Saturday, March 12, 2011

ओल्ड इस गोल्ड - शनिवार विशेष - आनंद लीजिए एक अनूठे क्रिकेट का जो हैं "ही" और "शी" के बीच सदियों से जारी...



नमस्कार! दोस्तों, पिछले दिनों आपने 'ओल्ड इज़ गोल्ड' में २०११ विश्वकप क्रिकेट को समर्पित हमारी लघु शृंखला 'खेल खेल में' सुन व पढ़ रहे थे। यह शृंखला थी दस अंकों की। लेकिन दोस्तों, आपको नहीं लगता कि क्रिकेट के लिए दस का आँकड़ा कुछ बेमानी सा है? क्योंकि इसमें ग्यारह खिलाड़ी भाग लेते हैं और देखिये यह साल भी २०११ का है, ऐसे में इस शृंखला के अगर ग्यारह अंक होते तो ज़्यादा न अच्छा रहता? तो इसीलिए हमनें सोचा कि आज का यह विशेषांक समर्पित किया जाये क्रिकेट को और इस तरह से इसे आप 'खेल खेल में' शृंखला की ग्यारहवीं कड़ी भी मान सकते हैं।

क्रिकेट और विश्वकप के इतिहास से जुड़ी तमाम बातों और रेकॊर्ड्स का हमनें पिछले दिनों ज़िक्र किया। आइए आज बात करें कनाडा के क्रिकेट टीम की। शायद आप हैरान हो रहे होंगे कि बाकी सब छोड़ कर अचानक कनाडियन क्रिकेट टीम में दिलचस्पी क्यों? दरअसल बात कुछ ऐसी है कि कनाडियन क्रिकेट टीम में एक नहीं, दो नहीं, बल्कि बहुत सारे ऐसे खिलाड़ी हैं जो दक्षिण-एशियाई मूल के हैं, यानी कि भारत, पाक़िस्तान और श्रीलंका के। और वर्तमान २०११ के विश्वकप के टीम में भी कम से कम सात भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं। आइए आज इन सब से आपका संक्षिप्त में परिचय करवाएँ। कनाडियन क्रिकेट टीम के वर्तमान कप्तान हैं आशिष बगई। २९ वर्षीय इस खिलाड़ी का जन्म दिल्ली में २६ जनवरी १९८२ को हुआ था। दाहिनी हाथ के बल्लेबाज़ होने के साथ साथ वे विकेट-कीपर भी हैं। इन्होंने अपना पहला ODI बांगलादेश के ख़िलाफ़ ११ फ़रवरी २००३ को खेला था, यानी कि उस वक़्त उनकी उम्र थी २१ वर्ष। इससे पहले १९९६ के Under-15 क्रिकेट विश्वकप में उन्होंने अपनी शुरुआत की, जिसमें वो सर्वश्रेष्ठ विकेट-कीपर के रूप में चुने गये थे। साल २००० के Under-19 विश्वकप में उनका बैटिंग् ऐवरेज सब से उपर था। तब से लेकर आज तक आशिष कनाडा टीम के स्थायी सदस्य बनें हुए हैं।

आशिष बगई के बाद आइए बात करें बालाजी राव की। ३३ वर्षीय इस कनाडियन क्रिकेटर का पूरा नाम है वनदवासी दोराकांति बालाजी राव। ४ मार्च १९७८ को मद्रास (चेन्नई) में जन्में बालाजी मूलत: एक बोलर हैं और उनका बोलिंग् स्टाइल है 'राइट आर्म लेग ब्रेक'। बल्लेबाज़ी वे बायें हाथ से करते हैं। बालाजी को उनके सह-खिलाड़ी 'बाजी' कहकर बुलाते हैं। बाजी नें अपना पहला ODI वेस्ट इण्डीज़ के ख़िलाफ़ २४ अगस्त २००८ को खेला था। और अब कुछ गल हो जाये तीन पंजाबी मु्ण्डे दी? जी हाँ, २०११ विश्वकप के कनाडा टीम में पंजाबी मूल के तीन खिलाड़ी शामिल हैं। हरवीर बैदवान एक ऒल-राउण्डर हैं, जिनका जन्म चण्डीगढ़ में ३१ जुलाई १९८७ को हुआ था। दायें हाथ से बल्लेबाज़ी करने वाले इस खिलाड़ी का बोलिंग् स्टाइल है 'राइट-आर्म मीडियम'। इन्होंने अपना पहला ODI बरमुडा के ख़िलाफ़ २८ जून २००८ को खेला था। फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट में हरवीर ने अपना डेब्यु कोल्ट्स क्रिकेट क्लब में रहकर किया था और वह मैच थी रागमा क्रिकेट क्लब के ख़िलाफ़, जो कोलम्बो में खेली गई थी २००९ अक्तुबर २ से ४ के बीच। दूसरा पंजाब दा मुण्डा है जिम्मी हंसरा, जिनका जन्म लुधियाना में २९ दिसंबर १९८४ को हुआ था। जिम्मी भी हरवीर की तरह ऒल-राउण्डर हैं, लेकिन इनका बोलिंग् स्टाइल है 'राइट आर्म स्लो'। जिम्मी नवोदित खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपना पहला ODI अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ १ जुलाई २०१० को खेला था। लुधियाना से ही ताल्लुख़ रखने वाले एक और कनाडियन प्लेयर हैं नितिश कुमार। १६ वर्षीय इस युवा खिलाड़ी का जन्म २१ मई १९९४ को कनाडा के ही ऒण्टारिओ में हुआ था। नितिश के पिता लुधियाना निवासी थे। नितिश कनाडा टीम के सब से कम उम्र के खिलाड़ी हैं जो कनाडा के लिए Under-15 और Under-19 में खेल चुके हैं। नितिश का निक-नेम 'रॊनी' है और उसे कनाडा का 'तेदुलकर' भी कहा जाता है। नितिश ने भी अपना ODI डेब्यु अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ एक मैच में किया था १८ फ़रवरी २०१० के दिन।

२०११ विश्वकप क्रिकेट के कनाडा टीम में दो खिलाड़ी गुजराती मूल के भी हैं। इनमें पहला नाम है हीरालाल पटेल का। १० अगस्त १९९१ को अहमदाबाद, गुजरात में जन्में २० वर्षीय हीरालाल मूलत: दायें हाथ के बल्लेबाज़ हैं। वो एक स्ट्रोक-प्लेयिंग् ओपेनर हैं। उनका बोलिंग् स्टाइल 'स्लो लेफ़्ट आर्म ऒर्थोडोक्स' है। केनिया के ख़िलाफ़ १९ अगस्त २००९ के मैच से हीरालाल पटेल ने अपना ODI सफ़र शुरु किया। हीरालाल सुर्ख़ियों में आ गये थे ६१ गेंदों में नॊट-आउट रहकर ८८ रन बनाने के लिए जिसने कनाडा को आयरलैण्ड पर ४ रन से जीत दिलाई थी, और वह भी तब जब आयरलैण्ड फ़ेवरीट थे। उनके इस प्रदर्शन नें कनाडा टीम में उनके क़दम और मज़बूती से जमा दिए। नवसारी, गुजरात में ११ दिसंबर १९९० को जन्म हुआ था पार्थ देसाई का, जो कनाडा टीम के बोलर हैं और हीरालाल की तरह उनका भी बोलिंग्‍ शैली 'स्लो लेफ़्ट आर्म ऒर्थोडोक्स' है। पार्थ के अनुसार उनका बोलिंग् अंदाज़ मॊण्टी पानेसर जैसा है। उनके हीरो हैं सचिन तेन्दुल्कर, और भारत का २००७ में पहला T-20 विश्वकप जीतना उनके लिए सब से यादगार घटना है। पार्थ देसाई ने १३ अप्रैल २०१० को अपना पहला ODI मैच खेला था वेस्ट इण्डीज़ के ख़िलाफ़। दोस्तों, अब तक हमनें उन भारतीय मूल के खिलाड़ियों का ज़िक्र किया जो २०११ विश्वकप क्रिकेट के अन्तर्गत कनाडा क्रिकेट टीम में खेल रहे हैं। इनके अलावा पाक़िस्तान के रिज़वान चीमा, ज़ुबीन सुरकारी, और ख़ुर्रम चौहान भी इस १४ खिलाड़ी टीम में शामिल हैं। साथ ही श्रीलंका मूल के रुविंदु गुणशेखरा भी इसी दल के सदस्य हैं।

कनाडियन क्रिकेट टीम के भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका मूल के उन खिलाड़ियों के बारे में अभी हमनें चर्चा की जो २०११ विश्वकप के टीम में हैं। इन खिलाड़ियों के अलावा भी और भी बहुत सारे दक्षिण एशियाई (भारत/ पाक़िस्तान/ श्रीलंका) मूल के क्रिकेटर कनाडा टीम से जुड़े रहे हैं, जो २०११ विश्वकप के टीम में शामिल नहीं है। इनमें महत्वपूर्ण कुछ नाम हैं - अब्दुल सामद, अब्दुल जब्बर, अब्ज़ल दीन, आफ़्ताब शम्सुद्दीन, अरसलन क़ादिर, अरविंदर कदप्पा, आशिफ़ मुल्ला, आशिष पटेल, फ़ाज़िल सत्तौर, हमज़ा तारीक़, हनिंदर ढिल्लों, ईश्वर मराज, जैसन पटराज, जावेद दावूद, जीतेन्द्र पटेल, करुण जेठी, मणि औलख, मनरीक सिंह, मोहम्मद इक़बाल, मोहम्मद क़ाज़ी, मोहसिन मुल्ला, क़ैसर अली, रमेश डेविड, सामी फ़रेदी, संदीप ज्योति, संजयन थुरइसिंगम, शाहीद केशवानी, शहज़ाद ख़ान, सुनिल धनीराम, सुरेन्द्र सीराज, तारीक़ जावेद, उमर भट्टी, उस्मान लिम्बडा, ज़मीर ज़ाहीर, और ज़ीशान सिद्दिक़ी। देखा, आपने दक्षिण एशिया मूल के कितने खिलाड़ी सदस्य हैं या रह चुके हैं कनाडियन क्रिकेट टीम के!

और अब गीत-संगीत की बारी। 'खेल खेल में' शृंखला में हमनें क्रिकेट खेल पर आधारित केवल एक ही गीत सुना था, फ़िल्म 'अव्वल नंबर' का। आज आइए १९५९ की फ़िल्म 'लव मैरेज' से क्रिकेट पर बना एक गीत सुनते हैं। मोहम्मद रफ़ी और साथियों की आवाज़ों में यह गीत है "शी ने खेला ही से आज क्रिकेट मैच..."। गीतकार हसरत जयपुरी और संगीतकार शंकर-जयकिशन। इसे आप एक क्रिकेट सॊंग् भी कह सकते हैं और एक कॊमेडी सॊंग् भी, या फिर एक रोमांटिक सॊंग् भी। लेकिन इसमें जो रोमांस है न, यह काव्यात्मक शब्दों से नहीं, बल्कि क्रिकेट की शब्दावली से व्यक्त हो रहा है। इस गीत के फ़िल्मांकन में देव आनंद साहब बल्लेबाज़ी करते हुए दिखाये जा रहे हैं और गैलरी में दूसरे लोगों के साथ नायिका माला सिंहा और उनकी सहेलियाँ शामिल हैं। देव साहब को इस क्रिकेटर वाले रूप में देख कर कुछ कुछ डॊन ब्रैडमैन की यादें ताज़ी हो जाती हैं। तो आइए इस मज़ेदार गीत को सुनने से पहले पढ़ें इसके मज़ेदार बोल...
She ने खेला He से आज cricket match,

एक नज़र में दिल बेचारा हो गया LBW।
आज जो हम field में तड़ तड़ बाजी ताली,
अरे मुख पर हसीनों के आ गई फिर से लाली,
सन सन करती ball से ख़ुद को तो बचाये,
पर दिल बटुये में ले गई इक चम्पे की ताली।
दिल के versus दिल का हार गए हम match,
एक नज़र में दिल बेचारा हो गया LBW।

हमनें जब घुमाया प्यार का ये बल्ला,
अरे लैलाओं के tent में मच गया फिर से हल्ला,
जो भी गेंद आई तो चौका ही फटकारा,
पर होश हमारा ले गई इक साड़ी का पल्ला।
उन ज़ुल्फ़ों के तार ने डाले सौ सौ पेंच,
एक नज़र में दिल बेचारा हो गया LBW।

उसनें फेंका leg-break तो हमनें मारा चौका,
Out करता कौन हमें हम खिलाड़ी पक्का,
अरमानों की tent से बढ़ गए हम आगे,
और उनकी चाल देख कर रह गए हक्का बक्का।
Cricket में तो जीत गए पर हारे प्यार का मैच,
एक नज़र में दिल बेचारा हो गया LBW।


गीत: She ने खेला He से आज क्रिकेट मैच (लव मैरेज, १९५९)


तो ये था इस हफ़्ते का 'ओल्ड इज़ गोल्ड शनिवार विशेष'। आशा है आपको अच्छा लगा होगा। इसी के साथ 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर विश्वकप क्रिकेट की चर्चा भी होती है पूरी। टीवी पर विश्वकप मैचों का लुत्फ़ उठाते रहिए, और 'आवाज़' पर गीत संगीत से अपने दिल को बहलाते रहिए। कल सुबह ९ बजे सुमित के साथ 'सुर-संगम' का आनंद लीजिएगा, और मेरे साथ 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की एक नई शृंखला के पहले अंक में शामिल होइएगा ठीक शाम ६:३० बजे। अब इजाज़त दीजिए, नमस्कार!

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अमित तिवारी का कहना है कि -

बहुत बढ़िया. इंतज़ार था आज के अंक का.आपके लिखने की शैली दिल छू लेती है.

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