Tuesday, December 28, 2010

एक मैं और एक तू, दोनों मिले इस तरह....ये था प्यार का नटखट अंदाज़ सत्तर के दशक का



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 558/2010/258

'एक मैं और एक तू' - 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की इस लघु शृंखला की आठवीं कड़ी में आज एक और ७० के दशक का गीत पेश-ए-ख़िदमत है। दोस्तों, फ़िल्म संगीत के सुनहरे दौर की गायक-गायिका जोड़ियों में जिन चार जोड़ियों का नाम लोकप्रियता के पयमाने पर सब से उपर आते हैं, वो हैं लता-किशोर, लता-रफ़ी, आशा-किशोर और आशा-रफ़ी। ७० के दशक में इन चार जोड़ियों ने एक से एक हिट डुएट हमें दिए हैं। कल के लता-रफ़ी के गाये गीत के बाद आज आइए आशा-किशोर की जोड़ी के नाम किया जाये यह अंक। और ऐसे में फ़िल्म 'खेल खेल में' के उस गीत से बेहतर गीत और कौन सा हो सकता है, जिसके मुखड़े के बोलों से ही इस शृंखला का नाम है! "एक मैं और एक तू, दोनों मिले इस तरह, और जो तन मन में हो रहा है, ये तो होना ही था"। नये अंदाज़ में बने इस गीत ने इस क़दर लोकप्रियता हासिल की कि जवाँ दिलों की धड़कन बन गया था यह गीत और आज भी बना हुआ है। उस समय ऋषी कपूर और नीतू सिंह की कामयाब जोड़ी बनी थी और एक के बाद एक कई फ़िल्में इस जोड़ी के बने। 'खेल खेल में' १९७५ में बनी थी जिसका निर्देशन किया था रवि टंडन ने। वैसे तो इस फ़िल्म की कहानी कॊलेज में पढ़ने वाले युवाओं के हँसी मज़ाक से शुरु होती है, लेकिन कहानी तब सीरियस हो जाती है जब वे एक ख़तरनाक मुजरिम से भिड़ जाते हैं, और एक रोमांटिक फ़िल्म थ्रिलर में बदलकर रह जाती है। इस फ़िल्म में राकेश रोशन, अरुणा ईरानी और इफ़्तेखार ने भी अहम भूमिकाएँ अदा की थी। वैसे आपको यह भी बता दें कि इस फ़िल्म की कहानी मूल अंग्रेज़ी उपन्यास 'गूड चिल्ड्रेन डोण्ट किल' से ली गई है जिसके लेखक थे लूई थॊमस, जो नेत्रहीन थे, और यह उपन्यास सन् १९६७ में प्रकाशित हुआ था।

'खेल खेल में' फ़िल्म में संगीत था राहुल देव बर्मन का और गीत लिखे गुल्शन बावरा ने। दोस्तों, एक ज़माने में गुल्शन बावरा ने पंचम के लिए काफ़ी सारे फ़िल्मों में गीत लिखे थे। आज ये दोनों ही इस संसार में मौजूद नहीं हैं, लेकिन कुछ साल पहले 'यूनिवर्सल म्युज़िक' ने पंचम के जयंती पर एक ऐल्बम जारी किआ जिसका शीर्षक था - 'Untold Stories about Pancham - Rare Sessions of Gulshan Bawra'। तो आइए आज इसी ऐल्बम से चुनकर गुल्शन बावरा के कुछ शब्द पढ़ें जो उन्होंने अपने इस मनपसंद संगीतकार के लिए रेकॊर्ड करवाये थे। "संगीत उसकी ज़िंदगी थी, और वो ज़िंदगी का भरपूर मज़ा ले ही रहा था कि मौत के ख़तरनाक हाथों ने उसे अपने शिकंजे में ले लिया। आर. डी. बर्मन, यानी कि पंचम, उसके चाहनेवालों को, उसकी हमनवा, हमप्याला, गुल्शन बावरा का नमस्कार! दोस्तों, यह मेरा सौभाग्य है कि मैं यूनिवर्सल म्युज़िक के सौजन्य से अपने जिगरी दोस्त पंचम की बर्थ ऐनिवर्सरी पे उसको अपनी खट्टी मीठी यादों का गुल्दस्ता पेश कर रहा हूँ, इस आशा के साथ कि स्वग लोक में पंचम को इसकी भीनी भीनी ख़ुशबू आ रही होगी। पंचम देवी सरस्वती का पुजारी था। हर साल अपने घर में सरस्वती पूजा बड़ी धूम धाम से मनाता था। उस दिन अमिताभ बच्चन, जया, जीतेन्द्र, धर्मेन्द्र, ऋषी कपूर, रणधीर कपूर, डिरेक्टर्स में नासिर हुसैन, शक्ति सामंत, प्रमोद चक्रवर्ती, गीतकारों मे आनंद बक्शी, मजरूह सुल्तानपुरी साहब, गुलज़ार और मैं, हम सब इकट्ठा होते। पहले पूजा होती, और उसके बाद लंच होता। लंच बड़ा ही लज़ीज़ होता था और एस्पेशियली बैंगन के जो पकोड़े बनते थे, उनका तो मज़ा ही अलग था। और सोने पे सुहागा, आशा जी बड़े प्यार से सबको सर्व करती थीं। जितने भी पंचम के म्युज़िशियन्स थे, उस दिन ख़ूब एन्जॊय करते थे।" दोस्तों, आगे और भी बहुत बातें बावरा साहब ने कही है जिन्हें हम हौले हौले आप तक पहुँचाते रहेंगे। फिलहाल जवाँ दिलों की धड़कन बना यह गीत आपकी नज़र कर रहे हैं, "एक मैं और एक तू"। बड़ा ही पेपी नंबर है, एक हल्का फुल्का रोमांटिक डुएट, जिसमें किशोर दा की मीठी शरारती अंदाज़ भी है और आशा जी की शोख़ी भी। सुनते हैं...



क्या आप जानते हैं...
कि फ़िल्म 'खेल खेल में' में मिथुन चक्रवर्ती ने एक 'एक्स्ट्रा' के तौर पे अभिनय किया था।

दोस्तों अब पहेली है आपके संगीत ज्ञान की कड़ी परीक्षा, आपने करना ये है कि नीचे दी गयी धुन को सुनना है और अंदाज़ा लगाना है उस अगले गीत का. गीत पहचान लेंगें तो आपके लिए नीचे दिए सवाल भी कुछ मुश्किल नहीं रहेंगें. नियम वही हैं कि एक आई डी से आप केवल एक प्रश्न का ही जवाब दे पायेंगें. हर १० अंकों की शृंखला का एक विजेता होगा, और जो १००० वें एपिसोड तक सबसे अधिक श्रृंखलाओं में विजय हासिल करेगा वो ही अंतिम महा विजेता माना जायेगा. और हाँ इस बार इस महाविजेता का पुरस्कार नकद राशि में होगा ....कितने ?....इसे रहस्य रहने दीजिए अभी के लिए :)

पहेली 9/शृंखला 06
गीत का ये हिस्सा सुनें-


अतिरिक्त सूत्र - किसी अन्य सूत्र की दरकार नहीं.

सवाल १ - पुरुष गायक बताएं - २ अंक
सवाल २ - इस सफल फिल्म का नाम बताएं - १ अंक
सवाल ३ - फिल्म की प्रमुख अभिनेत्री का नाम बताएं - १ अंक

पिछली पहेली का परिणाम -
इस बार शरद जी ने बढ़त बना ली है, अमित तिवारी जी, सिर्फ एक सवाल का जवाब देना है सभी का नहीं, अंतः अंक शून्य

खोज व आलेख- सुजॉय चटर्जी


इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

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7 श्रोताओं का कहना है :

शरद तैलंग का कहना है कि -

आज तो पहेली का साउंड प्लेयर ही नहीं दिख रहा है इसलिए जवाब नहीं दे पा रहा हूँ

शरद तैलंग का कहना है कि -

Singer : S P balasubramanyam

शरद तैलंग का कहना है कि -

कुछ सेटिंग में प्रोब्लम थी अब ठीक हुआ ।

अमित तिवारी का कहना है कि -

मुझे पता ही नहीं था की केवल एक सवाल का जवाब देना है. खेर कोई बात नहीं.दरअसल मैं इसे USA की सुबह पढता हूँ इसलिए देरी हो जाती है.वैसे भारतीय समय के अनुसार आप यह कड़ी किस समय पोस्ट करते हैं?
एक और सवाल: आवाज के गाने मैं iPhone पर नही सुन सकता. क्या कोई तरीका है?



फिल्म की प्रमुख अभिनेत्री : रति अग्निहोत्री

Anonymous का कहना है कि -

आवाज और हम???'एक दूजे के लिए' बने है न? नही? ऐसा कैसे हो सकता है भई?

अजय कुमार झा का कहना है कि -

फ़िल्म एक दूजे के लिए का गाना हम बने तुम बने एक दूजे के लिए

मेरा नया ठिकाना

Anonymous का कहना है कि -

स्वागत.आज तो झाजी भी पधारे हैं.वाह! क्या कहने 'आवाज' के.
सुजॉय सजीव ! अमिताभ रेखा की एक फिल्म जो हेलमेट से मिलती जुलती फिल्म थी उसमे भी मैंने मिथुन जी को एक्स्ट्रा के रूप में देखा था फिल्म का नाम शायद 'जाने अनजाने' था.

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