Saturday, December 12, 2009

सुनो कहानी: मुंशी प्रेमचन्द की "नमक का दरोगा"



'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने हरिशंकर परसाई लिखित व्यंग्य "खेती" का पॉडकास्ट अनुराग शर्मा की आवाज़ में सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं मुंशी प्रेमचंद की कहानी "नमक का दरोगा", जिसको स्वर दिया है अनुराग शर्मा ने।
कहानी का कुल प्रसारण समय मात्र 21 मिनट 31 सेकंड है। सुनें और बतायें कि हम अपने इस प्रयास में कितना सफल हुए हैं।

यदि आप भी अपनी मनपसंद कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, धारावाहिको, प्रहसनों, झलकियों, एकांकियों, लघुकथाओं को अपनी आवाज़ देना चाहते हैं हमसे संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ देखें।




मैं एक निर्धन अध्यापक हूँ...मेरे जीवन मैं ऐसा क्या ख़ास है जो मैं किसी से कहूं
~ मुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६)

हर शनिवार को आवाज़ पर सुनिए प्रेमचंद की एक नयी कहानी

वेतन मनुष्य देता है, इसी से उसमें वृध्दि नहीं होती। ऊपरी आमदनी ईश्वर देता है, इसी से उसकी बरकत होती हैं।
(प्रेमचंद की "नमक का दारोगा" से एक अंश)


नीचे के प्लेयर से सुनें.
(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)

यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
VBR MP3
#Fiftieth Story, Namak Ka Daroga: Munshi Premchand/Hindi Audio Book/2009/44. Voice: Anurag Sharma

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6 श्रोताओं का कहना है :

indu puri का कहना है कि -

namak ka daroga 'sunkar bahut achchha lagaa ,kya main ise save kar sakti hun?
dekhti hun school ke course ki kai kahaniyan audio book ke roop men free me available hai ,ek achchha collection taiyar ho jayega mere paas
aap mhari kitni mdd kr rhe hain aap nhi jante
sadhuwad

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन का कहना है कि -

इंदु जी,
आवाज़ पर "सुनो कहानी" में प्रकाशित सभी ऑडियो कहानियां आप सेव कर सकती हैं. आपके स्कूल के प्रोजेक्ट के लिए शुभकामनाएं!
हर कहानी में नीचे ऑडियो फ़ाइल सेव करने के लिए एक लिंक है [अगली पंक्ति जैसे],
यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंक से डाऊनलोड कर लें:
VBR MP3
उसे राईट क्लिक करें और "सेव एज" पर क्लिक कर के अपने कम्पूटर पर सेव कर लें.
~अनुराग.

indar का कहना है कि -

anurag ji ,mai primary school me adhyapak ho aapki ye site dekh aur sun kar ati prasanta ho rahi hai, dehat chetra me aaj kal bachhe bhi mobile par filmi gane hi bajate rahte hain ab unle mobile par munshi ji aur anya mahan sahityakaro ki kahaniya bajengi to bachhe kya bade bhi chav se sungey. aapko dhanyavaad

Anonymous का कहना है कि -

aap log ek achcha kaam kar rhe hai aaj ki generation me se kitne log to swargiya shri munshi premchand ko hi nhi jaante to unki kahaniya to bahut door ki baat hai aap log bachcho ko itihaas ke ek mashoor aur mahatwapoorna sahityakaar ki mashoor lekhano se roobaroo kara rhe hai keep it up..:-)

monideepa का कहना है कि -

aap sabhi log ek bahut accha kam kar rahe hai kyunki aajkal sabhi log bas films vagera vagera hi bas dekhne mein interest rakhte hai haan mein maanti hun aaj ki ye dhumdhadake ki speed mein chalti is duniya mein log sabhi purane lekhko ko bhul jaa rahe hain magar aapki yein sight dekhke or sun ke mujhe bahut accha laga aur agar dusre bhi ise dekhenge va sunenge to unke man mein bhi ye sab ke liye jagrukta badehgi

micheal का कहना है कि -

Man i am a foreigner but i respect india n indians i very little understand hindi but i know much about india i hane come here for visit and my aunt said thatyou all are displaying the stories of late munshi premchand who was an excellent writter of all times i m highely honoured to see this cause in america this nevr happens although being an american i love india the most for its multi coloured world.grt job guys...

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