Friday, September 4, 2009

चल बादलों के आगे ....कहा हेमंत दा ने आशा के सुर से सुर मिलाकर



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 192

'१० गायक और एक आपकी आशा' की पहली कड़ी में कल आप ने आशा भोसले और तलत महमूद का गाया फ़िल्म 'इंसाफ़' का युगल गीत सुना था। आज भी कल जैसा ही एक नर्म-ओ-नाज़ुक रोमांटिक युगल गीत लेकर हम हाज़िर हुए हैं। आज के गायक हैं हेमंत कुमार। इससे पहले की हम आज के गीत की चर्चा करें, क्योंकि यह शृंखला केन्द्रित है आशा जी पर, तो आशा जी के बारे में पहले कुछ बातें हो जाए! आशा जी ने फ़िल्म जगत में अपना सफ़र शुरु किया था बतौर बाल कलाकार। 'बड़ी माँ' और 'आई बहार' जैसी फ़िल्मों में उन्होने अभिनय किया था। बतौर पार्श्वगायिका उन्हे पहला मौका दिया था संगीतकार हंसराज बहल ने, फ़िल्म थी 'चुनरिया' और साल था १९४८। लेकिन यह फ़िल्म नहीं चली और उनका गाना भी नज़रंदाज़ हो गया। शोहरत की ऊँचाइयों को छूने के लिए उन्हे करीब करीब १० साल संघर्ष करना पड़ा. १९५७ के कुछ फ़िल्मों से वो हिट हो गयीं और १९५८ में बनी 'हावड़ा ब्रिज' के "आइए मेहरबान" गीत से तो वो लोगों के दिलों पर राज करने लगीं। १९४८ की 'चुनरिया' से लेकर १९५८ की 'हावड़ा ब्रिज' तक जिन जिन प्रमुख फ़िल्मों में आशा जी ने गीत गाए, उन पर एक नज़र डालते चलें।

१९४९ - लेख, रुमाल
१९५० - मुक़द्दर, बावरे नन
१९५१ - सब्ज़ बाग़, लचक, जोहरी, मुखड़ा
१९५२ - जलपरी, संगदिल, अलादिन और जादुई चिराग़
१९५३ - परिनीता, एक दो तीन, छम छमा छम, रंगीला, चाचा चौधरी, हुस्न का चोर, गौहर, आग का दरिया, नौलखा हार, शमशीर, पापी
१९५४ - इल्ज़ाम, अलिबाबा और ४० चोर, बूट पालिश, अधिकार, चक्रधारी, धूप छाँव, दुर्गा पूजा, तुल्सीदास, मस्ताना
१९५५ - मधुर मिलन, श्री नकद नारायण, लुटेरा, मुसाफ़िरखाना, इंसानीयत, जशन, नवरात्री, मस्तानी, शिव भक्त, राजकन्या, रेल्वे प्लेट्फ़ार्म, तातर का चोर, हल्लागुल्ला, जल्वा, प्यारा दुश्मन
१९५६ - छू मंतर, कर भला, पैसा ही पैसा, इंद्रसभा, राम नवमी, सबसे बड़ा रुपया, हम सब चोर हैं, क़िस्मत, समुंदरी डाकू, इंसाफ़, गुरु घंटाल, फ़ंटुश, भागमभाग, जल्लाद
१९५७ - नौ दो ग्यारह, तुम सा नहीं देखा, संत रघु दुश्मन, जौनी वाकर, क़ैदी, अभिमान, पेयिंग्‍ गेस्ट, कितना बदल गया इंसान, बड़े सरकार, बंदी, बड़ा भाई, उस्ताद, मिस्टर एक्स, देख कबीरा रोया, एक झलक।

हेमंत कुमार के साथ आशा जी के गाये तमाम गीतों में से आज सुनिए १९५७ की फ़िल्म 'एक झलक' का एक बड़ा ही मधुर गीत "चल बादलों से आगे कुछ और ही समां है, हर चीज़ है निराली हर ज़िंदगी जवाँ है"। उन दिनों हेमंत कुमार अभिनेता प्रदीप कुमार के स्क्रीन वायस हुआ करते थे। दोनों ने अपने अपने बंबई के करीयर की शुरुआत १९५२ की फ़िल्म 'आनंदमठ' से की थी। उसके बाद 'अनारकली' और 'नागिन' जैसी ब्लौक्बस्टर फ़िल्में आईं। १९५७ में भी इस जोड़ी का सिलसिला जारी रहा। दीप खोंसला के साथ मिल कर प्रदीप कुमार ने 'दीप ऐंड प्रदीप प्रोडक्शन्स' की स्थापना की और इस बैनर के तले पहली फ़िल्म का निर्माण किया 'एक झलक'। ज़ाहिर सी बात है कि हेमंत कुमार से वो अपना पार्श्वगायन करवाते। लेकिन संगीत निर्देशन का भी दायित्व हेमंतदा को ही सौंपा गया। प्रदीप कुमार, वैजयंतीमाला और राजेन्द्र कुमार अभिनीत इस फ़िल्म में हेमंत दा ने नायिका के लिए आशा जी की आवाज़ चुनी और गीतों को लिखा एस. एच. बिहारी ने। गीता दत्त के साथ गाए युगल गीत "आजा ज़रा मेरे दिल के सहारे" के अलावा, हेमंत दा ने आशा जी के साथ कम से कम दो ऐसे युगल गीत गाए जो बेहद बेहद पसंद किए गए। उनमें से एक तो आज का प्रस्तुत गीत है, और दूसरा गीत था "ये हँसता हुआ कारवाँ ज़िंदगी का न पूछो चला है किधर"। इन दोनों गीतों में पाश्चत्य संगीत का असर है, लेकिन मेलडी को बरक़रार रखते हुए। यही तो बात थी उस ज़माने की। पाश्चात्य संगीत को अपनाना कोई बुरी बात नहीं है, जब तक वो गीत की मधुरता, शब्दों की गहराई और हमारी शोभनीय संस्कृति के साथ द्वंद न करने लग जाए। हेमंत दा ने जब कभी भी पाश्चात्य संगीत का इस्तेमाल अपने गीतों में किया है, हर बार इन चीज़ों को ध्यान में रखा है। तो चलिए सुनते हैं आज का यह गीत। कल जो बोनस १० अंकों वाला सवाल हमने पूछा था, उसका सही जवाब हम ऐसे नहीं बताएँगे, बल्कि हर रोज़ धीरे धीरे राज़ पर से परदा उठता जाएगा, जैसे जैसे गीत पेश होते जाएँगे।



गील के बोल:
हेमंत: (चल बादलों से आगे
कुछ और ही समा है
हर चीज़ है निराली
हर ज़िंदगी जवाँ है ) \- 2

आशा: (जिसे देखने को मेरी
आँखें तरस रही हैं ) \- 2
वो जगह जहाँ से हरदम
उजला बरस रही है
मेरी ख़्वाब की वो दुनिया
बतलाओ तो कहाँ है
हर चीज़ है निराली
हर ज़िंदगी जवाँ है

हेमंत: चल बादलों से आगे ...


और अब बूझिये ये पहेली. अंदाजा लगाइये कि हमारा अगला "ओल्ड इस गोल्ड" गीत कौन सा है. हम आपको देंगे तीन सूत्र उस गीत से जुड़े. ये परीक्षा है आपके फ़िल्म संगीत ज्ञान की. याद रहे सबसे पहले सही जवाब देने वाले विजेता को मिलेंगें 2 अंक और 25 सही जवाबों के बाद आपको मिलेगा मौका अपनी पसंद के 5 गीतों को पेश करने का ओल्ड इस गोल्ड पर सुजॉय के साथ. देखते हैं कौन बनेगा हमारा तीसरा (पहले दो गेस्ट होस्ट बने हैं शरद तैलंग जी और स्वप्न मंजूषा जी)"गेस्ट होस्ट". अगले गीत के लिए आपके तीन सूत्र ये हैं-

१. कल के गीत आशा के साथ होंगें "मन्ना डे".
२. इस मशहूर फिल्म के नाम में एक रंग का नाम शामिल है.
३. शास्त्रीय संगीत पर आधारित इस गीत को लिखा है नीरज ने.

पिछली पहेली का परिणाम -
हर बार की तरह पराग जी फिर आगे निकल आये हैं २२ अंकों के साथ. बधाई....१० बोनुस अंकों के लिए आप सब ने अच्छी कोशिश की, पर सही जवाब किसी के पास नहीं मिला....खैर ऐसे मौके हम आपको आगे भी देते रहेंगें.

खोज और आलेख- सुजॉय चटर्जी



ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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6 श्रोताओं का कहना है :

Anonymous का कहना है कि -

Lal Patthar... re man sur me ga

ROHIT RAJPUT

purvi का कहना है कि -

lagta hai abki baar rohit ji ekdam taiyar they, jawab ke saath :)

badhai rohit ji

Shamikh Faraz का कहना है कि -

रोहित जी को मुबारकबाद.

manu का कहना है कि -

correct....!!!!!

Parag का कहना है कि -

रोहित जी का जवाब सही लग रहा है, बहुत बधाई.

आभारी
पराग

Manju Gupta का कहना है कि -

जवाब आ ही गया .रोहित जी को बधाई .

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