Wednesday, July 28, 2010

गोरे गोरे ओ बांके छोरे....प्रेरित धुनों पर थिरकने वाले गीतों की संख्या अधिक है



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 449/2010/149

संगीतकार सी. रामचन्द्र को क्रांतिकारी संगीतकारों की सूची में शामिल किया जाता है। ४० के दशक में जब फ़िल्म संगीत पंजाब, बंगाल और यू.पी. के लोक संगीत तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत में ढल कर लोगों तक पहुँच रही थी, ऐसे में सी. रामचन्द्र ने पाश्चात्य संगीत को कुछ इस क़दर इंट्रोड्युस किया कि जैसे फ़िल्मी गीतों की प्रचलित धारा का रुख़ ही मोड़ दिया। इसमें कोई शक़ नहीं कि उनसे पहले ही विदेशी साज़ों का इस्तेमाल फ़िल्मी रचनाओ में शुरु हो चुका था, लेकिन उन्होने जिस तरह से विदेशी संगीत को भारतीय धुनों में ढाला, वैसे तब तक कोई और संगीतकार नहीं कर सके थे। १९४७ की फ़िल्म 'शहनाई' में "आना मेरी जान मेरी जान सन्डे के सण्डे" ने तो चारों तरफ़ तहलका ही मचा दिया था। उसके बाद १९५० की फ़िल्म 'समाधि' में वो लेकर आए "ओ गोरे गोरे ओ बांके छोरे, कभी मेरी गली आया करो"। इस गीत ने भी वही मुक़ाम हासिल कर लिया जो "सण्डे के सण्डे" ने किया था। उसके बाद १९५१ में फ़िल्म 'अलबेला' में फिर एक बार "शोला जो भड़के दिल मेरा धड़के" ने भी वही कमाल किया। तो दोस्तों, आज हमने 'गीत अपना धुन पराई' के लिए चुना है फ़िल्म 'समाधि' के "ओ गोरे गोरे" गीत को। पता है इसकी धुन किस मूल धुन से प्रेरीत है? यह है एडमुण्डो रॊस की क्लासिक "चिको चिको ओ पोरटिको" से। वैसे यह भी कहना ज़रूरी है कि केवल मुखड़ा ही इस धुन से लिया गया है, अंतरे की धुन सी. रामचन्द्र की मौलिक धुन है। राजेन्द्र कृष्ण ने इस गीत को लिखा था और आवाज़ें है लता मंगेशकर, अमीरबाई कर्नाटकी और साथियों की। जैसे कि गीत के बोलों से ही ज़ाहिर है कि दो नायिकाओं में एक लड़की है तो दूसरी बनी है लड़का। लता ने लड़की का प्लेबैक दिया है तो अमीरबाई ने लड़के का। 'समाधि' रमेश सहगल निर्देशित फ़िल्म थी जिसके मुख्य कलाकार थे अशोक कुमार, नलिनी जयवन्त, कुलदीप कौर, श्याम, मुबारक़, एस.एल. पुरी, बद्री प्रसाद आदि। प्रस्तुत गीत फ़िल्माया गया है नलिनी जयवन्त और कुलदीप कौर पर जिनके किरदारों के नाम थे लिली डी'सूज़ा और डॊली डी'सूज़ा। १९५० की सब से ज़्यादा व्यापार करने वाली फ़िल्म साबित हुई थी 'समाधि' जिसने १,३५,००,००० र का व्यापार किया था।

आइए आज बात करें एडमुण्डो रॊस की जिनकी बनाई धुन पर आधारित है हमारा आज का गीत। ७ दिसंबर १९१० को पोट ऒफ़ स्पेन, त्रिनिदाद, वेस्ट इण्डीज़ में एडमुण्डो विलियम रॊस के नाम से जनम लेने के बाद १९३९ से लेकर १९७५ तक वो संगीत की दुनिया में सक्रीय रहे। आज भी वो १०० वर्ष की आयु में हमारे बीच मौजूद हैं। रोस ने अपने करीयर में एक बेहद लोकप्रिय लातिन-अमेरिकन ऒरकेस्ट्रा का निर्देशन किया, रेकॊर्डिंग् के क्षेत्र में भी लम्बी पारी खेली और लंदन के एक जाने माने नाइट क्लब के मालिक रहे। १९४० में उन्होने अपना बैन्ड बनाया जिसका नाम उन्होने रखा 'एडमुण्डो ओस ऐण्ड हिज़ रम्बा बैण्ड'। इस बैण्ड में धीरे धीरे १६ म्युज़िशिअन्स शामिल हुए। १९४९ में बना उनका गीत 'दि वेडिंग साम्बा' इतना ज़्यादा लोअक्प्रिय हुआ कि ३ मिलियन ७८-आर.पी.एम के रेकॊर्ड्स बिके। जहाँ तक "चिको चिको" गीत का सवाल है, यह एक क्यूबन गीत है, जो एडमुण्डो रॊस की 'दि क्यूबन लव सॊंग्‍ ऐल्बम' में शामिल किया गया है। जहाँ एक तरफ़ सी. रामचन्द्र ने इस धुन का इस्तेमाल १९५० की इस फ़िल्म में किया, वहीं अगले साल १९५१ में तमिल संगीतकार आर. सुदर्शनम ने तमिल फ़िल्म 'ओर इरवु' के गीत "अय्या सामी अवोजि सामी" में किया जिसे गाया था एम. एल. वसंतकुमारी ने। तो इन तमाम जानकारियों के बाद आप भी बेचैन हो रहे होंगे इस चुलबुले गीत को सुनने के लिए, तो सुनते हैं....



क्या आप जानते हैं...
कि फ़िल्म 'समाधि' की कहानी नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की 'आज़ाद हिंद सेना' की पृष्ठभूमि पर बनाई गई थी।

पहेली प्रतियोगिता- अंदाज़ा लगाइए कि कल 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर कौन सा गीत बजेगा निम्नलिखित चार सूत्रों के ज़रिए। लेकिन याद रहे एक आई डी से आप केवल एक ही प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं। जिस श्रोता के सबसे पहले १०० अंक पूरे होंगें उस के लिए होगा एक खास तोहफा :)

१. May be you'll fall in love with me domani से कुछ प्रेरित है ये गीत, कौन हैं इस मधुर गीत के गायक संगीतकार - ३ अंक.
२. गीतकार बताएं - २ अंक.
३. फिल्म का नाम बताएं - १ अंक.
४. इस फिल्म का और कौन स गीत है जो ओल्ड इस गोल्ड पर बज चुका है - २ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
शरद जी ने कल लपक लिए ३ अंकों का सवाल. अवध जी भी चुस्त दिखे. किश और प्रतिभा जी (क्या हम इन्हें अलग अलग मानें? मान लेते हैं) भी ऑन स्पोट रहे. इंदु जी नयी तस्वीर में खूब लग रहीं हैं, राज जी आपकी फिल्म का इन्तेज़ार रहेगा.

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


ओल्ड इस गोल्ड यानी जो पुराना है वो सोना है, ये कहावत किसी अन्य सन्दर्भ में सही हो या न हो, हिन्दी फ़िल्म संगीत के विषय में एकदम सटीक है. ये शृंखला एक कोशिश है उन अनमोल मोतियों को एक माला में पिरोने की. रोज शाम 6-7 के बीच आवाज़ पर हम आपको सुनवाते हैं, गुज़रे दिनों का एक चुनिंदा गीत और थोडी बहुत चर्चा भी करेंगे उस ख़ास गीत से जुड़ी हुई कुछ बातों की. यहाँ आपके होस्ट होंगे आवाज़ के बहुत पुराने साथी और संगीत सफर के हमसफ़र सुजॉय चटर्जी. तो रोज शाम अवश्य पधारें आवाज़ की इस महफिल में और सुनें कुछ बेमिसाल सदाबहार नग्में.

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4 श्रोताओं का कहना है :

शरद तैलंग का कहना है कि -

गायक और संगीतकार : किशोर कुमार

Pawan Kumar का कहना है कि -

geetkar-mazrooh sultanpuri
*****
PAWAN KUMAR

Kish का कहना है कि -

Film: Jhumroo 1961

Kish...
Ottawa, Canada

Pratibha Kaushal का कहना है कि -

इस फिल्म का और कौन स गीत है जो ओल्ड इस गोल्ड पर बज चुका है - Babaloo Babaloo based on famous song 'Tequila'.

Pratibha Kaushal (not Kish)
Kanata, Canada

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