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संसार से भागे फिरते हो...साहिर और रोशन ने रचा वो गीत जिसने सवाल उठाये बेहद सार्थक - Sajeev

जीवन से भरी तेरी आँखें....काव्यात्मक शैली में लिखा था इन्दीवर ने इस गीत को - Sajeev

बज उठेंगीं हरे कांच की चूडियाँ....आशा की आवाज़ में एक चहकता नग्मा... - Sajeev

बा होशो-हवास में दीवाना ये आज वसीयत करता है...फ़िल्मी गीतों में नए प्रयोगों के सूत्रधार रहे आनंद बख्शी साहब - Sajeev

हम हैं मता-ए-कूचा ओ बाज़ार की तरह....फ़िल्मी ग़ज़लों में अग्रणी कही जा सकती है ये रचना - Sajeev

गाइए लता का गीत और बनिए आवाज़ का नया सुर-तारा - नया आग़ाज़ - नियंत्रक । Admin

जब ओल्ड इस गोल्ड के श्रोताओं ने सुनाये सुजॉय को अपनी पसंद के गीत- 150 वें एपिसोड का जश्न है आज की शाम - Sajeev

8 तरह से सुनें सुमित्रा नंदन पंत की 'प्रथम रश्मि' - नियंत्रक । Admin

जयशंकर प्रसाद की कविता का सुरबद्ध और संगीतबद्ध रूप (परिणाम) - नियंत्रक । Admin

इस बार का कवि सम्मेलन रश्मि प्रभा के संग - नियंत्रक । Admin

सुनो कहानी: शिखर-पुरुष - Smart Indian

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