Thursday, July 9, 2009

इस बार स्वरबद्ध कीजिए निराला की एक कविता को



गीतकास्ट प्रतियोगिता के दो अंकों का सफल आयोजन हो चुका है। जहाँ जयशंकर प्रसाद की कविता 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' को 12 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं, वहीं सुमित्रानंदन पंत की कविता 'प्रथम रश्मि' के लिए 19 स्वरबद्ध/सुरबद्ध प्रविष्टियाँ मिलीं। आलम यह रहा कि 'प्रथम रश्मि'' की 8 संगीतमय प्रस्तुतियाँ प्रसारित करनी पड़ीं।

जब पहली बार इस प्रतियोगिता के आयोजन की उद‍्‍घोषणा हुई थी, तब तय किया गया था कि कुल रु 2000 का नग़द पुरस्कार दिया जायेगा, लेकिन इसे पहली बार ही बढ़ाकर रु 2500 करना पड़ा। 'प्रथम रश्मि' को संगीतबद्ध करने की उद्‍घोषणा के समय यह राशी बढ़ाकर रु 3000 की गई, लेकिन परिणाम प्रकाशित करते वक़्त प्रायोजक इतने खुश थे कि राशि बढ़कर रु 4000 हो गई। अब से यह राशि हमेशा के लिए रु 4000 की जा रही है।

आज छायावादी कविताओं को स्वरबद्ध/सुरबद्ध की कड़ी में बारी है महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता की। निराला की कौन सी कविता स्वरबद्ध करायी जाये, इस संदर्भ में हमने अपने श्रोताओं से भी राय ली थी। 'राम की शक्तिपूजा' को स्वरबद्ध करने का सुझाव अधिकाधिक श्रोताओं ने दिया, लेकिन हमारी टीम मानती है कि वह कविता स्वरबद्ध करना बहुत आसान है नहीं है, शुरूआत किसी सरल कविता से हो। इसलिए हम निराला के एक नवगीत से इसकी शुरूआत कर रहे हैं। इस गीत की अनुशंसा भी बहुत से श्रोताओं ने की है।

इस कड़ी के प्रायोजक हैं डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह, जो पिछले 30 वर्षों से मानचेस्टर, यूके में प्रवास कर रहे हैं। कवि हृदयी, कविता-मर्मज्ञ और साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले- ये सभी इनके विशेषण हैं।

गीत को केवल पढ़ना नहीं बल्कि गाकर भेजना होगा। हर प्रतिभागी इस गीत को अलग-अलग धुन में गाकर भेजे (कौन सी धुन हो, यह आपको खुद सोचना है)।

1) गीत को रिकॉर्ड करके भेजने की आखिरी तिथि 31 जुलाई 2009 है। अपनी प्रविष्टि podcast.hindyugm@gmail.com पर ईमेल करें।
2) इसे समूह में भी गाया जा सकता है। यह प्रविष्टि उस समूह के नाम से स्वीकार की जायेगी।
3) इसे संगीतबद्ध करके भी भेजा जा सकता है।
4) श्रेष्ठ तीन प्रविष्टियों को डॉ॰ ज्ञान प्रकाश सिंह की ओर से क्रमशः रु 2000, रु 1000 और रु 1000 के नग़द पुरस्कार दिये जायेंगे।
5) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को डलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो स्टेशन रेडियो सलाम नमस्ते के कार्यक्रम 'कवितांजलि' में बजाया जायेगा। इस प्रविष्टि के गायक/गायिका से आदित्य प्रकाश (कार्यक्रम के संचालक) कार्यक्रम में सीधे बातचीत करेंगे, जिसे दुनिया में हर जगह सुना जा सकेगा।
6) अन्य उल्लेखनीय प्रविष्टियों को भी कवितांजलि में बजाया जायेगा।
7) सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि को 'हिन्दी-भाषा की यात्रा-कथा' नामक वीडियो/डाक्यूमेंट्री में भी बेहतर रिकॉर्डिंग के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
8) श्रेष्ठ प्रविष्टि के चयन का कार्य आवाज़-टीम द्वारा किया जायेगा। अंतिम निर्णयकर्ता में आदित्य प्रकाश का नाम भी शामिल है।
9) हिन्द-युग्म का निर्णय अंतिम होगा और इसमें विवाद की कोई भी संभावना नहीं होगी।
10) निर्णायकों को यदि अपेक्षित गुणवत्ता की प्रविष्टियाँ नहीं मिलती तो यह कोई ज़रूरी भी नहीं कि पुरस्कार दिये ही जायँ।

निराला की कविता 'स्नेह-निर्झर बह गया है'

स्नेह-निर्झर बह गया है।
रेत ज्यों तन रह गया है।

आम की यह डाल जो सूखी दिखी,
कह रही है- "अब यहाँ पिक या शिखी
नहीं आते, पंक्‍ति मैं वह हूँ लिखी
नहीं जिसका अर्थ-
जीवन दह गया है।"

"दिये हैं मैंने जगत् को फूल-फल,
किया है अपनी प्रतिभा से चकित-चल;
पर अनश्‍वर था सकल पल्लवित पल-
ठाट जीवन का वही
जो ढह गया है।"

अब नहीं आती पुलिन पर प्रियतमा,
श्याम तृण पर बैठने को, निरुपमा।
बह रही है हृदय पर केवल अमा;
मैं अलक्षित हूँ, यही
कवि कह गया है।

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8 श्रोताओं का कहना है :

Disha का कहना है कि -

बहुत ही सुन्दर कविता है निराला जी की.
धन्यवाद

गिरिजेश राव का कहना है कि -

राम की शक्ति पूजा का चयन न कर आप ने निराश कर दिया।

सरलता और कठिनाई का तर्क नहीं जमा। क्या आप समांतर रूप से यह कविता भी प्रतियोगिता के लिए नहीं रख सकते?

Shamikh Faraz का कहना है कि -

निराला जी की कविता को स्वरबद्ध करने के लिए हिन्दयुग्म को बधाई.

Manju Gupta का कहना है कि -

हिन्दयुग्म की सोच सराहनीय है . उनका आशीर्वाद मिल रहा है .

Ambarish Srivastava का कहना है कि -

"किया है अपनी प्रतिभा से चकित-चल " को स्वरबद्ध करने में अपनी प्रतिभा कहने में लयबद्धता भंग हो रही है |
क्या इसे इस तरह परिवर्तित करके गया जा सकता है ?
"किया है प्रतिभा से अपनी चकित-चल "
सादर,
अम्बरीष श्रीवास्तव

Aditya का कहना है कि -

Thanks to everyone involved in setting this initiative up-and-running and Best Wishes to all !!

Special thanx for such encouraging words for my composition for the previous contest - "PrathamRashmi" ..it feels so great :-) Looking forward to a great turn-over this time as well.

You can find my version of "Pratham Rashmi" and more compositions from me, as well as a clipping of my interview on "Kavitanjali" Radio Salaam Namaste (12 July 2009) at my link here http://www.myspace.com/adityapathakmusic

God bless you all !!

Cheers,
Aditya

kamal kishore singh का कहना है कि -

Is kavita kee ek pankti meri samajh me nahee aatee-' par anashwar tha sakal pallwit pal'kee jagah ' par nashwar tha sakal pallwit pal' hona chahiye tha meri samajh se.
kripaya punah chek kar dekh len.

Sadar
Kamalkishore Singh

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

हिंदयुग्म ने जो यह बीड़ा उठाया है,सुन्दर और अच्छे कविताओं के प्रसार और प्रचार का जिससे लोगो को बेहतरीन गीत मिल सके अत्यन्त सराहनीय है.

निराला जी की बहुत सुन्दर कविता है,
हिंदयुग्म और उसके सहयोगियों को दिल से बधाई.

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