Tuesday, October 12, 2010

तुम गगन के चन्द्रमा हो.....प्रेम और समर्पण की अद्भुत शब्दावली को स्वरबद्ध किया एल पी ने उसी पवित्रता के साथ



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 503/2010/203

'एक प्यार का नग़मा है' - फ़िल्म संगीत जगत की सुप्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के स्वरबद्ध गीतों से सजी इस लघु शृंखला की तीसरी कड़ी में हम आप सब का स्वागत करते हैं। आनंद बक्शी और राजेन्द्र कृष्ण के बाद आज जिस गीतकार के शब्दों को एल.पी अपने धुनों से सजाने वाले हैं, उस महान गीतकार का नाम है भरत व्यास, जो एक गीतकार ही नहीं एक बेहतरीन हिंदी के कवि भी हैं और उनका काव्य फ़िल्मी गीतों में भी साफ़ दिखाई देता है। व्यास जी ने शुद्ध हिंदी का बहुत अच्छा इस्तेमाल फ़िल्मी गीतों में भी किया और इस तरह से बहुत सारे स्तरीय गीत फ़िल्म जगत को दिए। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ जब उनकी बात चलती है तो एक दम से हमारे दिमाग़ में जिस फ़िल्म का नाम आता है, वह है 'सती सावित्री'। इस फ़िल्म के गानें तो भरत व्यास जी के गीतों की कड़ियों में बहुत बाद में दर्ज हुआ; सन् १९४९ में वे मिले संगीतकार खेमचंद प्रकाश से और इन दोनों ने लुभाना शुरु कर दिया अपने श्रोताओं को। 'ज़िद्दी', 'सावन आया रे', 'तमाशा' आदि फ़िल्मों में इन दोनों ने साथ साथ काम किया। ५० के दशक में भरत व्यास के धार्मिक और ऐतिहासिक फ़िल्मी गीत ख़ूब लोकप्रिय हुए जिनमें 'रानी रूपमती' और 'जनम जनम के फेरे' सब से उल्लेखनीय रहे। हिंदी के जटिल शब्दों को बड़े ख़ूबसूरत अंदाज़ में उन्होंने गीतों में ढाला और आम जनता में उन्हें लोकप्रिय कर दिखाया। १९६४ की फ़िल्म 'सती सावित्री' की बात करें तो इस फ़िल्म के गानें शास्त्रीय रंग लिए हुए हैं जिन्हें लक्ष्मी-प्यारे ने बड़े ही सुंदर तरीके से कॊम्पोज़ किए। इस फ़िल्म के तमाम सुमधुर गीतों में एक युगल गीत था लता मंगेशकर और मन्ना डे का गाया हुआ, जो शुद्ध कल्याण रूपक ताल पर आधारित एक बेहद सुंदर, कोमल, और निष्पाप प्रेम के भावनाओं से सराबोर गीत था। "तुम गगन के चन्द्रमा हो मैं धरा की धूल हूँ, तुम प्रणय के देवता हो मैं समर्पित फूल हूँ"। किसी फ़िल्मी गीत में प्रणय की अभिव्यक्ति का इससे सुंदर और काव्यात्मक उदाहरण और क्या हो सकता है भला!

'सती सावित्री' सन् १९६४ की फ़िल्म थी, यानी कि एल.पी के स्वतंत्र संगीतकर बनने के बाद शुरुआती सालों का एक फ़िल्म। शांतिलाल सोनी निर्देशित इस धार्मिक फ़िल्म के मुख्य कलाकार थे महिपाल, अंजली देवी, जीवन, बी. एम. व्यास, रामायण तिवारी, अरुणा ईरानी, मोहन चोटी, निरंजन शर्मा आदि। युं तो ऐसा अक्सर देखा गया उस ज़माने में कि जिस कलाकार ने भी धर्मिक और ऐतिहासिक फ़िल्मों में काम किया, उस जौनर की मोहर उन पर लग गई और उसके बाद उस जौनर में से निकल पाना बेहद मुश्किल साबित हुआ। कल्याणजी-आनंदजी ने अपने करीयर के शुरु शुरु में ऐसे कई फ़िल्मों को ठुकरा दिया था इसी डर से। लेकिन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने यह रिस्क लिया और 'सती सावित्री' में संगीत देने के लिए तैयार हो गए यह जानते हुए भी कि इस फ़िल्म का बाकी जो टीम है वह पूरा का पूरा माइथोलोजिकल जौनर का है। लेकिन शायद यह उनकी काबिलियत ही रही होगी कि वो इस जौनर में नहीं फँसे और अपने वर्सएटायलिटी को बरकरार रखा। और लीजिए अब प्यारेलाल जी के शब्दों में सुनिए आज के प्रस्तुत गीत के बनने की कहानी जो उन्होंने विविध भारती के उसी इंटरव्यू में कहे थे कमल शर्मा को। "एक बात कहूँ मैं, यह जो पिक्चर थी 'सती सावित्री', इसमें एक गाना है, एक पिक्चर बन रही थी भगवान मिस्त्री की, 'राम बाण', या कोई और, ठीक से याद नहीं मुझे, राम के उपर बड़ी पिक्चर बन रही थी, कलर पिक्चर, उसमें एक गाना था, उसमें म्युज़िक दे रहे थे वसंतराव देसाई, और भरत (व्यास) जी गाना लिख रहे थे। अब यह गाना जो है, "तुम गगन के चन्द्रमा हो", मैं इसलिए कह रहा हूँ, कि यह गाना जो है उन्होंने उस फ़िल्म के लिए लिखा था, जिसमें राम और सीता गाते हैं। तो वह गाना ना वहाँ पर हुआ, और एक जगह दे रहे थे भरत जी, वहाँ भी नहीं हुआ, उन्होंने हम लोगों से कहा कि 'बेटे, बहुत प्यार करते थे हम लोगों को, कहने लगे कि तुम लोग यह गाना कॊम्पोज़ करो। तो यह गाना हमने बाद में कॊम्पोज़ किया, लेकिन लिखा पहले है, धुन बाद में बनी।"

और दोस्तों, शायद इसी वजह से इस गीत में जान डल गई है। तो लीजिए पहले राम और सीता के किरदारों के लिए लिखा यह गीत, जो बाद में सावित्री सत्यवान के किरदारों पर फ़िल्माया गया, सुनते हैं लता जी और मन्ना दा की आवाज़ों में। इसे सुन कर एक अजीब सी शांति मिलती है मुझे, क्या आपको भी?



क्या आप जानते हैं...
कि १९६९ में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को ईरान में बनने वाली एक फ़िल्म में संगीत देने के लिए अनुबंधित किया गया था। यह ना केवल उनकी उपलब्धि थी बल्कि पूरे देश के लिए गौरव की बात थी।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली ०३ /शृंखला ०१
ये धुन उस गीत के प्रीलियूड की है, सुनिए -


अतिरिक्त सूत्र -मुखड़े में "खत" शब्द है और नायिका परदेस में बैठे प्रेमी से वापस आने की गुहार कर रही है

सवाल १ - लोक रंग में रंगे इस गीत के गीतकार कौन हैं - २ अंक
सवाल २ - गायिका बताएं - १ अंक
सवाल ३ - किस नायिका पर फिल्माया गया था ये गीत - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
शरद जी सही जवाब, २ अंक और...अवध जी आपका अंदाजा एकदम सही है, बिट्टो जी, आपको भी १ अंक की बहुत बधाई. अमित जी और श्याम कान्त जी....लगे रहिये....शंकर लाल जी मुस्कुरा रहे हैं.....उम्मीद है आज का अतिरिक्त सूत्र आपकी दिक्कतें आसान कर देगा.

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

फेसबुक-श्रोता यहाँ टिप्पणी करें
अन्य पाठक नीचे के लिंक से टिप्पणी करें-

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

9 श्रोताओं का कहना है :

सुकान्त का कहना है कि -

लक्ष्मीकांत प्यारे लाल की तो शुरूआत ही स्टंट फिल्म पारसमणि से हुई थी. पारसमणी के बाद हरिश्चन्द्र तारामती, सती सावित्री और संत ज्ञानेश्वर की. इनके लिये बड़जात्या जी की दोस्ती बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हुई. दोस्ती फिल्म ने ही इन्हें स्टंट और धार्मिक फिल्मों के चक्रव्यूह से निकाला.

पहेली 03 /श्रंखला 1 का गान तो "खत लिखदे सांवरिया के नाम बाबू" लगता है..

सुकान्त का कहना है कि -

अरे पूरा प्रश्न नहीं पढ़ और अधूरा जबाब दिया

गीतकार आनन्द बख्शी
गायिका आशा भौंसले
नायिका - आशा पारिख

Anonymous का कहना है कि -

ab hamaare liye to kuch nahi raha

Sajeev का कहना है कि -

सुकांत जी आपका स्वागत है, कृपया नियम पढ़ें, आप केवल एक ही सवाल का जवाब दे सकते हैं, उससे अधिक जवाब देने पर अंक नहीं मिलेंगें....जाहिर है अन्य लोगों के लिए मैदान खुला है....

Pawan Kumar का कहना है कि -

asha bhonsle
*****
PAWAN KUMAR

शरद तैलंग का कहना है कि -

गीतकार : आनन्द बक्शी

ShyamKant का कहना है कि -

asha parekh

रोमेंद्र सागर का कहना है कि -

यह तो तमाशा ही हो गया !!

Vinaykant Joshi का कहना है कि -

"तुम गगन......" के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
इसे ही किसी शाम संत ज्ञानेश्वर का "खबर मोरी ना..." भी सुनवा दे

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

संग्रहालय

25 नई सुरांगिनियाँ

ओल्ड इज़ गोल्ड शृंखला

महफ़िल-ए-ग़ज़लः नई शृंखला की शुरूआत

भेंट-मुलाक़ात-Interviews

संडे स्पेशल

ताजा कहानी-पॉडकास्ट

ताज़ा पॉडकास्ट कवि सम्मेलन