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महान फनकारों के सुरों से सुर मिलते आज हम आ पहुंचे हैं रिवाईवल की अंतिम कड़ी में ये कहते हुए - तू भी मेरे सुर में सुर मिला दे... - Sajeev

गीत कभी बूढ़े नहीं होते, उनके चेहरों पर कभी झुर्रियाँ नहीं पड़ती...सच ही तो कहा था गुलज़ार साहब ने - Sajeev

दो युवा प्रेमियों के प्रेम तो कभी प्रेम त्रिकोण को आधार बना कर लिखी गयी बहुत सी फ़िल्में, और अनेकों गीत भी - Sajeev

क्या लता जी की आवाज़ से भी अधिक दिव्य और मधुर कुछ हो सकता है कानों के लिए - Sajeev

रफ़ी साहब- एक ऐसी आवाज़ जिसने जाने कितनी बार हम सब के जज़्बात अपने स्वरों में उकेरे है - Sajeev

जितने अच्छे गायक थे, उतने ही बढ़िया संगीतकार भी थे हेमंत दा - Sajeev

कुदरत के नज़रों की खूबसूरती का बयां करते हुए भी बने कई नायाब गीत - Sajeev

ये वो दौर था जब फ़िल्में एक खास उद्देश्य से बनती थी, जाहिर है संगीत पर भी खूब मेहनत होती थी - Sajeev

पार्श्वगायकों और अभिनेताओं की भी जोडियाँ बनी इंडस्ट्री में, जो अभिनय और आवाज़ में एकरूप हो गए - Sajeev

फिल्म में गीत लिखना एक अलग ही किस्म की चुनौती है जिसे बेहद सफलता पूर्वक निभाया बीते दौर के गीतकारों ने - Sajeev

कविहृदय शैलेन्द्र ने जब फ़िल्मी गीत लिखे तो उनके कलम स्पर्श से सैकड़ों गीत अमरत्व पा गए - Sajeev

बर्मन दा, आपके रचे गीत भारतीय फिल्म संगीत के आसमान पर सदैव टिमटिमाते रहेंगें, आपको सलाम - Sajeev

संगीतकारों के अग्रणी नामों के पीछे कुछ ऐसे दिग्गज भी थे जिन्हें वो सब नहीं मिल पाया जिसके वो हक़दार थे - Sajeev

पुराने नायाब गीतों की सफलता में उन अदाकारों का अभिनय भी एक अहम घटक रहा जिन्होंने इन गीतों को परदे पर जीया - Sajeev

फिल्मों गीतों की दास्ताँ गीता के जिक्र बिना कैसे पूरी हो... - Sajeev

भारतीय और पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत, दोनों में ही माहिर थे सलिल दा - Sajeev

प्रेम में आपसी छेड छाड, नोंक झोंक आदि रहा फ़िल्मी युगल गीतों का विषय अमूमन - Sajeev

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