Wednesday, July 27, 2011

अंग लग जा बालमा..."मेघ मल्हार" के सुरों से वशीभूत नायिका का मनुहार



ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 709/2011/149

"ओल्ड इज गोल्ड" पर जारी वर्षाकालीन रागों पर आधारित गीतों की श्रृंखला "उमड़ घुमड़ कर आई रे घटा" की नौवीं कड़ी में मैं कृष्णमोहन मिश्र एक बार फिर उपस्थित हूँ| आज एक बार फिर हम राग "मेघ मल्हार" पर चर्चा करेंगे और उसके बाद इसी राग पर आधारित, श्रृंगार रस से सराबोर संगीतकार शंकर-जयकिशन की एक संगीत रचना का आनन्द लेंगे| श्रृंखला की पहली कड़ी में हम यह चर्चा कर चुके हैं कि राग "मेघ मल्हार" एक प्राचीन राग है| संगीत शास्त्र के प्राचीन ग्रन्थों में इस राग को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना गया है| आचार्य लोचन के ग्रन्थ "राग तरंगिणी" में रागों के वर्गीकरण के लिए जिन 12 थाटों का वर्णन है, उनमे एक थाट "मेघ" भी है| प्राचीन राग-रागिनी पद्यति में भी छह मुख्य रागों में "मेघ" भी है| पण्डित विष्णु नारायण भातखंडे द्वारा वर्गीकृत थाट व्यवस्था में यह राग काफी थाट के अन्तर्गत आता है| भातखंडे जी ने "संगीत शास्त्र" के चौथे खण्ड में लिखा है कि राग "मेघ मल्हार" उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में बहुत कम विद्वानों द्वारा प्रयोग किया जाता था, जबकि यह जटिल राग नहीं है| विदुषी शोभा राव ने अपनी पुस्तक "राग निधि" के तीसरे खण्ड में राग "मेघ" और "मेघ मल्हार" को एक ही राग का दो नाम माना है| वर्षाकालीन रागों में यह राग सबसे गम्भीर प्रकृति का होने से विरह-वेदना की अभिव्यक्ति के लिए इस राग के स्वर उपयुक्त होते हैं| कविवर बिहारी ने अपने एक दोहे में राग "मेघ मल्हार" के स्वभाव का बड़ा सटीक चित्रण किया है-

पावक झर तें मेह झर, दाहक दुसह बिसेख,
दहै देह वाके परस, याहि दृगन ही देख |


दोस्तों; बिहारी के इस दोहे की नायिका जिस प्रकार विरह की अग्नि से पीड़ित है, ठीक वैसी ही दशा आज प्रस्तुत किये जाने वाले गीत के नायिका की भी है| आज का गीत हमने 1970 में प्रदर्शित राज कपूर की बेहद महत्वाकांक्षी फिल्म "मेरा नाम जोकर" से लिया है| हसरत जयपुरी के शब्दों और शंकर-जयकिशन द्वारा राग "मेघ मल्हार" के स्वरों का आधार लेकर संगीतबद्ध किये गीत -"कारे कारे बदरा, सुनी सुनी रतियाँ..." को आशा भोसले ने स्वर दिया| सातवें दशक के अन्तिम वर्षों में जब फिल्म "मेरा नाम जोकर" का निर्माण हुआ था, उन दिनों फिल्म संगीत के क्षेत्र में शंकर-जयकिशन यश के शिखर पर थे| फिल्म में उन्होंने एक से एक बढ़ कर सदाबहार गीतों की रचना की थी, इसके बावजूद राज कपूर की यह भव्य परिकल्पना टिकट खिड़की पर असफल ही रही| इस गीत के अलावा फिल्म के अन्य गीतों की रचना भी स्तरीय रही| राग शिवरंजनी पर आधारित -"जाने कहाँ गए वो दिन..." और मन्ना डे की आवाज़ में गाया हुआ गीत -"ऐ भाई जरा देख के चलो..." इस फिल्म के सर्वाधिक लोकप्रिय गीत थे| "जाने कहाँ गए..." गीत के लिए मन्ना डे को पहला फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ था| आज प्रस्तुत किये जाने वाले गीत "कारे कारे बदरा..." में वर्षा ऋतु की ध्वनियों का बड़ा प्रभावी प्रयोग किया गया है| आइए हम सब आज इसी रसपूर्ण गीत का आनन्द लेते हैं-
राग मेघ मल्हार : "कारे कारे बदरा सूनी सूनी रतियाँ..." : फिल्म - मेरा नाम जोकर



क्या आप जानते हैं...
कि फिल्म "मेरा नाम जोकर" का यह गीत आर.के. कैम्प की सर्वप्रमुख गायिका लता मंगेशकर को ही गाना था, किन्तु लता जी ने गीत के शब्दों पर आपत्ति की थी| राज कपूर ने गीत या गीत के शब्द तो नहीं बदले, हाँ; पहली बार ("आग" को छोड़ कर) अपनी फिल्म में लता जी की आवाज़ नहीं ली|

आज के अंक से पहली लौट रही है अपने सबसे पुराने रूप में, यानी अगले गीत को पहचानने के लिए हम आपको देंगें ३ सूत्र जिनके आधार पर आपको सही जवाब देना है-

सूत्र १ - एक सुरीले संगीतकार (इनके दो गीत पहले ही इस शृंखला में बज चुके हैं)की अंतिम फिल्म थी ये.
सूत्र २ - गायिका आशा जी हैं.
सूत्र ३ - मुखड़े में शब्द है - "रात"

अब बताएं -
गीतकार बताएं - २ अंक
किस राग पर आधारित है ये गीत - ३ अंक
संगीतकार बताएं - २ अंक

सभी जवाब आ जाने की स्तिथि में भी जो श्रोता प्रस्तुत गीत पर अपने इनपुट्स रखेंगें उन्हें १ अंक दिया जायेगा, ताकि आने वाली कड़ियों के लिए उनके पास मौके सुरक्षित रहें. आप चाहें तो प्रस्तुत गीत से जुड़ा अपना कोई संस्मरण भी पेश कर सकते हैं.

पिछली पहेली का परिणाम -
शृंखला खतम होने की कगार पर है, और अमित जी एक अंक से आगे निकल गए हैं, देखना दिलचस्प होगा कि क्या क्षिति जी इस बार उन्हें मात दे पाती है या नहीं

खोज व आलेख- कृष्ण मोहन मिश्र



इन्टरनेट पर अब तक की सबसे लंबी और सबसे सफल ये शृंखला पार कर चुकी है ५०० एपिसोडों लंबा सफर. इस सफर के कुछ यादगार पड़ावों को जानिये इस फ्लेशबैक एपिसोड में. हम ओल्ड इस गोल्ड के इस अनुभव को प्रिंट और ऑडियो फॉर्मेट में बदलकर अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुंचाना चाहते हैं. इस अभियान में आप रचनात्मक और आर्थिक सहयोग देकर हमारी मदद कर सकते हैं. पुराने, सुमधुर, गोल्ड गीतों के वो साथी जो इस मुहीम में हमारा साथ देना चाहें हमें oig@hindyugm.com पर संपर्क कर सकते हैं या कॉल करें 09871123997 (सजीव सारथी) या 09878034427 (सुजॉय चटर्जी) को

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5 श्रोताओं का कहना है :

अमित तिवारी का कहना है कि -

Jayanti Malhar

Satyajit Phadke का कहना है कि -

Geetkar:Gulzar

Kshiti का कहना है कि -

raag jayjayvanti

Hindustani का कहना है कि -

Music: Vasant Desai

Avinash Raj का कहना है कि -

Ye film Shaque ka gaana hai, Meha Barsne laga hai Aaj ki Raat

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