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आवारा हैं गलियों में मैं और मेरी तन्हाई .. अली सरदार जाफ़री के दिल का गुबार फूटा जगजीत सिंह के सामने - विश्व दीपक

दिल मगर कम किसी से मिलता है... बड़े हीं पेंचो-खम हैं इश्क़ की राहो में, यही बता रहे हैं जिगर आबिदा - विश्व दीपक

ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात.. फ़िराक़ के ग़मों को दूर करने के लिए बुलाए गए हैं गज़लजीत जगजीत सिंह - विश्व दीपक

बेदर्द मैंने तुझको भुलाया नहीं हनोज़... कुछ इस तरह जोश की जिंदादिली को स्वर दिया मेहदी हसन ने - विश्व दीपक

ऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ, वहशत-ए-दिल क्या करूँ...मजाज़ के मिजाज को समझने की कोशिश की तलत महमूद ने - विश्व दीपक

"इन हाथों की ताज़ीम करो..."- अली सरदार जाफरी के बोल और शुभम् का संगीत - नियंत्रक । Admin

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