अनुपमा चौहान का साक्षात्कार (Interview of Anupama Chauhan)
धीरे-धीरे हिन्द-युग्म की आवाज़ें रेडियो के श्रोताओं तक भी पहुँचने लगी हैं। रेडियो सलाम नमस्ते से जुड़े श्री आदित्य प्रकाश जी ने जब युग्म के युवा कवि निखिल आनंद गिरि का काव्य-पाठ बजाया तो बहुत से श्रोताओं ने उन्हें बधाइयाँ दी। इसी का परिणाम है कि कल यानी 28 अप्रैल 2008 की सुबह डैलास, अमेरिका के एफ॰एम॰ रेडियो चैनल 'रेडियो सलाम नमस्ते' पर कवितांजलि कार्यक्रम के दरम्यान श्री आदित्य प्रकाश ने हिन्द-युग्म की युवा कवयित्री अनुपमा चौहान से भी बात की, उनके विचार जाने। अनुपमा जी ने अपने एक गीत 'नाता' को पूरे सुर में गाकर भी सुनाया। इंटरनेट कनैक्शन में आये क्षणिक व्यवधान के कारण पूरे साक्षात्कार में लगभग १५ सेकेण्ड की रिकार्डिंग छूट गई है। आप सुनें और ज़रूर बतायें कि कैसा लगा?
नीचे ले प्लेयर से सुनें.
(प्लेयर पर एक बार क्लिक करें, कंट्रोल सक्रिय करें फ़िर 'प्ले' पर क्लिक करें।)
यदि आप इस पॉडकास्ट को नहीं सुन पा रहे हैं तो नीचे दिये गये लिंकों से डाऊनलोड कर लें (ऑडियो फ़ाइल तीन अलग-अलग फ़ॉरमेट में है, अपनी सुविधानुसार कोई एक फ़ॉरमेट चुनें)
| VBR MP3 | 64Kbps MP3 | Ogg Vorbis |
Kavya-path of Anupama Chauhan on Radio Salaam Namaste
नाता का उच्च गुणवत्ता का पॉडकास्ट यहाँ भी सुना जा सकता है।


दिनांक ८/७/२००९ से १४/७/२००९, मदन मोहन साहब की पुण्यतिथि तक हर शाम सुनिए/पढिये मदन साहब के स्वरबद्ध कुछ बेमिसाल गीत सिर्फ ओल्ड इस गोल्ड पर.
पंकज अवस्थी के आरोपों को निरस्त करते हुए संगीतकार प्रीतम चकवर्ती ने कहा है कि फिल्म न्यू यार्क का गीत "है जूनून" किसी अन्य गीत की नक़ल नहीं है. हालाँकि यशराज फिल्म्स के आग्रह पर पंकज ने अपने आरोप वापस तो ले लिए, पर तब तक क्षति घट चुकी थी और इन्टरनेट पर प्रीतम के खिलाफ पर्याप्त सामग्रियां पोस्ट हो चुकी थी. प्रीतम ने कहा कि वो इन आरोपों से बेहद दुखी हुए हैं, उन्होंने कहा -"यदि मैं कहीं से प्रेरित हुआ होता तो मैं खुले-आम उसे स्वीकार करने से भी नहीं हिचकता. जैसा कि फिल्म रेस के मामले में हुआ था. मैं अपने संगीत की कसम खाकर कह सकता हूँ कि ये गीत मेरा ओरिजनल है." अब प्रीतम जी इतना कह रहे हैं तो मानना ही पड़ेगा भाई.

पॉडकास्ट कवि सम्मेलन का मई 2009 अंक


आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)
5 श्रोताओं का कहना है :
अनुपमा जी
बहुत-बहुत बधाई। आपकी आवाज़ को रेडियो पर सुनना सुखद लगा।
बहुत बधाई. बढ़िया रहा आपको सुनना.
अनुपमा जी, आपकी आवाज़ अमरीका तक पहुँची और हमने सुनी, बहुत अच्छा लगा।
अनुपमा के माध्यम से युग्म फ़िर से गुंजा |
सभी को बधाई |
-- अवनीश
अनुपमा जी के नामानुसार
अनुपम है आवाज भी
अमेरिका में गूँज उठा है
हिन्द-युग्म का साज भी
इससे पहने निखिल भाई ने
मन मोहा श्रोताओं का
डलास शहर से तार जुड़ गया
हिन्द-युग्म के गाँव का
- बहुत बहुत बधाई अनुपमा जी को और
आदित्य जी को जो सुदूर में जुटे हैं हिन्दी के
प्रचार और प्रसार में..
जय हिन्द- जय हिन्दी
आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)