास मन चल दोनों कहीं दूर चलें...येसुदास ने अपने सबसे बेहतरीन गीत गाये दादु के लिए



'ओल्ड इज़ गोल्ड' में इन दिनों जारी है गीतकार-संगीतकार-गायक रवीन्द्र जैन पर केन्द्रित लघु शृंखला 'मेरे सुर में सुर मिला ले'। रवीन्द्र जैन नें जिन नवोदित कलाकारों को हिन्दी फ़िल्मों में गाने का मौका दिया, उनमें एक नाम येसुदास का भी है। हालाँकि वो दक्षिण में स्थापित हो चुके थे, पर हिन्दी फ़िल्मों में उन्हें दादु ही लेकर आए थे फ़िल्म 'चितचोर' में। दादु के शब्दों में "'चितचोर' में हम येसुदास को लेकर आए, इस फ़िल्म से मुझे बहुत दाद मिले हैं बड़े-बड़े गुणी लोगों से, "जब दीप जले आना" के लिए, जैसे सुधीर फड़के जी, वो जब भी मिलते थे, कहते थे कि राग यमन में इतना अच्छा गाना मैंने कैसे बनाया। यह जो राग यमन है न, यह प्राइमरी राग है, यही सबसे पहले आता है। फिर लता जी, आशा जी ने भी बहुत तारीफ़ की, हृदयनाथ जी, सभी ने। एक दिन बासु भट्टाचार्य जी ने येसुदास को लाकर कहा कि यह लड़का गाएगा, इसे सुन लो। हम लोग अमोल पालेकर के लिए एक नई आवाज़ की तलाश कर रहे थे, तो येसुदास जी की आवाज़ उन पर बिल्कुल फ़िट हो गई, बहुत ही अच्छे गुणी कलाकार हैं। और यह जो गाना है न, "जब दीप जले आना", इसकी धुन मैंने पहले कलकत्ते में तैयार किया था एक नाटक के लिए, 'मृच्छ कटिका'। इसके बाद हम तो चल पड़े, मंज़िल की जिसको धुन हो, उसे कारवाँ से क्या!" दोस्तों, इसी बात पर येसुदास का गाया फ़िल्म 'मान अभिमान' का वह गीत यकायक याद आ गया, जिसके बोल हैं "ऐ मेरे उदास मन चल दोनों कहीं दूर चलें, मेरे हमदम, तेरी मंज़िल, ये नहीं ये नहीं कोई और है"। आज 'ओल्ड इज़ गोल्ड' में बारी इसी गीत की।

'चितचोर' और 'मान अभिमान' का ज़िक्र हमने किया। इनके अलावा रवीन्द्र जैन और येसुदास की जोड़ी कई और फ़िल्मों में सुनाई दी जैसे कि 'नैया' में "ओ गोरिया रे" और "ऊँची-नीची लहरों के कांध पे चढ़के", 'अय्याश' में "बीती हुई रात की सुनाती है कहानी", 'सुनैना' में "सुनैना, इन नज़ारों को तुम देखो"। कहा जाता है कि रवीन्द्र जैन येसुदास के गायन से इतने ज़्यादा प्रभावित थे कि एक बार उन्होंने कहा था कि अगर उनकी दृष्टि वापस मिल जाए तो सबसे पहले वो येसुदास को देखना चाहेंगे। १९८९ में रवीन्द्र जैन नें येसुदास के प्रोडक्शन हाउस 'तरंगिनी ऑडियोज़' के तले मलयालम ऐल्बम 'आवनी पूछेन्दु' में संगीत दिया था। फ़िल्म 'मान अभिमान' १९८० की फ़िल्म थी जिसका निर्माण ताराचन्द बरजात्या नें अपनी 'राजश्री' के बैनर तले किया था और फ़िल्म के निर्देशक थे हीरेन नाग। फ़िल्म के मुख्य कलाकार थे राज किरण, रामेश्वरी, कविता किरण, यूनुस परवेज़, इफ़्तेख़र, अमरीश पुरी प्रमुख। फ़िल्म के गीतों को आवाज़ें दी येसुदास, हेमलता, सुरेश वाडकर और ख़ुद रवीन्द्र जैन ने। और फ़िल्म का सर्वाधिक लोकप्रिय गीत आज का प्रस्तुत गीत ही है। तो आइए सुना जाए यह गीत।




पहचानें अगला गीत -एक देवर अपनी भाभी का गुणगान करा रहा है इस गीत में, ये फिल्म दो बार बनी एक ही बैनर पर और दोनों बार सुपर हिट साबित हुई

पिछले अंक में


खोज व आलेख- सुजॉय चट्टर्जी


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3 श्रोताओं का कहना है :

Kshiti का कहना है कि -

saanchi kahe tore aavan se hamre angna main aai bahar bhauji film NADIYA K PAAR, dhik tana dhik tana dhik tana bhabi tum khushiyon ka kazana film HUM AAPKE HAIN KAUN? aj ka audio kahan hai wese?

चन्द्रकांत दीक्षित का कहना है कि -

साची कहे तोरे आवन से हमरे अंगना में आई बहार भौजी
फिल्म नदिया के पार

AVADH का कहना है कि -

मैं तो समझ रहा था कि केवल मुझे ही ऑडियो फाइल नहीं मिल रही है पर क्षिति जी की टिप्पणी से पता चला कि उन्हें भी वही प्रॉब्लम थी.
क्या यह अगली पोस्ट में मिल सकती है?
धन्यवाद.
अवध लाल

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